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बरेली में जुटे उलमा: किया एलान- समान नागिरक संहिता मुसलमानों को मंजूर नहीं, हर स्तर पर किया जाएगा विरोध
Mon, 11 Sep 2023 07:44 AM IST
मुकेश कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 11 Sep 2023 07:44 AM IST
सार
उर्स-ए-आला हजरत के पहले दिन 'इस्लामिक रिसर्च सेंटर' में उलमा की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने की। बैठक में उलमा ने मुस्लिम एजेंडा जारी किया।
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उलमा ने जारी किया मुस्लिम एजेंडा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश के बरेली में आला हजरत दरगाह पर उर्स-ए-रजवी के मौके पर उलमा ने रविवार को मुस्लिम एजेंडा जारी किया। देशभर से जुटे उलमा ने एक स्वर से कहा कि समान नागरिक संहिता मुसलमानों को मंजूर नहीं। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। हिंदू-मुस्लिम के बीच नफरत फैलाने वाली राजनीति बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि सरकारों व राजनीतिक दलों को मुसलमानों के प्रति अपने आचरण में बदलाव लाना होगा। भाजपा ने सबका साथ, सबका विकास का नारा तो दिया, लेकिन उत्तराखंड की धामी सरकार ने दो दर्जन से ज्यादा मजारों को तोड़ दिया। सत्ता में रहते कांग्रेस ने भी कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दिया। प्रदेश में सपा ने भी यही काम किया।
ये भी पढ़ें- उर्स-ए-रजवी का आगाज: रिमझिम बारिश के बीच लहराया परचम-ए-रजा, दुनियाभर के उलमा पहुंचे बरेली; SSP ने परखी सुरक्षा
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मौलाना ने संसद में पैगंबर-ए-इस्लाम बिल पास कराने की मांग की। कहा कि जो राजनीतिक दल इस बिल पर सहमत होंगे, 2024 के लोकसभा चुनाव में मुसलमान उन्हीं को वोट देंगे। उलमा ने मुसलमानों को शिक्षा, व्यापार और परिवार पर ध्यान देने की हिदायत दी। सामाजिक बुराइयों की रोकथाम करने व लड़कियों के लिए अलग स्कूल-कॉलेज खोलने की बात कही।
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ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि सरकारों व राजनीतिक दलों को मुसलमानों के प्रति अपने आचरण में बदलाव लाना होगा। भाजपा ने सबका साथ, सबका विकास का नारा तो दिया, लेकिन उत्तराखंड की धामी सरकार ने दो दर्जन से ज्यादा मजारों को तोड़ दिया। सत्ता में रहते कांग्रेस ने भी कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दिया। प्रदेश में सपा ने भी यही काम किया।
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मौलाना ने संसद में पैगंबर-ए-इस्लाम बिल पास कराने की मांग की। कहा कि जो राजनीतिक दल इस बिल पर सहमत होंगे, 2024 के लोकसभा चुनाव में मुसलमान उन्हीं को वोट देंगे। उलमा ने मुसलमानों को शिक्षा, व्यापार और परिवार पर ध्यान देने की हिदायत दी। सामाजिक बुराइयों की रोकथाम करने व लड़कियों के लिए अलग स्कूल-कॉलेज खोलने की बात कही।
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मुसलमानों को न किया जाए परेशान
उलमा ने कहा कि बेकसूर मुस्लिम नौजवानों व उलमा की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए। लव जिहाद, मॉब लिंचिंग, धर्मांतरण, टेरर फंडिंग और आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों को परेशान न किया जाए। कुछ कट्टरपंथी संगठन कमजोर मुसलमानों की लड़कियों को धमकाकर और लालच देकर शादी की मुहिम चला रहे हैं। इस पर रोक लगाई जाए।मुसलमानों को वोट बैंक न समझें राजनीतिक दल
उलमा ने कहा कि राजनीतिक दल मुसलमानों का उपयोग वोट बैंक के रूप में करते हैं। सत्ता में आने के बाद उनकी कोई सुध नहीं लेते। मुसलमान किसी पार्टी के गुलाम नहीं। कोई दल उनको अपना बंधुआ मजदूर न समझे। जो राजनीतिक दल हमारे लिए काम करेगा, हम उसी के साथ खड़े होंगे।
ये रहे मौजूद
बैठक में हाफिज नूर अहमद अजहरी, सूफी अब्दुलरहमान कादरी (छत्तीसगढ़), सूफी पीर मोहम्मद हनीफ चिश्ती, मौलाना मजहर इमाम (बंगाल), मौलाना अब्दुस्सलाम रजवी (कर्नाटक), मौलाना रिजवानुलहक (तामिलनाडु), मुफ्ती शाकिरूल कादरी (राजस्थान), मुफ्ती फारूख आलम रजवी (पंजाब), कारी अब्दुर रहमान जियाई (मुंबई), डॉ. सय्यद अशरफ कादरी (उत्तराखंड), सुजाअत अली कादरी, मौलाना फारूख बरकाती (दिल्ली) सहित तमाम उलमा मौजूद रहे।