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Bareilly News: थम गई विवि की पीजी प्रवेश प्रक्रिया, रात 12 बजे तक सीटें की गईं लॉक
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- बरेली कॉलेज में 95 फीसदी सीटों पर हुए प्रवेश, कई कॉलेजों में खाली रह गईं सीटें
बरेली। बीते डेढ़ माह से चल रही रुहेलखंड विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया बृहस्पतिवार को थम गई। अंतिम दिन रात 12 बजे तक विश्वविद्यालय के पोर्टल पर सीट लॉक करने का काम हुआ ताकि प्रवेश के बाद सीट लॉक होने में कोई अड़चन न रहे।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से 10 सितंबर को संबद्ध कॉलेजों को पत्र जारी कर सभी चरणों में आवेदित अभ्यर्थियों को नियमानुसार 12 सितंबर तक प्रवेश देने के लिए कहा गया था। दो दिन का समय मिलने के बाद कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया को पूरा करने के लिए तीन चरणों में कार्य शुरू हुआ। मेरिट से प्रवेश, प्रवेश के बाद उनके प्रवेश पोर्टल पर दर्ज कराने और तीसरा चरण उनकी सीट ऑनलाइन लॉक कराना था।
नियमानुसार पोर्टल पर रात 12 बजे तक सीटें लॉक होती हैं। इसलिए कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के बाद फीस जमा होने पर प्रवेश समिति के सदस्य रात 12 बजे तक सीट लॉक करते रहे। जो विद्यार्थियों की सीट लॉक नहीं हुई वे प्रवेश होने के बाद भी कॉलेज में पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। जिसकी जिम्मेदारी संबंधित कॉलेज प्रशासन की होगी। इस पर आगे सुनवाई की गुंजाइश नहीं है।
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शाम तक 30 हजार से ज्यादा सीटें हुईं लॉक
विवि के प्रवेश नियंत्रक प्रो. एसके पांडेय के मुताबिक शाम चार बजे तक विश्वविद्यालय के पोर्टल पर संबद्ध कॉलेजों में पीजी की 30 हजार से ज्यादा सीटें लॉक हो चुकी थीं। रात 12 बजे तक भी सीटें लॉक की गईं। ऐसे में कितने विद्यार्थियों का प्रवेश हुआ इसका सटीक रिकॉर्ड शुक्रवार को ही मिल सकता है। बताया कि स्नातक में 1.5 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों का प्रवेश हुआ था। हालांकि, कई कॉलेजों में सीटें नहीं भर सकी हैं।
पांच फीसदी सीटें बरेली कॉलेज में खाली
बरेली कॉलेज की मुख्य प्रवेश नियंत्रक प्रो. वंदना शर्मा के मुताबिक एमएससी जूलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ, बॉटनी, एमकॉम, एमए उर्दू, हिंदी, सोशियोलॉजी, पॉलिटिकल साइंस, फिलॉसफी, हिस्ट्री, इंग्लिश, ड्राइंग में अधिकांश सीटें लॉक हो गई हैं। एमएससी स्टेटिस्टिक्स, सैन्य विज्ञान, एमए संस्कृत, मैथ, मिलिट्री साइंस, इकोनॉमिक्स में प्रवेश कम हुए हैं।
परिणाम जारी होने में देरी समेत
कई वजहों से प्रवेश में बाधा
बताते हैं कि पीजी में सीटें खाली होने की वजह कक्षा में 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य होना, स्नातकोत्तर के समानांतर एमए प्राइवेट के फॉर्म से प्रवेश, नवीन (एनईपी) पाठ्यक्रम के अनुकूल पाठ्यक्रम की किताबें उपलब्ध न होना भी है। स्नातक का परिणाम देर से जारी होने, विद्यार्थियों की स्नातक परीक्षा में बैक (फेल) आई है। कुछ परिणाम संबंधी समस्या समाधान के लिए विद्यार्थी विवि से लेकर कॉलेज तक चक्कर काट रहे हैं। अमर उजाला ब्यूरो
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बरेली। बीते डेढ़ माह से चल रही रुहेलखंड विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया बृहस्पतिवार को थम गई। अंतिम दिन रात 12 बजे तक विश्वविद्यालय के पोर्टल पर सीट लॉक करने का काम हुआ ताकि प्रवेश के बाद सीट लॉक होने में कोई अड़चन न रहे।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से 10 सितंबर को संबद्ध कॉलेजों को पत्र जारी कर सभी चरणों में आवेदित अभ्यर्थियों को नियमानुसार 12 सितंबर तक प्रवेश देने के लिए कहा गया था। दो दिन का समय मिलने के बाद कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया को पूरा करने के लिए तीन चरणों में कार्य शुरू हुआ। मेरिट से प्रवेश, प्रवेश के बाद उनके प्रवेश पोर्टल पर दर्ज कराने और तीसरा चरण उनकी सीट ऑनलाइन लॉक कराना था।
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नियमानुसार पोर्टल पर रात 12 बजे तक सीटें लॉक होती हैं। इसलिए कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के बाद फीस जमा होने पर प्रवेश समिति के सदस्य रात 12 बजे तक सीट लॉक करते रहे। जो विद्यार्थियों की सीट लॉक नहीं हुई वे प्रवेश होने के बाद भी कॉलेज में पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। जिसकी जिम्मेदारी संबंधित कॉलेज प्रशासन की होगी। इस पर आगे सुनवाई की गुंजाइश नहीं है।
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शाम तक 30 हजार से ज्यादा सीटें हुईं लॉक
विवि के प्रवेश नियंत्रक प्रो. एसके पांडेय के मुताबिक शाम चार बजे तक विश्वविद्यालय के पोर्टल पर संबद्ध कॉलेजों में पीजी की 30 हजार से ज्यादा सीटें लॉक हो चुकी थीं। रात 12 बजे तक भी सीटें लॉक की गईं। ऐसे में कितने विद्यार्थियों का प्रवेश हुआ इसका सटीक रिकॉर्ड शुक्रवार को ही मिल सकता है। बताया कि स्नातक में 1.5 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों का प्रवेश हुआ था। हालांकि, कई कॉलेजों में सीटें नहीं भर सकी हैं।
पांच फीसदी सीटें बरेली कॉलेज में खाली
बरेली कॉलेज की मुख्य प्रवेश नियंत्रक प्रो. वंदना शर्मा के मुताबिक एमएससी जूलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ, बॉटनी, एमकॉम, एमए उर्दू, हिंदी, सोशियोलॉजी, पॉलिटिकल साइंस, फिलॉसफी, हिस्ट्री, इंग्लिश, ड्राइंग में अधिकांश सीटें लॉक हो गई हैं। एमएससी स्टेटिस्टिक्स, सैन्य विज्ञान, एमए संस्कृत, मैथ, मिलिट्री साइंस, इकोनॉमिक्स में प्रवेश कम हुए हैं।
परिणाम जारी होने में देरी समेत
कई वजहों से प्रवेश में बाधा
बताते हैं कि पीजी में सीटें खाली होने की वजह कक्षा में 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य होना, स्नातकोत्तर के समानांतर एमए प्राइवेट के फॉर्म से प्रवेश, नवीन (एनईपी) पाठ्यक्रम के अनुकूल पाठ्यक्रम की किताबें उपलब्ध न होना भी है। स्नातक का परिणाम देर से जारी होने, विद्यार्थियों की स्नातक परीक्षा में बैक (फेल) आई है। कुछ परिणाम संबंधी समस्या समाधान के लिए विद्यार्थी विवि से लेकर कॉलेज तक चक्कर काट रहे हैं। अमर उजाला ब्यूरो