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जवान बेटे की मौत पर अस्पताल में हंगामा
बरेली
Updated Fri, 19 Feb 2016 02:06 AM IST
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बरेली। पीलीभीत बाईपास स्थित एक अस्पताल में गुरुवार सुबह एक किशोर की मौत के बाद परिजन भड़क गए। परिजनों ने डॉक्टराें पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जिस न्यूरोसर्जन के अंडर में मरीज को भर्ती किया गया था वह बिना बताए छुट्टी पर चले गए, जिससे इलाज में लापरवाही हुई। किशोर का पोस्टमार्टम कराया गया है। उसके पिता का कहना है कि वे अस्पताल व चिकित्सक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराएंगे।
बदायूं आवास विकास में रहने वाले राजीव सक्सेना के 18 वर्षीय बेटे वैभव सक्सेना चार फरवरी को सड़क हादसे में घायल हो गया था। पहले सिविल लाइंस स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से न्यूरो की दिक्कत सामने आने पर सात फरवरी को पीलीभीत बाईपास स्थित अस्पताल ले आए। राजीव का कहना है कि उन्होंने डॉ. सुधीर गुप्ता के अंडर में बच्चे को भर्ती कराया था, लेकिन वे 17 से 19 फरवरी तक बिना बताए छुट्टी पर चले गए। इस दौरान उन्होंने परिवार को भी कोई सूचना नहीं दी। वैभव वेंटीलेटर में भर्ती रहा और 18 फरवरी को सुबह मौत हो गई। इस दौरान ढाई लाख रुपये खर्च हुए। मौत के बाद परिजन भड़क गए उन्हाेंने खूब हंगामा किया। डॉक्टराें से अभद्रता भी की गई। राजीव सक्सेना ने बताया कि डॉक्टर के जाने से एक अन्य पेशेंट अपने मरीज को अस्पताल से छुट्टी करा कर ले गया। अस्पताल के डॉ. विमल कुमार भारद्वाज ने बताया कि केवल एक न्यूरोसर्जन मरीज को नहीं देख रहा था बल्कि पूरी टीम लगी थी। कई दिक्कताें की वजह से मरीज की मौत हुई है। इसके बारे में परिजनों को सब बता दिया गया था। ढाई लाख रुपये की बात झूठ है उनका 38 हजार रुपये शुल्क आया था जो माफ किया गया। डॉक्टरों ने एहतियातन पोस्टमार्टम भी करवाया।
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बदायूं आवास विकास में रहने वाले राजीव सक्सेना के 18 वर्षीय बेटे वैभव सक्सेना चार फरवरी को सड़क हादसे में घायल हो गया था। पहले सिविल लाइंस स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से न्यूरो की दिक्कत सामने आने पर सात फरवरी को पीलीभीत बाईपास स्थित अस्पताल ले आए। राजीव का कहना है कि उन्होंने डॉ. सुधीर गुप्ता के अंडर में बच्चे को भर्ती कराया था, लेकिन वे 17 से 19 फरवरी तक बिना बताए छुट्टी पर चले गए। इस दौरान उन्होंने परिवार को भी कोई सूचना नहीं दी। वैभव वेंटीलेटर में भर्ती रहा और 18 फरवरी को सुबह मौत हो गई। इस दौरान ढाई लाख रुपये खर्च हुए। मौत के बाद परिजन भड़क गए उन्हाेंने खूब हंगामा किया। डॉक्टराें से अभद्रता भी की गई। राजीव सक्सेना ने बताया कि डॉक्टर के जाने से एक अन्य पेशेंट अपने मरीज को अस्पताल से छुट्टी करा कर ले गया। अस्पताल के डॉ. विमल कुमार भारद्वाज ने बताया कि केवल एक न्यूरोसर्जन मरीज को नहीं देख रहा था बल्कि पूरी टीम लगी थी। कई दिक्कताें की वजह से मरीज की मौत हुई है। इसके बारे में परिजनों को सब बता दिया गया था। ढाई लाख रुपये की बात झूठ है उनका 38 हजार रुपये शुल्क आया था जो माफ किया गया। डॉक्टरों ने एहतियातन पोस्टमार्टम भी करवाया।
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