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बरेली: फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के मामले में दिल्ली पुलिस की हिरासत में दो युवक
Sun, 06 Sep 2026 01:40 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Updated Sun, 06 Sep 2026 01:40 AM IST
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सीएमओ ऑफिस के आउटसोर्स कर्मी का मेडिकल कराती दिल्ली पुलिस
- फोटो : स्रोत- विभाग
बरेली। हरियाणा निवासी युवक का फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लिया है। इनमें से एक सीएमओ कार्यालय में आउटसोर्स कर्मचारी है। दूसरे की पहचान नहीं हो सकी है। ईएनटी सर्जन के बयान दर्ज कर टीम पीलीभीत के लिए रवाना हो गई।
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आउटसोर्स ऑपरेटर को हिरासत में लेने की सूचना से सीएमओ कार्यालय में हलचल मच गई। बताते हैं कि हरियाणा निवासी युवक का सर्टिफिकेट बनाने के लिए फरीदाबाद निवासी ललित कुमार ने सीएमओ कार्यालय में दिव्यांग पटल के ऑपरेटर कुलदीप यादव से संपर्क किया था। मूक-बधिर का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर युवक ने दिल्ली में नौकरी के लिए जमा किया था। सत्यापन में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया तो शिकायत दिल्ली पुलिस तक पहुंची। टीम ने दोनों युवकों को शुक्रवार को हिरासत में लिया था। शनिवार को मेडिकल कराने के लिए जिला अस्पताल आए थे।
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दिल्ली पुलिस की टीम ने फिजिकल वेरीफिकेशन के जिम्मेदार जिला अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. एलके सक्सेना के बयान दर्ज किए हैं। साथ ही, नोडल अधिकारी डॉ. राकेश से भी पूछताछ की। सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह से भी कर्मचारी से संबंधित जानकारियां ली गईं।
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सपोर्ट स्टाफ को दे दी ऑपरेटर की जिम्मेदारी
हिरासत में लिए गए ऑपरेटर कुलदीप यादव की तैनाती आउटसोर्स के तहत सपोर्ट स्टाफ (चतुर्थ श्रेणी) के पद पर है। बीते दिनों दिव्यांगता पटल के ऑपरेटर का जिम्मा सौंपा गया। दूसरी ओर, संबंधित पटल संभाल रहे कर्मियों को उनकी मूल तैनाती पर वापस भेजा गया था। इसी बीच यह खेल उजागर हुआ। लिहाजा, प्रकरण में मूल तैनाती पर भेजे गए कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।
निजी स्तर पर लोग कराते हैं ऑडियोमट्री जांच
ईएनटी सर्जन डॉ. एलके सक्सेना का कहना है कि मूक-बधिरता की जांच ऑडियोलॉजिस्ट करते हैं। पद रिक्त है, इसलिए जिम्मेदारी मिली है। जांच उपकरण नहीं हैं। फिजिकल वेरीफिकेशन के बाद जांच के लिए हायर सेंटर भेजते हैं। जो रिपोर्ट लेकर आते हैं, नियमानुसार उसे अग्रेषित किया जाता है। आधार सत्यापन का जिम्मा ऑपरेटर का होता है। नोडल डॉ. राकेश ने कहा कि डॉक्टर की रिपोर्ट पर ही प्रमाणपत्र जारी होते हैं।
फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट के मामले में दिल्ली पुलिस की टीम कार्यालय आई थी। आउटसोर्स कर्मचारी कुलदीप के संबंध में जो जानकारी मांगी, वह उपलब्ध कराई गई है। प्रकरण के बाद जारी हुए प्रमाणपत्रों की रैंडम जांच कराई जाएगी। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