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दुनकी में अघोषित कर्फ्यू, घरों में कैद हुए लोग
बरेली
Updated Sun, 06 Aug 2017 01:36 AM IST
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दुनका।
विवादित रूट से ही कांवड़ निकालने पर अड़े दुनकी के लोगों से दो दिन तक चली वार्ता विफल होने के बाद पुलिस प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी। शुक्रवार रात से ही चिह्नित लोगों को घरों में ही नजरबंद कर दिया गया। पांच थानों की पुलिस बल के अतिरिक्त पीएसी और आरएएफ के जवान तैनात कर दिए गए। गांव की सीमाओं पर बैरिकेटिंग लगाकर सीमायें सील कर दी गई। शनिवार को गांव के आस-पास अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात नजर आए। पुलिस की दबिशों के बाद गांव के लोग घरों से भागे हुए हैं।
बता दें कि दुनकी के एक समुदाय के लोग करीब एक महीने से दुनकी-दुनका-धनेली-औरंगाबाद रोड से कांवड़ हरिद्वार लेकर जाने पर अड़ेे थे। लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री योगी के समक्ष भी यही मांग रख चुके थे। दलील थी कि 2014 से पहले तक दुनकी और तमाम गांवों के कांवड़ जुलूस इसी रोड से निकलते रहे हैं। 2014 में दुनका में विवाद के बाद तत्कालीन एसडीएम ने सपा सरकार में यह रोड कांवड़ जुलूस के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। ग्रामीणों की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने डीएम बरेली से आख्या भी मांगी थी। दो दिन से एसओ शाही कई घंटे दुनकी में रुककर ग्रामीणों को तयशुदा रूट से ही कांवड़ जुलूस लाने-ले जाने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन लोग राजी नहीं हुए। एलआईयू इंस्पेक्टर ने भी शुक्रवार रात मुआयने के बाद प्रशासन को गांव में हालात विस्फोटक होने की रिपोर्ट भेजी थी। एसपी देहात ख्याति गर्ग, एसडीएम राजेश कुमार, सीओ सीमा यादव भी देर रात तक ग्रामीणों को समझाते रहे थे। उच्चाधिकारियों के आदेश पर शुक्रवार रात से ही दुनकी और गांव के अंदर-बाहर के सभी रास्तों, गलियों में पांच थानों और आरएएफ, पीएसी की भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई थी। शनिवार को पूरे दिन फोर्स दुनकी से दुनका, औरंगाबाद तक के रास्तों पर तैनात रही। पांचों थानों के प्रभारी, सीओ नवाबगंज विजयप्रताप यादव, महिला थाना बरेली की प्रभारी इंस्पेक्टर विजय सिरोही, सीओ मीरगंज सीमा यादव भी पूरे दिन डटे रहे। कावड़ लेकर जाना तो दूर, बुरी तरह सहमे लोग घरों से निकलने से कतराते रहे। उधर, बवाल की आशंका से प्रशासन ने दुनकी प्रधान हेतराम और गांव के बुद्धसेन को रात में ही घरों से उठा लिया था। शनिवार को पूरे दिन दोनों को मीरगंज थाने में बैठाए रखा।
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कांवड़ के लिए रूट पर पहले ही अनुमति को लेकर चर्चा हुई थी। कांवड़ियों को दूसरे रूट से जाने के लिए कहा गया था। जिन रूट की अनुमति नहीं है। उससे कांवड़ियों को नहीं जाने दिया जाएगा। गांव में पूरी तरह से शांति व्यवस्था बहाल है।
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- ख्याति गर्ग, एसपी देहात
विवादित रूट से ही कांवड़ निकालने पर अड़े दुनकी के लोगों से दो दिन तक चली वार्ता विफल होने के बाद पुलिस प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी। शुक्रवार रात से ही चिह्नित लोगों को घरों में ही नजरबंद कर दिया गया। पांच थानों की पुलिस बल के अतिरिक्त पीएसी और आरएएफ के जवान तैनात कर दिए गए। गांव की सीमाओं पर बैरिकेटिंग लगाकर सीमायें सील कर दी गई। शनिवार को गांव के आस-पास अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात नजर आए। पुलिस की दबिशों के बाद गांव के लोग घरों से भागे हुए हैं।
बता दें कि दुनकी के एक समुदाय के लोग करीब एक महीने से दुनकी-दुनका-धनेली-औरंगाबाद रोड से कांवड़ हरिद्वार लेकर जाने पर अड़ेे थे। लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री योगी के समक्ष भी यही मांग रख चुके थे। दलील थी कि 2014 से पहले तक दुनकी और तमाम गांवों के कांवड़ जुलूस इसी रोड से निकलते रहे हैं। 2014 में दुनका में विवाद के बाद तत्कालीन एसडीएम ने सपा सरकार में यह रोड कांवड़ जुलूस के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। ग्रामीणों की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने डीएम बरेली से आख्या भी मांगी थी। दो दिन से एसओ शाही कई घंटे दुनकी में रुककर ग्रामीणों को तयशुदा रूट से ही कांवड़ जुलूस लाने-ले जाने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन लोग राजी नहीं हुए। एलआईयू इंस्पेक्टर ने भी शुक्रवार रात मुआयने के बाद प्रशासन को गांव में हालात विस्फोटक होने की रिपोर्ट भेजी थी। एसपी देहात ख्याति गर्ग, एसडीएम राजेश कुमार, सीओ सीमा यादव भी देर रात तक ग्रामीणों को समझाते रहे थे। उच्चाधिकारियों के आदेश पर शुक्रवार रात से ही दुनकी और गांव के अंदर-बाहर के सभी रास्तों, गलियों में पांच थानों और आरएएफ, पीएसी की भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई थी। शनिवार को पूरे दिन फोर्स दुनकी से दुनका, औरंगाबाद तक के रास्तों पर तैनात रही। पांचों थानों के प्रभारी, सीओ नवाबगंज विजयप्रताप यादव, महिला थाना बरेली की प्रभारी इंस्पेक्टर विजय सिरोही, सीओ मीरगंज सीमा यादव भी पूरे दिन डटे रहे। कावड़ लेकर जाना तो दूर, बुरी तरह सहमे लोग घरों से निकलने से कतराते रहे। उधर, बवाल की आशंका से प्रशासन ने दुनकी प्रधान हेतराम और गांव के बुद्धसेन को रात में ही घरों से उठा लिया था। शनिवार को पूरे दिन दोनों को मीरगंज थाने में बैठाए रखा।
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कांवड़ के लिए रूट पर पहले ही अनुमति को लेकर चर्चा हुई थी। कांवड़ियों को दूसरे रूट से जाने के लिए कहा गया था। जिन रूट की अनुमति नहीं है। उससे कांवड़ियों को नहीं जाने दिया जाएगा। गांव में पूरी तरह से शांति व्यवस्था बहाल है।
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- ख्याति गर्ग, एसपी देहात