फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   What's the big deal if you have low marks... there are other ways to succeed in life

Bareilly News: कम नंबर तो क्या गम... जीवन में सफलता के रास्ते और भी हैं

Sat, 26 Apr 2025 02:55 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 26 Apr 2025 02:55 AM IST
विज्ञापन
What's the big deal if you have low marks... there are other ways to succeed in life
नीरज पाठक, रजिस्ट्रार
बरेली। यूपी बोर्ड परीक्षा के घोषित परिणाम में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में कई विद्यार्थियों का मुंह मीठा हुआ तो कुछ के चेहरे मुरझाए। विशेषज्ञों ने इन विद्यार्थियों से निराश न होने की अपील की है। विशेषज्ञ कहते हैं कि सफलता अंकों से नहीं बल्कि हुनर से मिलती है, जिसे निखारना जरूरी है।
विज्ञापन

जिले में तैनात कई अधिकारियों को भी इन दोनों ही परीक्षाओं में मनचाहे अंक नहीं मिले थे, पर हताशा के बजाय उन्होंने कड़ी मेहनत का रास्ता चुना और अफसर बनने में सफल रहे। एनसीईआरटी मनोदर्पण के काउंसलर डाॅ. अमित कुमार यादव के मुताबिक जिन बच्चों के नंबर कम आए हैं, वे खुद वजह की समीक्षा करें। शैक्षिक और कॅरिअर के लिहाज से भी आकलन करें।
विज्ञापन

सकारात्मक रुख अपनाएं और भविष्य में कैसे सुधार होगा, मंथन करें। वहीं, अभिभावकों को भी ऐसी स्थिति में नाराजगी जताने या मारने-पीटने के बजाय बच्चों को समझाने पर जोर दें। बच्चा क्यों मनमुताबिक अंक हासिल नहीं कर सका, इसके व्यावहारिक पक्ष देखें। हुनर पहचानकर तराशने में सहयोग करें। स्क्रूटनी, सप्लीमेंटरी के लिए आवेदन कर अंक सुधार सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


लक्ष्य तय करें, अंक सफलता का नहीं होता पैमाना
जिला पूर्ति अधिकारी नीरज सिंह ने बताया कि कानपुर से उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी। क्रमवार 65 और 68 फीसदी अंक हासिल किए थे, जबकि 75 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल करने का अनुमान था। आईएएस और पीसीएस की परीक्षा दी, इंटरव्यू तक पहुंचे पर सफल नहीं हुए। वर्ष 2007 पीसीएस की परीक्षा में उनका चयन हुआ। कहा कि लक्ष्य तय कर मेहनत करें तो सफलता जरूरी मिलेगी।

तैयारी के अनुकूल सवाल नहीं आए, मिले कम अंक
फर्म सोसाइटीज एंड चिट्स रजिस्ट्रार नीरज पाठक ने गोरखपुर में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा दी। क्रमवार 50 और 68 फीसदी अंक मिले थे। बताया कि जिन सवालों को तैयार करके गए थे, वे आए ही नहीं। बावजूद 2016 बैच में पीसीएस अफसर बनने का लक्ष्य हासिल किया। कहा कि इससे पूर्व एसिस्टेंट प्रोफेसर, एपीओ, चकबंदी अधिकारी, ईओ की परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी।


घबराए नहीं, डटे रहे और बन गए पीसीएस अधिकारी
जौनपुर निवासी स्वास्थ्य विभाग के पीसीएस अधिकारी राकेश ने बताया कि हाईस्कूल की परीक्षा में प्रथम और इंटरमीडिएट में द्वितीय श्रेणी में पास हुए थे, पर सिविल सेवक बनने के लिए जुटे रहे। जेआरएफ, पीएचडी की। आईएएस परीक्षा का साक्षात्कार भी दिया था, पर चयनित नहीं हुए। फिर पीसीएस की तैयारी की और 2016 बैच में सफलता हासिल की। कहा कि उनके एक साथी हाईस्कूल मेें फेल हो गए थे पर अगले साल अच्छे अंक से पास हुए। पीसीएस जे की परीक्षा पास कर वर्तमान में जिला जज हैं। कहा कि लक्ष्य बनाएं और सफल होने तक डटे रहें।

नीरज पाठक, रजिस्ट्रार

नीरज पाठक, रजिस्ट्रार

नीरज पाठक, रजिस्ट्रार

नीरज पाठक, रजिस्ट्रार

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed