{"_id":"677848595de711bd830aa1c3","slug":"upsida-municipal-corporation-face-to-face-double-tax-on-entrepreneurs-bareilly-news-c-4-lko1064-554287-2025-01-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: यूपीसीडा, नगर निगम आमने-सामने, उद्यमियों पर टैक्स की दोहरी मार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: यूपीसीडा, नगर निगम आमने-सामने, उद्यमियों पर टैक्स की दोहरी मार
विज्ञापन
बरेली। वर्षो से बदहाल औद्योगिक क्षेत्र परसाखेड़ा के विकास में फिर से पेच फंस गया है। टैक्स आकलन को लेकर नगर निगम और राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) आमने-सामने आ गए हैं। वहीं, टैक्स की दोहरी मार पड़ने की आशंका से उद्यमी भी परेशान हैं।
दरअसल, बीते वर्ष 28 अक्तूबर को राज्य सरकार से जारी शासनादेश के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों को नगर निकाय और जिला पंचायत से बाहर कर दिया गया है। विकास की जिम्मेदारी यूपीसीडा को सौंप दी है। लिहाजा, क्षेत्र में विकास कार्य के लिए नियमानुसार यूपीसीडा की ओर से विकास शुल्क जमा करने के लिए उद्यमियों को नोटिस जारी होने लगे हैं। उनसे अक्तूबर, नवंबर, दिसंबर तीन माह का विकास शुल्क देने के लिए कहा गया है। नोटिस ने उद्यमियों की चिंता बढ़ा दी, क्योंकि उन्होंने मार्च 2025 तक का पूरा टैक्स नगर निगम में जमा करा रखा है।
दूसरी ओर, शासनादेश के बावजूद नगर निगम ने परसाखेड़ा में संचालित इकाइयों के उद्यमियों की ओर से जमा अग्रिम टैक्स और बकाया की जानकारी यूपीसीडा को नहीं दी है। लिहाजा, यूपीसीडा बगैर शुल्क के विकास कार्य कैसे कराए।
विज्ञापन
20 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से शुल्क मांग रहा यूपीसीडा
यूपीसीडा से जारी नोटिस के अनुसार उद्यमियों को 20 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से विकास शुल्क जमा कराना है। जिसे उद्यमी नगर निगम के टैक्स से ज्यादा मान रहे हैं, क्योंकि फैक्टरी, कार्यालय परिसर आदि मिलाकर एक इकाई का क्षेत्रफल औसतन करीब ढाई हजार से अधिक है। उद्यमियों ने विकास शुल्क की दर कम करने की मांग की है। उद्यमियों के मुताबिक वर्ष 1960 में यूपीसीडा ने औद्योगिक क्षेत्र परसाखेड़ा बसाया। वर्ष 2004 से विकास कार्य का जिम्मा नगर निगम को मिला। फिर भी क्षेत्र में विकास के नाम पर जर्जर सड़क, टूटे नाले, जलभराव की समस्या है। निर्माण का मुद्दा लगातार बैठकों में उद्यमी उठा रहे हैं।
- नगर निगम और यूपीसीडा के अधिकारियों को आपसी सामंजस्य से टैक्स का मुद्दा हल करना चाहिए, लेकिन इससे क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित नहीं होने चाहिए। उद्योग बंधु की बैठक में यह मुद्दा उठा भी था। - राजेश गुप्ता, उद्यमी
- जब तक औद्योगिक क्षेत्र परसाखेड़ा में विकास का जिम्मा यूपीसीडा के पास था तब तक कोई दिक्कत नहीं हुई। नगर निगम सिर्फ दावे करता रहा। विकास के नाम पर जर्जर सड़क, टूटे नाले ही हैं। - विमल रिवाड़ी, वरिष्ठ उद्यमी
- करीब 90 फीसदी उद्यमियों ने नगर निगम को मार्च तक का टैक्स दिया है। अब यूपीसीडा ने तीन माह का विकास शुल्क मांगा है। जो देना मुमकिन नहीं। इस पेच को अफसर आपस में सुलझाएं। - मयूर धीरवानी, चेयरमैन आईआईए
- परसाखेड़ा क्षेत्र को यूपीसीडा ने ही बसाया है। अब फिर उसे विकास का जिम्मा मिला है। क्षेत्र में क्या कार्य और कैसे होने हैं, इसकी जानकारी उनके पास है। नगर निगम को सहयोग करना चाहिए। - रजत मेहरोत्रा, सचिव, आईआईए
