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एक घंटे की बारिश में सड़क पर बह निकले निगम के दावे

Wed, 24 Jun 2020 12:15 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jun 2020 12:15 AM IST
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waterlogged in city
बरेली। नालों की बेहतर तरीके से सफाई होने के नगर निगम के दावों का सच मंगलवार को हुआ बारिश में सामने आ गया। लोगों को जिसका डर था, वही हुआ। करीब एक घंटे की बारिश में शहर के कई इलाकों में पानी भर गया। कुछ जगहों पर तो घरों में बारिश का पानी घुस गया। दर्जनों इलाके तालाब में तब्दील हो गए। नालों से उफनकर कीचड़ सड़कों पर बहने लगी।
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मानसून से पहले नगर निगम ने शहर के सभी छोटे-बड़े नालों की सफाई करने की बात कहते हुए शहर को बारिश में जलभराव से मुक्ति मिलने का दावा किया था, लेकिन मंगलवार को हुई बारिश ने नगर निगम की पोल खोलकर रख दी है। सुबह हुई बारिश से शाम तक सड़कों पर आफत रही। सड़कें तालाबों में बदल गईं। नालों से उफनकर कीचड़ सड़कों पर आ गई। अमर उजाला की टीम ने हालात का जायजा लिया तो ज्यादातर मोहल्लों में लोग जलभराव और गंदगी से जूझते नजर आए।
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स्थान- वंशीनगला
यहां बारिश के बाद दोपहर 12 बजे तक पानी नहीं निकला था। लोग सड़कों पर भरे पानी से होकर ही निकलने को मजबूर दिखे। घरों के सामने पानी भरा होने से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दुकानदार राकेश ने बताया- यह तो यहां हर साल की समस्या है। नगर निगम सिर्फ दावे करता है, लेकिन लोगों को जलभराव से जूझना ही पड़ता है। सड़क पर भरे पानी से होकर कोई वाहन तेजी से निकल जाए तो दुकान के अंदर पानी आ जात है।
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स्थान- सिकलापुर
यहां फर्नीचर मंडी में दुकानदारों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। बाजार की कई सड़कों पर जलभराव की स्थिति थी। दुुकानदार और ग्राहक मजबूरन पानी से होकर निकल रहे थे। ठेले वाले पैदल पानी में घुसकर ठेले खींच रहे थे। मोहल्ले के जयप्रकाश राजपूत ने बताया कि यहां बाजार में हर बारिश में यही हाल होता है। पूरी बरसात नरक रहेगा। इस बार बाजार के लोगों ने अभी के हालात पर मुख्यमंत्री को ट्वीट भी किए हैं।
स्थान- सुभाषनगर
यहां मोहल्ले की गलियों और खासकर पुलिया के नीचे कमर से ऊपर तक पानी बह रहा था। बारिश के बाद भी करीब दो घंटे तक पुलिया के नीचे आवागमन ठप रहा। नगर निगम ने दावा किया था कि इस बार लोगों को जलभराव से नहीं जूझना होगा, लेकिन मंगलवार को हुई करीब घंटे भर की बारिश में ही हालात बदतर हो गए।
स्थान- संजयनगर
बारिश के दौरान हर साल यहां भी जलभराव की स्थिति रहती है। नगर निगम के अधिकारियों को भी पता है कि यहां हालात और खराब होंगे लेकिन इसके बाद भी नालों की सफाई ढंग से नहीं की जाती है। नतीजा यह होता है कि यदि एक घंटे भी बारिश हो जाए तो कम से कम छह-सात घंटे तक जलभराव की स्थिति बनी रहती है। बाजार की सड़कों के गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है।
स्थान- हजियापुर
बारिश सुबह दस बजे के करीब रुक गई, लेकिन यहां सड़कों से भरा पानी दोपहर तीन बजे तक भी नहीं निकल सका। यहां जलभराव की स्थिति ऐसी ही रहती है। मोहल्ले के नाले भी गंदगी से पटे पड़े हैं। विभाग के सिर्फ हवाई कागजों में दावे हैं कि वह नालों की सफाई करा रहा है और लोगों को जलभराव से नहीं जूझना होगा।
स्थान- झूलेलाल गेट अंडर पास
जलभराव का हाल यहां ऐसा रहा कि चौपहिया वाहन रेंगते रहे। कुछ दो पहिया वाहन के साइलेंसर में पानी जाने के कारण वह बीच में ही बंद हो गए। ऐसे में लोग वाहन को पैदल लेकर आए। अंडर पास के नीचे से सबसे ज्यादा दिक्कत दो पहिया वाहनों को हुई। क्योंकि यहां चौपहिया वाहन ही किसी तरह से रेंगते हुए निकल पा रहे थे।

3 गुना ज्यादा खर्च.. फिर भी जलभराव
नगर निगम ने पिछली बार से तीन गुना ज्यादा पैसा इस बार नालों के निर्माण और सफाई पर खर्च किया। इसके बाद भी जरा सी बारिश में पूरा शहर जलभराव से जूझने लगा। पिछली बार नगर निगम ने नालों के निर्माण और सफाई पर एक करोड़ खर्च किए थे। इस बार यह बजट तीन करोड़ पचास लाख रुपये रखा गया। हालांकि इसके बावजूद नालों का जो हाल पिछले साल था, वैसा ही इस साल भी है।
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