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भारी पड़ गया नेताओं और खास लोगों से पंगा
बरेली
Updated Thu, 05 Feb 2015 12:46 AM IST
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इनमें एक मामला जमीन से जुड़ा हुआ है जो काफी पहले विवाद में आया था और इसका निस्तारण भी पुराने अधिकारियों ने किया था।
पारिवारिक लाभ योजना में लाखों का गोलमाल हो या फिर भूमाफियाओं के खिलाफ अभियान, इनमें शामिल लोग प्रशासन की कार्रवाई हजम नहीं कर सके। हाकिमों के खिलाफ लामबंद हुए ऐसे तत्व शिकायतें बड़े नेताओं से करते रहे। वित्तीय वर्ष समाप्त होने के डेढ़ महीने पहले इन आला अफसरों के अचानक तबादले से बरेली के विकास के कई महत्वपूर्ण काम तय समय पर हो पाएंगे या नहीं, इसको लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पारिवारिक लाभ में फर्जीवाड़ा
इस योजना में इसी वित्तीय वर्ष के 118 मामले फर्जी पाए गए। डीएम ऐसे सारे मामले खंगालने का मूड बना चुके थे। इसमें बहेड़ी तथा मीरगंज तहसील के बड़े-बड़े लोग शामिल थे। कई का खुलासा हुआ। डेढ़ दर्जन लेखपाल नापे गए। एफआईआर दर्ज भी हो चुकी है। आगे भी कार्रवाई की जानी थी। प्रशासन ने पिछले दो वित्तीय वर्ष 2021-13 तथा 2013-14 के 6067 आवेदनों की जांच भी शुरू करा दी थी।
अशोक की लाट प्रकरण
सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह के घर के पास लोहिया गेट पर अवैध रूप से लगाई गई अशोक की लाट को हटाने के लिए कमिश्नर ने जांच के आदेश कर दिए। प्रशासनिक सख्ती के चलते अशोक की लाट हटा दी गई यह बात अलग है कि आगे की कार्रवाई पर नगर निगम ने चुप्पी साध ली, कमिश्नर को रिपोर्ट नहीं दी गई।
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नगर निगम और बीडीए पर सख्ती
कमिश्नर विपिन कुमार द्विवेदी ने बीडीए में लंबित नक्शों का तुरंत निस्तारण कराने के अलावा इंजीनियरों की मिलीभगत से बनने वाली अवैध कालोनियों के ध्वस्तीकरण का अभियान चलवाया। इससे बिना नक्शा पास कराए मकान बनाने वाले नाराज हो गए। पुराना रोडवेज के निकट एक बड़े व्यवसायी और सत्ता से जुड़े नेता का नक्शे के विपरीत निर्माण गिराए जाने का अंदेशा था।
कुछ काम तो हो गए
बड़ा बाईपास फिर लटकाने की तैयारी थी। डीएम ने रिस्क लेकर भी इसे चालू करा दिया। सौ फुटा रोड का लटका हुआ काम भी कमिश्नर और डीएम के प्रयासों से मुकम्मल होने को है। इसके अलावा अवस्थापना निधि से करीब 80 करोड़ की लागत से सड़कों के निर्माण में भी दोनों की मानीटरिंग से शहर की सूरत बदलने की उम्मीद जगी थी। लीलौर झील के टेंडर में सिफारिशी लोगों के कारण विवाद हुआ लेकिन ये काम भी जैसे तैसे आगे बढ़ा।
कमिश्नर तो गए, अब कौन पूछे ...
चौड़ीकरण में पत्थर बजरी के बजाय रेत पड़ रही है
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। मंडलायुक्त विपिन कुमार द्विवेदी का तबादला होने की खबर मिलते ही बीडीए फिर पुराने ढर्रे पर है। दो सड़कों के फोरलेन चौड़ीकरण के काम में मनमानी शुरू हो गई है। साढ़े छह करोड़ की लागत से होने वाले फोरलेन चौड़ीकरण में सड़क के ग्रेनुअल सब बेस (जीएसबी) में पत्थर बजरी की कुटाई के बजाय नदी के रेत का इस्तेमाल किया जा रहा है। दो किलोमीटर की ये सड़क दोनों ओर से 3-3 मीटर चौड़ी होनी है। यही हाल रामगंगा नगर वाली डोहरा रोड का है। 2.25 किलोमीटर लंबी सड़क के बेस की कुटाई में पत्थर और बजरी के बजाय 90 फीसदी नदी की रेत का इस्तेमाल होने गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। इससे पहले तक निर्माण एजेंसियां और ठेकेदार कमिश्नर के डर से बहुत ज्यादा गड़बड़ी नहीं कर पा रहे थे।
ट्रांसपोर्ट नगर के काम में लगा ब्रेक
कमिश्नर के डंडे का ही असर था कि एक दशक से भी ज्यादा समय से लटका ट्रांसपोर्ट नगर बस गया। तबादले से दो दिन पूर्व कमिश्नर ने ट्रांसपोर्ट नगर की सड़कें, पानी की टंकी और प्रकाश व्यवस्था समेत तमाम खामियां दूर करने के लिए बीडीए उपाध्यक्ष शफाकत कमाल को 15 दिन का वक्त दिया था। 24 फरवरी को ट्रांसपोर्टरों के साथ मीटिंग कर कमिश्नर ने ट्रांसपोर्ट नगर जाने में आड़े आ रही समस्याएं खुद सुलझाने की बात कही थी। अचानक तबादले के बाद इस पर पूरी तरह ब्रेक लग गया। ट्रांसपोर्ट नगर में बीडीए ने कोई काम प्रारंभ नहीं कराया।
