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वीरेन दा की कविताओं में आम जन को मिला खास मुकाम
बरेली।
Updated Mon, 08 May 2017 01:16 AM IST
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वीरेन दा की कविताओं में आम जन को मिला खास मुकाम
- फोटो : वीरेन दा की कविताओं में आम जन को मिला खास मुकाम
प्रसिद्ध साहित्यकार और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वीरेन डंगवाल पर केंद्रित साहित्य कला की अंतरराष्ट्रीय पत्रिका आधारशिला के विशेषांक का विमोचन रविवार को बरेली कॉलेज सभागार में हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार व कवि शामिल हुए और अपने अनुभव साझा किए। साहित्यकारों ने वीरेन डंगवाल के साहित्यिक जीवन के विभिन्न पहलुओं और उनकी कविताओं के भाव व रस को अपने शब्दों में बयां किया। कहा, एक वक्त था जब कविताओं में आम जन की झलक नहीं दिखती थी पर वीरेन दा ने अपनी कविताओं का सौंदर्य ही आम जन को खास बनाकर किया। उनकी कविताएं सामान्य जन से जुड़ी बातों को उकेरती हैं। साधारण शब्दों में असाधारण कविता लिखने की विलक्षण प्रतिभा के धनी थे डॉ. डंगवाल। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कमिश्नर डॉ. पीवी जगनमोहन, पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी, हिंदी व चीनी कवि त्रिनेत्र जोशी, बरेली कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सोमेश यादव, रूस से आए डॉ. अनिल जनविजय, वरिष्ठ पत्रकार प्रभात सिंह, आधारशिला पत्रिका के प्रधान संपादक दिवाकर भट्ट, डॉ. वीरेन डंगवाल की पत्नी रीटा डंगवाल ने पत्रिका का विमोचन किया।
वरिष्ट साहित्यकार व पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने कहा, लोगों को डॉ. डंगवाल की कविताओं से जुड़ना चाहिए। कविताएं पढ़कर ही जीवन के रस को समझा जा सकता है। डॉ. डंगवाल ने जीवन के विभिन्न पहलुओं को अपनी कविताओं से छुआ है। कमिश्नर डॉ. पीवी जगनमोहन ने कहा, एक साहित्यकार ही समाज की सोच को बदल सकता है। कहा, डॉ. डंगवाल के बारे में सुना है, छात्रों और शोधार्थियों को उनके साहित्य का पढ़ना चाहिए। चीनी कवि त्रिनेत्र जोशी ने अपने पुराने संस्मरण साझा किए। साधारण शब्दों से वीरेन दा ने दिल को छू जाने वाली कविताओं को लिखा है। उनकी लेखनी को आज के कविओं को समझना चाहिए। रूस से आए साहित्यकार डॉ. अनिल जनविजय ने डॉ. डंगवाल की कविता राम सिंह के बारे में विस्तार से बताया। कैसे एक फौजी अपने देश के लिए कुर्बान होने को तैयार हो जाता है। वरिष्ट पत्रकार दयाशंकर राय व साहित्यकार राजा खुगसाल ने डॉ. डंगवाल की कविताओं पर प्रकाश डाला। कहा कि उनकी कविताएं हमेशा जन मानस को झकझोरने वाली होती थी। कटारी रुकमणि इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। बरेली कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सोमेश यादव ने हिंदी विभाग में शिक्षक रहे डॉ. वीरेन डंगवाल से जुड़ी यादों को साझा किया। उन्होंने अपनी बात कविता के विषयों के चुनाव से शुरू की और कहा कि वीरेन दा विषय का चुनाव और फिर शब्दों को गूंथकर आत्मा तक समा जाने वाली कविता लिखते थे। वीरेन डंगवाल जैसा ईमानदार कवि आज के जमाने में मिलना मुश्किल है। उन्होंने अपनी बात कुछ इस तरह समाप्त की... जिंदगी था वो मेरी, मैंने जिया है उसे।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. एसी त्रिपाठी ने डॉ. वीरेन डंगवाल की कविताओं की गहराई को अपने शब्दों में बखूबी बयां किया। डॉ. एसपी मौर्या ने कहा कि डॉ. डंगवाल के साथ पंद्रह साल का अनुभव रहा। उनकी जैसी कविता और उसकी गहराई देखने को नहीं मिलती। प्रियदर्शनी मालवीय ने पढ़ाई के दौरान के अनुभव साझा किए। कहा कि कविता में सामान्य जन को लाने में वीरेन दा का जवाब नहीं। उनकी कविताओं में आम आदमी की तस्वीर झलकती थी। इसके बाद कार्यक्रम में आए वरिष्ठ साहित्यकारों और कवियों ने डॉ. डंगवाल की कविताओं पर विचार रखे। उनके व्यक्तित्व और जीवन जीने की शैली से जुड़े अनुभव साझा किए। इस मौके पर डॉ. डंगवाल की बहन डॉ. बीना डंगवाल, बेटा प्रशांत व प्रफुल्ल डंगवाल, अखिल भारतीय उत्तराखंड महासभा के राष्ट्रीय मंत्री राजेंद्र प्रसाद घिल्ड़याल, डॉ. एसपी मौर्या, डॉ. राहुल अवस्थी, डॉ. कमलेश बहुगुणा, डॉ. अजय त्रिवेदी, डॉ. नवनीत आदि लोग मौजूद रहे।
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डॉॅ. वीरेन डंगवाल के नाम पर सम्मान
