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परेशानी: खून का सैंपल लेते हैं जांच रिपोर्ट नहीं बताते
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Corona
- फोटो : PTI
संक्रमितों को अस्पतालों में मानसिक तौर पर परेशान करने का आरोप
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गर्भवतियों को हो रही खासी दिक्कत, गंदगी के बीच कर रहीं गुजारा
बरेली। कोविड अस्पतालों में मरीजों से अभद्र व्यवहार और कोरोना का खौफ दिखाकर वसूली करने के मामलों में तमाम ऑडियो- वीडियो होने के बावजूद जांच में अस्पतालों को क्लीन चिट मिलती जा रही है। लिहाजा, अस्पताल संचालक बेेखौफ हैं। इससे मरीजों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। कुछ संक्रमितों और उनके तीमारदारों का कहना है कि संक्रमितों के खून के सैंपल तो अस्पताल में लिए जाते हैं लेकिन जांच रिपोर्ट कोई नहीं बताता। अव्यवस्था पर आपत्ति जताने पर अभद्र व्यवहार हो रहा है। उन्होंने अस्पतालों में मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग की है।
बीते दिनों कोविड एल-2 और एल 3 अस्पतालों की अव्यवस्था की शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ितों ने शासन स्तर तक शिकायतें की तो खलबली मच गई थी। नोडल अफसर नवनीत सहगल, स्वास्थ्य राज्य मंत्री अतुल गर्ग, शासन स्तर से गठित विशेष चिकित्सकों की टीम ने बारी - बारी से जिले का दौरा कर कोविड अस्पतालों की जांच की थी। कई शिकायतें सही मिलने पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालात इस पर भी नहीं संभले तो खुद मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा की और मरीजों की सुविधाओं को प्राथमिकता में रखने के निर्देश दिए। शिकायतों की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई के लिए भी कहा गया। जांचें हुईं मगर अब तक एक भी अस्पताल में जांच अधिकारियों को खामी नहीं मिल सकी। बीडीए वीसी की ओर से सौंपी गई निरीक्षण रिपोर्ट में एक कोविड एल-2 अस्पताल में वसूली की आशंका जाहिर की गई मगर कार्रवाई नहीं हुई। बजाय कार्रवाई के संक्रमित को ही अव्यवस्था की झूठी शिकायत करने पर कार्रवाई की चेतावनी दे दी गई। जिसके चलते अब अस्पताल प्रबंधन बेखौफ है।
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संक्रमितों ने सुनाई आपबीती, कार्रवाई की मांग
अस्पतालों में अव्यवस्था पर संक्रमितों ने खुद ही अमर उजाला को फोन कर खामियों की पोल खोली। उनके मुताबिक अस्पतालों में समय से दवाएं नहीं दी जा रहीं। नियमानुसार दिन में तीन बार डॉक्टरों को मरीजों का हाल चाल लेने के निर्देश हैं। मगर एक बार भी डॉक्टर वार्ड में नहीं जा रहे। पैरामेडिकल स्टाफ राउंड ले रहा है मगर अव्यवस्थाओं पर वह कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं। बताया कि ऐसे हालात मानसिक रूप से परेशान कर रहे हैं। सैंपल लेकर उसकी जांच रिपोर्ट नहीं बताए जाने से संक्रमित मानसिक तनाव के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने अस्पताल के बजाए घर पर ही आइसोलेट करने की मंशा जाहिर की है।
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संक्रमितों के आरोप:
केस-1
दिल्ली हाइवे स्थित कोविड एल-2 अस्पताल में भर्ती कालीबाड़ी की रहने वाली आठ माह की संक्रमित गर्भवती ने अव्यवस्था का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक जब वह अस्पताल पहुंची तो शौचालय गंदे थे। छह दिन तक गंदगी साफ करने को कहने पर सफाई हुई तो अगले दिन फिर स्थित जस की तस हो गई। स्टाफ ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं मगर रिपोर्ट नहीं बताते। उन्होंने मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया है।
केस-2
भोजीपुरा स्थित कोविड एल-2 अस्पताल में भर्ती राजेंद्र नगर के एक संक्रमित का आरोप है कि अस्पताल में पीने को पानी तक समय से नहीं दिया जा रहा है। बार-बार कहने पर स्टाफ पानी देने के बजाय प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट होने का सुझाव दे रहे हैं। बताया कि उन्हें कोरोना के लक्षण हैं मगर तबियत इस कदर नहीं बिगड़ी कि इलाज की जरूरत पड़े। मगर जिस हालात में वह भर्ती है, जल्द ही बीमार होने की आशंका जताई है।
केस:3
बीते दिनों कोविड एल-3 में भर्ती रहे एक संक्रमित के परिजनों का आरोप है कि उन्हें अस्पताल में दवाएं समय पर नहीं दी जा रही थीं। जबकि उन्होंने कंट्रोल रूम पर कॉल की तो वहां से दवाएं प्रत्येक अस्पताल को मुहैया कराने की जानकारी दी गई। मामले पर जब स्टाफ से आपत्ति जताई तो उन्होंने कंट्रोल रूप से ही दवा मंगाने का सुझाव दे डाला था। वह स्वस्थ होकर घर आ गए हैं मगर प्रशासन से अस्पताल पर कार्रवाई की मांग की है।
संक्रमितों की शिकायतों का निस्तारण कराया जा रहा है मगर लिखित शिकायत न होने की वजह से जांच के बाद कार्रवाई के लिए आधार नहीं है। लोगों से अपील है कि अगर उन्हें परेशानी हो रही है तो वह मेल पर या लिखित शिकायत करें ताकि कार्रवाई की जा सके। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ