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पारिवारिक लाभ योजना में लाखों का गोलमाल हो या फिर भूमाफियाओं के खिलाफ अभियान, इनमें शामिल लोग प्रशासन की कार्रवाई हजम नहीं कर सके। हाकिमों के खिलाफ लामबंद हुए ऐसे तत्व शिकायतें बड़े नेताओं से करते रहे। वित्तीय वर्ष समाप्त होने के डेढ़ महीने पहले इन आला अफसरों के अचानक तबादले से बरेली के विकास के कई महत्वपूर्ण काम तय समय पर हो पाएंगे या नहीं, इसको लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पारिवारिक लाभ में फर्जीवाड़ा
इस योजना में इसी वित्तीय वर्ष के 118 मामले फर्जी पाए गए। डीएम ऐसे सारे मामले खंगालने का मूड बना चुके थे। इसमें बहेड़ी तथा मीरगंज तहसील के बड़े-बड़े लोग शामिल थे। कई का खुलासा हुआ। डेढ़ दर्जन लेखपाल नापे गए। एफआईआर दर्ज भी हो चुकी है। आगे भी कार्रवाई की जानी थी। प्रशासन ने पिछले दो वित्तीय वर्ष 2021-13 तथा 2013-14 के 6067 आवेदनों की जांच भी शुरू करा दी थी।
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अशोक की लाट प्रकरण
सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह के घर के पास लोहिया गेट पर अवैध रूप से लगाई गई अशोक की लाट को हटाने के लिए कमिश्नर ने जांच के आदेश कर दिए। प्रशासनिक सख्ती के चलते अशोक की लाट हटा दी गई यह बात अलग है कि आगे की कार्रवाई पर नगर निगम ने चुप्पी साध ली, कमिश्नर को रिपोर्ट नहीं दी गई।
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नगर निगम और बीडीए पर सख्ती
कमिश्नर विपिन कुमार द्विवेदी ने बीडीए में लंबित नक्शों का तुरंत निस्तारण कराने के अलावा इंजीनियरों की मिलीभगत से बनने वाली अवैध कालोनियों के ध्वस्तीकरण का अभियान चलवाया। इससे बिना नक्शा पास कराए मकान बनाने वाले नाराज हो गए। पुराना रोडवेज के निकट एक बड़े व्यवसायी और सत्ता से जुड़े नेता का नक्शे के विपरीत निर्माण गिराए जाने का अंदेशा था।
कुछ काम तो हो गए
बड़ा बाईपास फिर लटकाने की तैयारी थी। डीएम ने रिस्क लेकर भी इसे चालू करा दिया। सौ फुटा रोड का लटका हुआ काम भी कमिश्नर और डीएम के प्रयासों से मुकम्मल होने को है। इसके अलावा अवस्थापना निधि से करीब 80 करोड़ की लागत से सड़कों के निर्माण में भी दोनों की मानीटरिंग से शहर की सूरत बदलने की उम्मीद जगी थी। लीलौर झील के टेंडर में सिफारिशी लोगों के कारण विवाद हुआ लेकिन ये काम भी जैसे तैसे आगे बढ़ा।
कमिश्नर तो गए, अब कौन पूछे ...
चौड़ीकरण में पत्थर बजरी के बजाय रेत पड़ रही है
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। मंडलायुक्त विपिन कुमार द्विवेदी का तबादला होने की खबर मिलते ही बीडीए फिर पुराने ढर्रे पर है। दो सड़कों के फोरलेन चौड़ीकरण के काम में मनमानी शुरू हो गई है। साढ़े छह करोड़ की लागत से होने वाले फोरलेन चौड़ीकरण में सड़क के ग्रेनुअल सब बेस (जीएसबी) में पत्थर बजरी की कुटाई के बजाय नदी के रेत का इस्तेमाल किया जा रहा है। दो किलोमीटर की ये सड़क दोनों ओर से 3-3 मीटर चौड़ी होनी है। यही हाल रामगंगा नगर वाली डोहरा रोड का है। 2.25 किलोमीटर लंबी सड़क के बेस की कुटाई में पत्थर और बजरी के बजाय 90 फीसदी नदी की रेत का इस्तेमाल होने गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। इससे पहले तक निर्माण एजेंसियां और ठेकेदार कमिश्नर के डर से बहुत ज्यादा गड़बड़ी नहीं कर पा रहे थे।
ट्रांसपोर्ट नगर के काम में लगा ब्रेक
कमिश्नर के डंडे का ही असर था कि एक दशक से भी ज्यादा समय से लटका ट्रांसपोर्ट नगर बस गया। तबादले से दो दिन पूर्व कमिश्नर ने ट्रांसपोर्ट नगर की सड़कें, पानी की टंकी और प्रकाश व्यवस्था समेत तमाम खामियां दूर करने के लिए बीडीए उपाध्यक्ष शफाकत कमाल को 15 दिन का वक्त दिया था। 24 फरवरी को ट्रांसपोर्टरों के साथ मीटिंग कर कमिश्नर ने ट्रांसपोर्ट नगर जाने में आड़े आ रही समस्याएं खुद सुलझाने की बात कही थी। अचानक तबादले के बाद इस पर पूरी तरह ब्रेक लग गया। ट्रांसपोर्ट नगर में बीडीए ने कोई काम प्रारंभ नहीं कराया।