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उर्स-ए-रजवी सज गईं रजा की गलियां, उर्स आज से
बरेली
Updated Tue, 16 Dec 2014 09:19 PM IST
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उर्स-ए-रजवी को लेकर रजा की गलियां सज गईं हैं। इसकी शुरुआत बुधवार से हो रही है। उर्स में शिरकत करने के लिए हजारों जायरीन आला हजरत की सरजमीं पर पहुंच चुके हैं। वहीं लोगों के हाजरी देने साथ ही सैकड़ों की तादाद में चादरें भी पेश की गईं।
सुन्नी मरकज के संस्थापक आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी का तीन रोजा उर्स बुधवार से मनाया जाएगा। इसे लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जायरीनों की आमद से शहर में रौनक बढ़ने लगी है। खास तौर से सौदागरान स्थित दरगाह शरीफ का मंजर देखने लायक है। तेज रोशनी से जगमगाती गलियां और यहां सजी दुकानें, किताबों, तुगरों, टोपी से लेकर फूल शीरीनी और मजार पर पेश करने के लिए गोटो जरी के काम की बिकती चादरें एक खूबसूरत नजारा पेश कर रही हैं। दरगाह की ओर देखें तो जायरीन की दीवानगी देखते ही बन रही है। दरगाह की गली में अदब से सिर झुका कर दाखिल होते जायरीन पीराने पीर की चौखट पर पहुंच कर चिपट जाते, चूमते और सिर से चेहरे तक हाथ फेरते दाखिल होते। मजार की चादरों का बोसा करते और आंखों से टपकते आंसुओं के साथ दुआ को दोनों हाथ उठा देते। इस बीच जिले के विभिन्न इलाकों से जुलूस के रूप में चादरों के आने और मजारात पेश करने का सिलसिला शुरू हो चुका है।
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सुन्नी मरकज के संस्थापक आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी का तीन रोजा उर्स बुधवार से मनाया जाएगा। इसे लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जायरीनों की आमद से शहर में रौनक बढ़ने लगी है। खास तौर से सौदागरान स्थित दरगाह शरीफ का मंजर देखने लायक है। तेज रोशनी से जगमगाती गलियां और यहां सजी दुकानें, किताबों, तुगरों, टोपी से लेकर फूल शीरीनी और मजार पर पेश करने के लिए गोटो जरी के काम की बिकती चादरें एक खूबसूरत नजारा पेश कर रही हैं। दरगाह की ओर देखें तो जायरीन की दीवानगी देखते ही बन रही है। दरगाह की गली में अदब से सिर झुका कर दाखिल होते जायरीन पीराने पीर की चौखट पर पहुंच कर चिपट जाते, चूमते और सिर से चेहरे तक हाथ फेरते दाखिल होते। मजार की चादरों का बोसा करते और आंखों से टपकते आंसुओं के साथ दुआ को दोनों हाथ उठा देते। इस बीच जिले के विभिन्न इलाकों से जुलूस के रूप में चादरों के आने और मजारात पेश करने का सिलसिला शुरू हो चुका है।
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