आधारशिला के संपादक दिवाकर भट्ट ने डॉ. वीरेन डंगवाल के नाम पर आधारशिला फाउंडेशन और अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद की ओर से सालाना सम्मान देने का एलान किया। इसके तहत एक लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे। इसमें कवि, साहित्यकार और पत्रकारों के नाम चयनित किए जाएंगे। इसके लिए समितियां बनाई जाएंगी जो हर साला नामों का चयन करा करेंगी।
आधारशिला में डॉ. डंगवाल से जुड़े संस्मरण हैं खास
पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. दिवाकर भट्ट के अनुसार आधारशिला पत्रिका में डॉ. डंगवाल से जुड़े कई साहित्यकारों के संस्मरण दिए गए हैं। साहित्यकारों के लेख, कविता पर आलोचनात्मक समीक्षा, डॉ. डंगवाल की महत्वपूर्ण कविताएं, दूसरे कवियों द्वारा डॉ. डंगवाल पर लिखी कविताएं, उनके साथ रहे शिक्षक और छात्र के लेख व संस्मरण पत्रिका में खासतौर से दिए गए हैं।
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वरिष्ट साहित्यकार व पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने कहा, लोगों को डॉ. डंगवाल की कविताओं से जुड़ना चाहिए। कविताएं पढ़कर ही जीवन के रस को समझा जा सकता है। डॉ. डंगवाल ने जीवन के विभिन्न पहलुओं को अपनी कविताओं से छुआ है। कमिश्नर डॉ. पीवी जगनमोहन ने कहा, एक साहित्यकार ही समाज की सोच को बदल सकता है। कहा, डॉ. डंगवाल के बारे में सुना है, छात्रों और शोधार्थियों को उनके साहित्य का पढ़ना चाहिए। चीनी कवि त्रिनेत्र जोशी ने अपने पुराने संस्मरण साझा किए। साधारण शब्दों से वीरेन दा ने दिल को छू जाने वाली कविताओं को लिखा है। उनकी लेखनी को आज के कविओं को समझना चाहिए। रूस से आए साहित्यकार डॉ. अनिल जनविजय ने डॉ. डंगवाल की कविता राम सिंह के बारे में विस्तार से बताया। कैसे एक फौजी अपने देश के लिए कुर्बान होने को तैयार हो जाता है। वरिष्ट पत्रकार दयाशंकर राय व साहित्यकार राजा खुगसाल ने डॉ. डंगवाल की कविताओं पर प्रकाश डाला। कहा कि उनकी कविताएं हमेशा जन मानस को झकझोरने वाली होती थी। कटारी रुकमणि इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। बरेली कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सोमेश यादव ने हिंदी विभाग में शिक्षक रहे डॉ. वीरेन डंगवाल से जुड़ी यादों को साझा किया। उन्होंने अपनी बात कविता के विषयों के चुनाव से शुरू की और कहा कि वीरेन दा विषय का चुनाव और फिर शब्दों को गूंथकर आत्मा तक समा जाने वाली कविता लिखते थे। वीरेन डंगवाल जैसा ईमानदार कवि आज के जमाने में मिलना मुश्किल है। उन्होंने अपनी बात कुछ इस तरह समाप्त की... जिंदगी था वो मेरी, मैंने जिया है उसे।
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कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. एसी त्रिपाठी ने डॉ. वीरेन डंगवाल की कविताओं की गहराई को अपने शब्दों में बखूबी बयां किया। डॉ. एसपी मौर्या ने कहा कि डॉ. डंगवाल के साथ पंद्रह साल का अनुभव रहा। उनकी जैसी कविता और उसकी गहराई देखने को नहीं मिलती। प्रियदर्शनी मालवीय ने पढ़ाई के दौरान के अनुभव साझा किए। कहा कि कविता में सामान्य जन को लाने में वीरेन दा का जवाब नहीं। उनकी कविताओं में आम आदमी की तस्वीर झलकती थी। इसके बाद कार्यक्रम में आए वरिष्ठ साहित्यकारों और कवियों ने डॉ. डंगवाल की कविताओं पर विचार रखे। उनके व्यक्तित्व और जीवन जीने की शैली से जुड़े अनुभव साझा किए। इस मौके पर डॉ. डंगवाल की बहन डॉ. बीना डंगवाल, बेटा प्रशांत व प्रफुल्ल डंगवाल, अखिल भारतीय उत्तराखंड महासभा के राष्ट्रीय मंत्री राजेंद्र प्रसाद घिल्ड़याल, डॉ. एसपी मौर्या, डॉ. राहुल अवस्थी, डॉ. कमलेश बहुगुणा, डॉ. अजय त्रिवेदी, डॉ. नवनीत आदि लोग मौजूद रहे।
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डॉॅ. वीरेन डंगवाल के नाम पर सम्मान
आधारशिला के संपादक दिवाकर भट्ट ने डॉ. वीरेन डंगवाल के नाम पर आधारशिला फाउंडेशन और अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद की ओर से सालाना सम्मान देने का एलान किया। इसके तहत एक लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे। इसमें कवि, साहित्यकार और पत्रकारों के नाम चयनित किए जाएंगे। इसके लिए समितियां बनाई जाएंगी जो हर साला नामों का चयन करा करेंगी।
आधारशिला में डॉ. डंगवाल से जुड़े संस्मरण हैं खास
पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. दिवाकर भट्ट के अनुसार आधारशिला पत्रिका में डॉ. डंगवाल से जुड़े कई साहित्यकारों के संस्मरण दिए गए हैं। साहित्यकारों के लेख, कविता पर आलोचनात्मक समीक्षा, डॉ. डंगवाल की महत्वपूर्ण कविताएं, दूसरे कवियों द्वारा डॉ. डंगवाल पर लिखी कविताएं, उनके साथ रहे शिक्षक और छात्र के लेख व संस्मरण पत्रिका में खासतौर से दिए गए हैं।