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गर्भवतियों को हो रही खासी दिक्कत, गंदगी के बीच कर रहीं गुजारा बरेली। कोविड अस्पतालों में मरीजों से अभद्र व्यवहार और कोरोना का खौफ दिखाकर वसूली करने के मामलों में तमाम ऑडियो- वीडियो होने के बावजूद जांच में अस्पतालों को क्लीन चिट मिलती जा रही है। लिहाजा, अस्पताल संचालक बेेखौफ हैं। इससे मरीजों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। कुछ संक्रमितों और उनके तीमारदारों का कहना है कि संक्रमितों के खून के सैंपल तो अस्पताल में लिए जाते हैं लेकिन जांच रिपोर्ट कोई नहीं बताता। अव्यवस्था पर आपत्ति जताने पर अभद्र व्यवहार हो रहा है। उन्होंने अस्पतालों में मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग की है।
बीते दिनों कोविड एल-2 और एल 3 अस्पतालों की अव्यवस्था की शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ितों ने शासन स्तर तक शिकायतें की तो खलबली मच गई थी। नोडल अफसर नवनीत सहगल, स्वास्थ्य राज्य मंत्री अतुल गर्ग, शासन स्तर से गठित विशेष चिकित्सकों की टीम ने बारी - बारी से जिले का दौरा कर कोविड अस्पतालों की जांच की थी। कई शिकायतें सही मिलने पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालात इस पर भी नहीं संभले तो खुद मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा की और मरीजों की सुविधाओं को प्राथमिकता में रखने के निर्देश दिए। शिकायतों की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई के लिए भी कहा गया। जांचें हुईं मगर अब तक एक भी अस्पताल में जांच अधिकारियों को खामी नहीं मिल सकी। बीडीए वीसी की ओर से सौंपी गई निरीक्षण रिपोर्ट में एक कोविड एल-2 अस्पताल में वसूली की आशंका जाहिर की गई मगर कार्रवाई नहीं हुई। बजाय कार्रवाई के संक्रमित को ही अव्यवस्था की झूठी शिकायत करने पर कार्रवाई की चेतावनी दे दी गई। जिसके चलते अब अस्पताल प्रबंधन बेखौफ है।
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संक्रमितों ने सुनाई आपबीती, कार्रवाई की मांग
अस्पतालों में अव्यवस्था पर संक्रमितों ने खुद ही अमर उजाला को फोन कर खामियों की पोल खोली। उनके मुताबिक अस्पतालों में समय से दवाएं नहीं दी जा रहीं। नियमानुसार दिन में तीन बार डॉक्टरों को मरीजों का हाल चाल लेने के निर्देश हैं। मगर एक बार भी डॉक्टर वार्ड में नहीं जा रहे। पैरामेडिकल स्टाफ राउंड ले रहा है मगर अव्यवस्थाओं पर वह कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं। बताया कि ऐसे हालात मानसिक रूप से परेशान कर रहे हैं। सैंपल लेकर उसकी जांच रिपोर्ट नहीं बताए जाने से संक्रमित मानसिक तनाव के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने अस्पताल के बजाए घर पर ही आइसोलेट करने की मंशा जाहिर की है।
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संक्रमितों के आरोप:
केस-1
दिल्ली हाइवे स्थित कोविड एल-2 अस्पताल में भर्ती कालीबाड़ी की रहने वाली आठ माह की संक्रमित गर्भवती ने अव्यवस्था का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक जब वह अस्पताल पहुंची तो शौचालय गंदे थे। छह दिन तक गंदगी साफ करने को कहने पर सफाई हुई तो अगले दिन फिर स्थित जस की तस हो गई। स्टाफ ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं मगर रिपोर्ट नहीं बताते। उन्होंने मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया है।
केस-2
भोजीपुरा स्थित कोविड एल-2 अस्पताल में भर्ती राजेंद्र नगर के एक संक्रमित का आरोप है कि अस्पताल में पीने को पानी तक समय से नहीं दिया जा रहा है। बार-बार कहने पर स्टाफ पानी देने के बजाय प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट होने का सुझाव दे रहे हैं। बताया कि उन्हें कोरोना के लक्षण हैं मगर तबियत इस कदर नहीं बिगड़ी कि इलाज की जरूरत पड़े। मगर जिस हालात में वह भर्ती है, जल्द ही बीमार होने की आशंका जताई है।
केस:3
बीते दिनों कोविड एल-3 में भर्ती रहे एक संक्रमित के परिजनों का आरोप है कि उन्हें अस्पताल में दवाएं समय पर नहीं दी जा रही थीं। जबकि उन्होंने कंट्रोल रूम पर कॉल की तो वहां से दवाएं प्रत्येक अस्पताल को मुहैया कराने की जानकारी दी गई। मामले पर जब स्टाफ से आपत्ति जताई तो उन्होंने कंट्रोल रूप से ही दवा मंगाने का सुझाव दे डाला था। वह स्वस्थ होकर घर आ गए हैं मगर प्रशासन से अस्पताल पर कार्रवाई की मांग की है।
संक्रमितों की शिकायतों का निस्तारण कराया जा रहा है मगर लिखित शिकायत न होने की वजह से जांच के बाद कार्रवाई के लिए आधार नहीं है। लोगों से अपील है कि अगर उन्हें परेशानी हो रही है तो वह मेल पर या लिखित शिकायत करें ताकि कार्रवाई की जा सके। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