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‘न ताला लगने देंगे, न वीआरएस लेंगे’
बरेली
Updated Mon, 05 Jan 2015 01:40 AM IST
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ट्रेड यूनियन और श्रमिकों की हुई विशेष संयुक्त बैठक में फैसला लिया गया कि ‘विमको में न ताला लगने देंगे न वीआरएस लेंगे।’ संघर्ष समिति ने आईटीसी प्रबंधन पर झूठ बोलने और वीआरएस मुद्दे पर गुमराह करने का आरोप लगाया। वक्ताओं ने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया वे कारखाना बचाने के लिए आगे आएं।
विद्युत अतिथि गृह पर जुटे ट्रेड यूनियन और विमको श्रमिक संगठन नेताओं ने ऐतिहासिक विमको कारखाना बचाने के लिए मैराथन बैठक की। वक्ताओं ने आईटीसी पर तीखे प्रहार किए। इंटक, बीएमएस और वामपंथी श्रमिक संगठनों ने कहा कि आईटीसी प्रबंधन ने कोलकाता और चेन्नई में जो हिटलरशाही चलायी है वह बरेली में इस्तेमाल नहीं होने दी जाएगी। सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि विमको को बचाने के लिए जनता से सहयोग लिया जाए। जन प्रतिनिधियों से आग्रह किया गया कि वे मनगढ़ंत और अनर्गल बयानबाजी न कर कारखाना बचाने के लिए आगे आएं।
ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि विमको को बचाने के लिए सभी श्रमिक सड़कों पर उतरेंगे क्योंकि जिले से एक और उद्योग बंद होने की लाइन में है। इससे नौ सौ परिवार प्रभावित होंगे। यदि राजनेता प्रभावित परिवार और उद्योग से सहानुभूति रखते हैं तो वे श्रमिकों के बीच आकर अपनी स्थिति साफ करें। तय किया गया कि छह जनवरी मंगलवार सुबह दस बजे सभी ट्रेड यूनियन और श्रमिक संगठन विमको गेट पर एकत्र होकर प्रबंधन को घेरेंगे। आठ जनवरी को श्रमिकों से जनमत संग्रह होगा कि वे वीआरएस चाहते या कारखाना चलाना। वक्ताओं ने कहा कि विमको कारखाना बचाने के लिए आरपार का संघर्ष शुरू होगा। जगदीश शर्मा, इंटक प्रमुख सतीश मेहता, बीएमएस नेता राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल, सीटू नेता राजीव शांत, तारकेश्वर चतुर्वेदी, प्यारेलाल प्रजापति, नरेंद्र सक्सेना, महेश उपाध्याय, माजिद, ओमप्रकाश, अख्तर खां, भारत सिंह आदि ने विचार रखे।
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विद्युत अतिथि गृह पर जुटे ट्रेड यूनियन और विमको श्रमिक संगठन नेताओं ने ऐतिहासिक विमको कारखाना बचाने के लिए मैराथन बैठक की। वक्ताओं ने आईटीसी पर तीखे प्रहार किए। इंटक, बीएमएस और वामपंथी श्रमिक संगठनों ने कहा कि आईटीसी प्रबंधन ने कोलकाता और चेन्नई में जो हिटलरशाही चलायी है वह बरेली में इस्तेमाल नहीं होने दी जाएगी। सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि विमको को बचाने के लिए जनता से सहयोग लिया जाए। जन प्रतिनिधियों से आग्रह किया गया कि वे मनगढ़ंत और अनर्गल बयानबाजी न कर कारखाना बचाने के लिए आगे आएं।
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ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि विमको को बचाने के लिए सभी श्रमिक सड़कों पर उतरेंगे क्योंकि जिले से एक और उद्योग बंद होने की लाइन में है। इससे नौ सौ परिवार प्रभावित होंगे। यदि राजनेता प्रभावित परिवार और उद्योग से सहानुभूति रखते हैं तो वे श्रमिकों के बीच आकर अपनी स्थिति साफ करें। तय किया गया कि छह जनवरी मंगलवार सुबह दस बजे सभी ट्रेड यूनियन और श्रमिक संगठन विमको गेट पर एकत्र होकर प्रबंधन को घेरेंगे। आठ जनवरी को श्रमिकों से जनमत संग्रह होगा कि वे वीआरएस चाहते या कारखाना चलाना। वक्ताओं ने कहा कि विमको कारखाना बचाने के लिए आरपार का संघर्ष शुरू होगा। जगदीश शर्मा, इंटक प्रमुख सतीश मेहता, बीएमएस नेता राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल, सीटू नेता राजीव शांत, तारकेश्वर चतुर्वेदी, प्यारेलाल प्रजापति, नरेंद्र सक्सेना, महेश उपाध्याय, माजिद, ओमप्रकाश, अख्तर खां, भारत सिंह आदि ने विचार रखे।
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