- शासनादेश के तहत औद्योगिक क्षेत्र के विकास का जिम्मा यूपीसीडा का है। विकास शुल्क के लिए नियमानुसार नोटिस दिए हैं। नगर निगम के पास कब तक के लिए कितना टैक्स जमा है, इसका डाटा हमारे पास नहीं है। - मंसूर कटियार, क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपीसीडा
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
दरअसल, बीते वर्ष 28 अक्तूबर को राज्य सरकार से जारी शासनादेश के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों को नगर निकाय और जिला पंचायत से बाहर कर दिया गया है। विकास की जिम्मेदारी यूपीसीडा को सौंप दी है। लिहाजा, क्षेत्र में विकास कार्य के लिए नियमानुसार यूपीसीडा की ओर से विकास शुल्क जमा करने के लिए उद्यमियों को नोटिस जारी होने लगे हैं। उनसे अक्तूबर, नवंबर, दिसंबर तीन माह का विकास शुल्क देने के लिए कहा गया है। नोटिस ने उद्यमियों की चिंता बढ़ा दी, क्योंकि उन्होंने मार्च 2025 तक का पूरा टैक्स नगर निगम में जमा करा रखा है।
विज्ञापन
दूसरी ओर, शासनादेश के बावजूद नगर निगम ने परसाखेड़ा में संचालित इकाइयों के उद्यमियों की ओर से जमा अग्रिम टैक्स और बकाया की जानकारी यूपीसीडा को नहीं दी है। लिहाजा, यूपीसीडा बगैर शुल्क के विकास कार्य कैसे कराए।
विज्ञापन
20 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से शुल्क मांग रहा यूपीसीडा
यूपीसीडा से जारी नोटिस के अनुसार उद्यमियों को 20 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से विकास शुल्क जमा कराना है। जिसे उद्यमी नगर निगम के टैक्स से ज्यादा मान रहे हैं, क्योंकि फैक्टरी, कार्यालय परिसर आदि मिलाकर एक इकाई का क्षेत्रफल औसतन करीब ढाई हजार से अधिक है। उद्यमियों ने विकास शुल्क की दर कम करने की मांग की है। उद्यमियों के मुताबिक वर्ष 1960 में यूपीसीडा ने औद्योगिक क्षेत्र परसाखेड़ा बसाया। वर्ष 2004 से विकास कार्य का जिम्मा नगर निगम को मिला। फिर भी क्षेत्र में विकास के नाम पर जर्जर सड़क, टूटे नाले, जलभराव की समस्या है। निर्माण का मुद्दा लगातार बैठकों में उद्यमी उठा रहे हैं।
- नगर निगम और यूपीसीडा के अधिकारियों को आपसी सामंजस्य से टैक्स का मुद्दा हल करना चाहिए, लेकिन इससे क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित नहीं होने चाहिए। उद्योग बंधु की बैठक में यह मुद्दा उठा भी था। - राजेश गुप्ता, उद्यमी
- जब तक औद्योगिक क्षेत्र परसाखेड़ा में विकास का जिम्मा यूपीसीडा के पास था तब तक कोई दिक्कत नहीं हुई। नगर निगम सिर्फ दावे करता रहा। विकास के नाम पर जर्जर सड़क, टूटे नाले ही हैं। - विमल रिवाड़ी, वरिष्ठ उद्यमी
- करीब 90 फीसदी उद्यमियों ने नगर निगम को मार्च तक का टैक्स दिया है। अब यूपीसीडा ने तीन माह का विकास शुल्क मांगा है। जो देना मुमकिन नहीं। इस पेच को अफसर आपस में सुलझाएं। - मयूर धीरवानी, चेयरमैन आईआईए
- परसाखेड़ा क्षेत्र को यूपीसीडा ने ही बसाया है। अब फिर उसे विकास का जिम्मा मिला है। क्षेत्र में क्या कार्य और कैसे होने हैं, इसकी जानकारी उनके पास है। नगर निगम को सहयोग करना चाहिए। - रजत मेहरोत्रा, सचिव, आईआईए
- शासनादेश के तहत औद्योगिक क्षेत्र के विकास का जिम्मा यूपीसीडा का है। विकास शुल्क के लिए नियमानुसार नोटिस दिए हैं। नगर निगम के पास कब तक के लिए कितना टैक्स जमा है, इसका डाटा हमारे पास नहीं है। - मंसूर कटियार, क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपीसीडा
अमर उजाला ब्यूरो