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बेहोश करके पकड़े गए हमलावर बाघ की उपचार के दौरान मौत, अधिकारी बोले- पहले से था जख्मी

Sun, 03 May 2020 10:38 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 03 May 2020 10:38 PM IST
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tranquilized tiger dies during treatment in pilibhit
इलाज के लिए बाघ को ले जाते कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला

दो दिन पहले किसान समेत तीन लोगों पर हमला करने वाला बाघ 58 घंटे बाद रविवार शाम बेहोश (ट्रैंक्युलाइज) करके पिंजरे में कैद कर लिया गया, मगर एक घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई। ट्रैंक्युलाइजर गन से तीन डॉट दिए जाने से उसकी मौत होने की आशंका है। 

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हालांकि वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वह पहले से जख्मी था और उसके कीड़े पड़े थे, जिन्हें देखकर इलाज शुरू किए जाने के दौरान ही मौत हो गई। 


यह बाघ रविवार सुबह उसी जगह पहुंच गया, जहां हमला किया था। शुक्रवार को तीन लोगों पर हमला करने के बाद बाघ को जंगल में खदेड़ दिया गया था। मगर रविवार सुबह छह बजे जराकोठी-शिवनगर लिंक मार्ग के समीप कुछ लोगों ने बाघ को देखा तो वहां हड़कंप मच गया।
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कुछ ही देर में बाघ मार्ग के समीप एक घर के पीछे चला गया। पुलिस फोर्स भी मौके पर पहुंची। कुछ देर बाद ही फील्ड डायरेक्टर एच राजामोहन और डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल भी पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेते हुए लिंक मार्ग के एक तरफ खाबड़ (जाल) लगवा दिया ताकि बाघ दोबारा नहर में जाकर न छिप जाए।

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बाघ घर से करीब सौ मीटर की दूरी पर खेत में बने एक नाले पर बैठा रहा। टाइगर रिजर्व प्रशासन ने मुख्यालय से बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति लेकर पौने पांच बजे अभियान शुरू किया। आधे घंटे बाद ट्रैंक्युलाइजर गन से दो डॉट चलाई गईं, लेकिन दोनों निशाने पर नहीं लगीं।

इसके बाद डॉ. एसके राठौर ने गन से डॉट चलाईं जो बाघ को सीधे लगीं और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। वनकर्मी बाघ को स्ट्रेचर पर लादने पहुंचे तो बाघ फिर हिंसक हो उठा। उस पर ट्रैंक्युलाइजर गन से एक और डॉट चलाई गई। इसके बाद वनकर्मियों ने उसे पिंजरे में बंद किया। बेहोश बाघ की हालत देख अफसरों के हाथ-पैर फूल गए। 

वनकर्मियों ने बाघ के सीने में पंपिंग की। जानकारों के मुताबिक बाघ बीमार लग रहा था। पिंजरे में कैद बाघ को सुरक्षा के साथ गढ़ा रेंज ले जाया गया और फिर वहां इलाज शुरू किया गया। टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल का कहना है कि बेहोश बाघ के तीन घाव थे और उनमें कीड़े पड़े थे। घाव की साफ सफाई करते वक्त ही उसने दम तोड़ दिया।

साथ ही उन्होंने कहा कि उसकी उम्र करीब दस वर्ष थी। वहीं तीन डॉट दिए जाने यानी नशा ज्यादा होना भी मौत की वजह बताया जा रहा है। आईवीआरआई (बरेली) के डॉ. अभिजीत पावड़े का कहना है कि इसकी सच्चाई पोस्टमार्टम से ही पता चल सकेगी।

माला रेंज की गढ़ा वीट क्षेत्र में शुक्रवार को फिर बाघ देखा गया। किसी घटना की आशंका के चलते उच्चाधिकारियों से बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति मांगी गई। फिर उसे शाम तक ट्रैंक्युलाइज कर लिया गया। बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व

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