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खर्चा ज्यादा पानी कम, शहर में शुरू हुआ वाटर ऑडिट
बरेली।
Updated Thu, 13 Apr 2017 12:58 AM IST
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Water overdue expenditure, Water audit started in the city
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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शहर में हर दिन करीब 110 मिलियन लीटर पेयजल आपूर्ति हो रही है फिर भी शहरवासी प्यासे हैं। कभी लोगाें को सप्लाई मिल रही है तो कभी नहीं। नगर निगम पूरे सिस्टम पर हर महीने तीन करोड़ रुपये से ज्यादा खर्चा करता है लेकिन आमदनी इसकी चौथाई भी नहीं है। इसलिए भारत सरकार ने वाटर ऑडिट शुरू कराया है। बुधवार पहुंची टीम ने नलकूपों पर ऑडिट शुरू कर दिया है। इससे नगर निगम में हड़कंप मचा हुआ है।
‘अमृत’ योजना के तहत भारत सरकार ने बरेली समेत कुछ चुनिंदा शहरों में वाटर ऑडिट शुरू कराया है। बताया जाता है कि इससे नगर निगम में संचालित पेयजल योजनाओं में हो रहे घपलाें की परत भी खुल सकती है। यह अपने तरह का पहला ऑडिट बताया जा रहा है जो पेयजल आपूर्ति सिस्टम पर खर्च होने वाली राशि और उत्पादन आदि का खुलासा करने के लिए हो रहा है। बुधवार सुबह दिल्ली से आई छह सदस्यीय टीम ने शहर के विभिन्न नलकूपों पर आधुनिक उपकरणों के सहारे पड़ताल शुरू की। शहर में 64 नलकूप हैं, इनमें ज्यादातर बंद ही रहते हैं या फिर चलाए नहीं जाते हैं। कभी बिजली का फाल्ट तो कभी कर्मचारियों की मनमानी। किसी न किसी कारण से बंद रहने वाले इन नलकूपों पर हर महीने करीब एक करोड़ रुपए बिजली बिल में जमा होता है।
भारत सरकार की एजेंसी करेगी जांच
भारत सरकार ने अपनी एजेंसी एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेस (ईईएसएल) विद्युत मंत्रालय माध्यम से ऑडिट शुरू कराया है। इसके बेहतर परिणाम जानने के लिए निजी कंपनी मिटकॉन कंसल्टेंसी एंड इंजीनियरिंग सर्विसेज को जिम्मेदारी सौंपी है। ऑडिट टीम करीब दस दिन तक शहर में रहकर सभी नलकूपों की गुणवत्ता, उत्पादन, वितरण, खर्चे आदि की रिपोर्ट तैयार करेगा। पहले अधिशासी अभियंता आरबी राजपूत, जेई पीसी आर्या आदि ऑडिट टीम के साथ रहे और नलकूप संचालन संबंधी तकनीक बताई।
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शहर में वाटर ऑडिट पहली बार शुरू हुआ है, जलक ल विभाग ऑडिट टीम का सहयोग रहा है। दस दिन तक चलने वाले इस ऑडिट की रिपोर्ट आने के बाद अपेक्षित सुधार कराये जाएंगे।
आरबी राजपूत, अधिशासी अभियंता, जल कल
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‘अमृत’ योजना के तहत भारत सरकार ने बरेली समेत कुछ चुनिंदा शहरों में वाटर ऑडिट शुरू कराया है। बताया जाता है कि इससे नगर निगम में संचालित पेयजल योजनाओं में हो रहे घपलाें की परत भी खुल सकती है। यह अपने तरह का पहला ऑडिट बताया जा रहा है जो पेयजल आपूर्ति सिस्टम पर खर्च होने वाली राशि और उत्पादन आदि का खुलासा करने के लिए हो रहा है। बुधवार सुबह दिल्ली से आई छह सदस्यीय टीम ने शहर के विभिन्न नलकूपों पर आधुनिक उपकरणों के सहारे पड़ताल शुरू की। शहर में 64 नलकूप हैं, इनमें ज्यादातर बंद ही रहते हैं या फिर चलाए नहीं जाते हैं। कभी बिजली का फाल्ट तो कभी कर्मचारियों की मनमानी। किसी न किसी कारण से बंद रहने वाले इन नलकूपों पर हर महीने करीब एक करोड़ रुपए बिजली बिल में जमा होता है।
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भारत सरकार की एजेंसी करेगी जांच
भारत सरकार ने अपनी एजेंसी एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेस (ईईएसएल) विद्युत मंत्रालय माध्यम से ऑडिट शुरू कराया है। इसके बेहतर परिणाम जानने के लिए निजी कंपनी मिटकॉन कंसल्टेंसी एंड इंजीनियरिंग सर्विसेज को जिम्मेदारी सौंपी है। ऑडिट टीम करीब दस दिन तक शहर में रहकर सभी नलकूपों की गुणवत्ता, उत्पादन, वितरण, खर्चे आदि की रिपोर्ट तैयार करेगा। पहले अधिशासी अभियंता आरबी राजपूत, जेई पीसी आर्या आदि ऑडिट टीम के साथ रहे और नलकूप संचालन संबंधी तकनीक बताई।
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शहर में वाटर ऑडिट पहली बार शुरू हुआ है, जलक ल विभाग ऑडिट टीम का सहयोग रहा है। दस दिन तक चलने वाले इस ऑडिट की रिपोर्ट आने के बाद अपेक्षित सुधार कराये जाएंगे।
आरबी राजपूत, अधिशासी अभियंता, जल कल