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Bareilly News: विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद में विवि के छात्रों का प्रोजेक्ट चयनित
Tue, 02 Jan 2024 01:14 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Tue, 02 Jan 2024 01:14 AM IST
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के छात्रों के प्रोजेक्ट का चयन विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद की इंजीनियरिंग छात्र परियोजना अनुदान स्कीम (2023-2024) के लिए हुआ है। छात्र ''''''''इंजीनियरिंग छात्रों में स्मार्टफोन की लत'''''''' विषय पर प्रोजेक्ट का काम अभी चल रहा हैं। स्कीम के तहत प्रदेशभर के 60 इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट को वित्तीय मदद देने के लिए चयनित किया गया है।
कंप्यूटर साइंस व सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से भेजे गए प्रोजेक्ट ''''''''''''''''नोमोफोबिया के मूल्यांकन के लिए मशीन लर्निंग का अनुप्रयोग : ''''''''इंजीनियरिंग छात्रों में स्मार्टफोन की लत'''''''' को परिषद ने चयनित किया है। प्रोजेक्ट को विभाग के शिक्षक डॉ. अनिल कुमार बिष्ट के नेतृत्व में बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र साक्षी, सौरभ व शालिनी तैयार कर रहे हैं। इसमें डेटा संग्रह किया जा चुका है। अब कोडिंग बेस्ड मॉडल तैयार किए जाएंगे। इसके लिए स्वीकृत धनराशि कुल 20 हजार रुपये दो किस्तों में जारी की जाएगी। पहली किस्त में 10 हजार रुपये प्रोजेक्ट कार्य शुरु करने के लिए व उसे पूरा करने पर लखनऊ में प्रस्तुतिकरण के आधार पर दूसरी किस्त प्रदान की जाएगी। इसमें छह इंजीनियरिंग की छह ब्रांचों के 602 बच्चों से फीडबैक लिया गया है। इस शोध के प्रकाशन के बाद सरकार की ओर से प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिया जाएगा।
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कंप्यूटर साइंस व सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से भेजे गए प्रोजेक्ट ''''''''''''''''नोमोफोबिया के मूल्यांकन के लिए मशीन लर्निंग का अनुप्रयोग : ''''''''इंजीनियरिंग छात्रों में स्मार्टफोन की लत'''''''' को परिषद ने चयनित किया है। प्रोजेक्ट को विभाग के शिक्षक डॉ. अनिल कुमार बिष्ट के नेतृत्व में बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र साक्षी, सौरभ व शालिनी तैयार कर रहे हैं। इसमें डेटा संग्रह किया जा चुका है। अब कोडिंग बेस्ड मॉडल तैयार किए जाएंगे। इसके लिए स्वीकृत धनराशि कुल 20 हजार रुपये दो किस्तों में जारी की जाएगी। पहली किस्त में 10 हजार रुपये प्रोजेक्ट कार्य शुरु करने के लिए व उसे पूरा करने पर लखनऊ में प्रस्तुतिकरण के आधार पर दूसरी किस्त प्रदान की जाएगी। इसमें छह इंजीनियरिंग की छह ब्रांचों के 602 बच्चों से फीडबैक लिया गया है। इस शोध के प्रकाशन के बाद सरकार की ओर से प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिया जाएगा।
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