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अपराजिता: छोटी बचत से तय किया कारोबारी बनने तक का सफर; पढ़ें- सीमा सिंह के संघर्ष की कहानी

Tue, 15 Aug 2023 02:03 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Tue, 15 Aug 2023 02:03 PM IST
सार

बरेली के ग्राम बेनीपुर सादात की रहने वाली सीमा सिंह को जब मसाले अपनी दुनिया लगने लगे तो इसी को अपने कारोबार का जरिया बना लिया। बचत के जुटाए हुए पैसों से सीमा ने आखिरकार अपनी सफलता की इबारत लिखी।

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Seema Singh struggled to build spices business in Bareilly
सीमा सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उद्यमी वह होता है, जिसमें साहस हो उद्यम करने का। कहने को तो यह महज परिभाषा है, लेकिन अपराजिता के तहत आज के अंक में हम आपके सामने एक ऐसी महिला की कहानी लाए हैं, जिन्होंने बस एक ख्वाब पूरा करने के लिए खुद के अलावा परिवार और क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाया।

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ग्रामीण क्षेत्रों में गृहिणियां अक्सर हल्दी, मिर्च, मसालों से ऊपर नहीं उठ पातीं। बरेली के ग्राम बेनीपुर सादात की रहने वाली सीमा को जब यही मसाले अपनी दुनिया लगने लगे तो इसी को अपने कारोबार का जरिया बना लिया। सीमा बताती हैं कि उनके मसालों की गुणवत्ता और साथ की महिलाओं के सहयोग ने उन्हें एक सफल कारोबारी बनने में मदद की। गांव की महिला के लिए यह बड़ा ख्वाब था। चुनौतियां आना लाजमी था, लेकिन इन सब को पार करते हुए, बचत के जुटाए हुए पैसों से सीमा ने आखिरकार अपनी सफलता की इबारत लिखी।

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कहां से आया विचार

सीमा बताती हैं कि वह 16 लोगों के संयुक्त परिवार में रहती हैं। शुरू से ही कारोबार करने की इच्छा थी  लेकिन उस वक्त नहीं हो सका। करीब डेढ़ साल पहले घर की अन्य महिलाओं को राजी किया। उनके साथ अपनी बचत से जोड़े हुए कुछ पैसों से साबुत मसालों को कूट-पीसकर काम शुरू किया। आस पास की महिलाएं भी जुड़ने लगीं तो समूह से आर्थिक सहायता मिली। इसकी मदद से काम को आगे बढ़ाने में मदद मिली। इसके बाद मशीनें आदि लगाकर बड़े स्तर पर काम किया।

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चुनौतियां भी आईं सामने

घर की महिलाएं और खुद सीमा भी घर से ज्यादा बाहर नहीं निकलती थीं। इस वजह से शुरूआत में तैयार मसालों को बाजार में बेचना चुनौतीपूर्ण था। पहले काफी झिझक लगती, फिर तय किया की काम करना है तो बाहर जाना पड़ेगा। घर की महिलाओं को भी बाहर जाने के लिए मनाया। सीमा ने अन्य महिला कारोबारियों से बात-चीत करना शुरू किया। काम करने का तरीका सीखा। करीब डेढ़ साल का वक्त लगा और तस्वीर बदल गई। आज परिवार की महिलाओं के अलावा आस-पास के क्षेत्र की करीब 20 महिलाएं सीमा के साथ जुड़ी हैं।

काम बढ़ा तो मुनाफा भी

सीमा बताती हैं कि खर्च निकालने के बाद महिलाएं सात से आठ हजार रुपये महीना कमा लेती हैं। सबको देने के बाद उन्हें भी अच्छी बचत हो जाती है। उनका कहना है कि धीरे-धीरे जैसे काम आगे बढ़ा है तो मुनाफा भी बढ़ा है। मेहनत लगती है पर मसालों के रंग में जब सफलता दिखती है तो अच्छा लगता है। महिलाएं भी खुशी से सहयोग करती हैं। आज की सफलता उनकी ही मेहनत का नतीजा है। जल्द ही तेल और दाल मिल शुरू करने का मन बनाया है।

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