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अस्थाई श्रमिकों की 17 से हड़ताल की चेतावनी
बरेली
Updated Fri, 16 Jan 2015 01:44 AM IST
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विमको में काम करने वाले 57 अस्थाई कर्मचारियों ने स्थाई कर्मचारियों की तरह वीआरएस की सुविधाएं देने की मांग को लेकर गुरुवार को प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी और हंगामा किया। इन्होंने 17 जनवरी से फैक्ट्ी के गेट पर हड़ताल की घोषणा की है। इनका कहना है कि काम न मिलने के कारण उनके परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। यह भी चेतावनी दी है कि हड़ताल पर बैठने के दौरान किसी भी तरह की घटना हुई तो प्रबंधन और पांचों यूनियन के नेता जिम्मेदार होंगे।
एवजी पर काम करने वाले कर्मचरियों को पैकेज मिलेगा या नहीं यह फैसला कंपनी के हेड आफिस से होगा। हालांकि अप्रेंटिस कर रहे कर्मचारियों के साथ प्रबंधन की वार्ता 16 जनवरी को फिर से होगी। दूसरी ओर प्रबंधन ने श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई को देखते हुए कंपनी के क्वार्टर खाली करने की अवधि 31 जनवरी के स्थान पर 31 मार्च तक दी है। कालोनी में रहने वाले श्रमिकों को वीआरएस की राशि के रूप में 50 हजार रुपये दिए गए हैं। अवशेष 75 हजार रुपये क्वार्टर खाली होने के दिए जाएंगे।
फैक्ट्री मुख्यालय से आई अधिकारियों की टीम बृहस्पतिवार को वापस चली गई। संकेत मिले हैं कि अगले सप्ताह यह टीम फिर से बरेली आएगी। अब तक 500 से अधिक श्रमिकों को सवा-सवा लाख के चेकों का भुगतान किया जा चुका है। इसके अलावा कंपनी ने पुराने सुरक्षाकर्मियों को हटाकर नए सुरक्षा कर्मियों को तैनात कर लिया है। मुख्यगेट पर पुलिस तैनात कर दी गई है।
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दूसरी ओर सीपीएम, दुग्ध उत्पादक संघ सहित कई श्रमिक संगठनों ने विमको को बंद करने की निंदा की है। उन्होंने प्रबंधन के फैसले के खिलाफ आंदोलन करने का फैसला लिया है।
विमको में जोड़
पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने कहा है कि मैैं आरपार की लड़ाई के लिए श्रमिकों के साथ हूं। प्रदेश और केंद्र सरकार के ढुलमुल रवैया के चलते एक बड़ी फैक्ट्री बंद हो गई है। आईटीसी कोई नया प्रोजेक्ट तैयार करेगी, तब ऐसी दशा में पुराने श्रमिकों को ही कंपनी प्राथमिकता दे, जिससे कि उन्हें रोजगार मिल सकेगी। यह आश्वासन उन्होंने अपने कार्यालय पर विमको के श्रमिकों की समस्याओं को लेकर आए श्रमिक सीपीआईएम के नेता नरेश सिंह, संयुक्त सचिव सीटू चंद्रपाल सिंह, मुहम्मद यासीन आदि को दिया।
इन नेताओं ने कहा कि आईटीसी यहां जल्द ही माचिस के मसाले, अगरबत्ती तथा धूपबत्ती बनाने की संभावनाएं तलाश रही है। इस नामचीन फैक्ट्री के बंद होने से श्रमिक नेताओं में रोष व्याप्त है।
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एवजी पर काम करने वाले कर्मचरियों को पैकेज मिलेगा या नहीं यह फैसला कंपनी के हेड आफिस से होगा। हालांकि अप्रेंटिस कर रहे कर्मचारियों के साथ प्रबंधन की वार्ता 16 जनवरी को फिर से होगी। दूसरी ओर प्रबंधन ने श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई को देखते हुए कंपनी के क्वार्टर खाली करने की अवधि 31 जनवरी के स्थान पर 31 मार्च तक दी है। कालोनी में रहने वाले श्रमिकों को वीआरएस की राशि के रूप में 50 हजार रुपये दिए गए हैं। अवशेष 75 हजार रुपये क्वार्टर खाली होने के दिए जाएंगे।
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फैक्ट्री मुख्यालय से आई अधिकारियों की टीम बृहस्पतिवार को वापस चली गई। संकेत मिले हैं कि अगले सप्ताह यह टीम फिर से बरेली आएगी। अब तक 500 से अधिक श्रमिकों को सवा-सवा लाख के चेकों का भुगतान किया जा चुका है। इसके अलावा कंपनी ने पुराने सुरक्षाकर्मियों को हटाकर नए सुरक्षा कर्मियों को तैनात कर लिया है। मुख्यगेट पर पुलिस तैनात कर दी गई है।
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दूसरी ओर सीपीएम, दुग्ध उत्पादक संघ सहित कई श्रमिक संगठनों ने विमको को बंद करने की निंदा की है। उन्होंने प्रबंधन के फैसले के खिलाफ आंदोलन करने का फैसला लिया है।
विमको में जोड़
पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने कहा है कि मैैं आरपार की लड़ाई के लिए श्रमिकों के साथ हूं। प्रदेश और केंद्र सरकार के ढुलमुल रवैया के चलते एक बड़ी फैक्ट्री बंद हो गई है। आईटीसी कोई नया प्रोजेक्ट तैयार करेगी, तब ऐसी दशा में पुराने श्रमिकों को ही कंपनी प्राथमिकता दे, जिससे कि उन्हें रोजगार मिल सकेगी। यह आश्वासन उन्होंने अपने कार्यालय पर विमको के श्रमिकों की समस्याओं को लेकर आए श्रमिक सीपीआईएम के नेता नरेश सिंह, संयुक्त सचिव सीटू चंद्रपाल सिंह, मुहम्मद यासीन आदि को दिया।
इन नेताओं ने कहा कि आईटीसी यहां जल्द ही माचिस के मसाले, अगरबत्ती तथा धूपबत्ती बनाने की संभावनाएं तलाश रही है। इस नामचीन फैक्ट्री के बंद होने से श्रमिक नेताओं में रोष व्याप्त है।