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ट्रेन में महिला ने जन्मा बच्चा, नर्स ने कराई डिलीवरी
बरेली।
Updated Thu, 20 Apr 2017 01:26 AM IST
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ट्रेन में महिला ने जन्मा बच्चा, नर्स ने कराई डिलीवरी
- फोटो : Train-born baby, nurse delivered train
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रेलवे में महिला डॉक्टर न होने पर मंगलवार को ट्रेन में महिला के प्रसव पीड़ा होने पर उसे रेलवे अस्पताल की नर्स ने जंक्शन पर ट्रेन रुकने पर अटेंड किया और उसका प्रसव कराया। मंगलवार शाम पांच बजे मुरादाबाद कंट्रोल रूम से मैसेज आया कि गाड़ी नंबर 12921 श्रमजीवी सुपरफास्ट एक्सप्रेस के एस-10 में सीट नंबर 19 पर सफर कर रही 25 वर्षीय कुमकुम को प्रसव पीड़ा हो रही थी। उसका बरेली में अटेंड कर इलाज किया जाए। इस पर स्टेशन अधीक्षक ने रेलवे अस्पताल मेमो भेजकर महिला के इलाज के लिए डॉक्टर को कॉल किया। महिला डॉक्टर न होने पर नर्स ही रेलवे जंक्शन पहुंची और ट्रेन शाम 17.25 पर बरेली पहुंचने पर नर्स ने मरीज को अटेंड किया। कोच में सवार पुरुष यात्री नीचे उतर आए और नर्स ने प्रसव कराया। यात्री कुमकुम ने बच्चे को जन्म दिया। प्रसव सफल होने पर जच्चा बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ होने पर उन्हें उनके गंतव्य के लिए भेज दिया गया। इससे यह ट्रेन करीब दस मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही।
शाहजहांपुर में भी महिला ने ट्रेन में दिया बच्ची को जन्म
बरेली/शाहजहांपुर। अमृतसर से हावड़ा जाने वाली डुप्लीकेट एक्सप्रेस ट्रेन के महिला कोच में बिहार की एक महिला ने बच्ची को जन्म दिया। इस दौरान ट्रेन रेलवे स्टेशन पर आधा घंटा रुकी रही। महिला को नवजात के साथ ट्रेन से उतारने के बाद जिला अस्पताल भेजा गया। इसके बाद ही ट्रेन रवाना की गई।
बिहार के जिला नालंदा के मछलदिना गांव निवासी सरवन कुमार मांझी जालंधर मेें एक ईट भट्ठे पर मेहनत मजदूरी करता है। उसकी पत्नी रूना नौ माह के गर्भ से थी। उसने घर जाने के लिए मालिक से कई बार छुट्टी के लिए कहा, लेकिन उसे छुट्टी नहीं मिली। बमुश्किल उसे मंगलवार को छुट्टी दी गई। वह डुप्लीकेट ट्रेन से पत्नी को लेकर महिला बोगी में सवार हो गया। रास्ते में पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई तो टीटी को बताया, लेकिन उसे शाहजहांपुर पहुंचकर मेडिकल रिलीफ दिलाने को कहा गया। ट्रेन बुधवार सुबह लगभग आठ बजे तिलहर और शाहजहांपुर के बीच थी, तभी उसे फिर से प्रसव पीड़ा होने लगी। जैसे ही ट्रेन शाहजहांपुर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर आकर रुकी, तभी रूना को प्रसव पीड़ा बढ़ गई। बोगी में सवार महिलाओं ने उसे संभाला। इस दौरान उसने एक बच्ची का जन्म दिया। तब तक जीआरपी और आरपीएफ के लोग पहुंच गए और उसे ट्रेन से उतारकर स्ट्रेचर पर लिटाया। फिर 108 एंबुलेंस से उसे जिला महिला अस्पताल भेजकर भर्ती कराया गया, जहां बताया गया कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। प्रसव के दौरान डुप्लीकेट ट्रेन को आधा घंटा रोकना पड़ा। महिला को जिला अस्पताल भेजने के बाद ही ट्रेन को रवाना किया गया।
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इस जंक्शन पर सिर दर्द की गोली तक नहीं
बरेली जंक्शन पर सिर दर्द तक की गोली की व्यवस्था रेलवे के पास नहीं हैं।। हेल्थ बूथ है नहीं, रेलवे अस्पताल से डॉक्टर को आने में देर स्वाभाविक है। एक डाक्टर क्या क्या देखे। महिला डाक्टर तो है ही नहीं।
बरेली जंक्शन से हर रोज करीब 18 हजार से अधिक यात्री आते जाते हैं। रेलवे को हर रोज करीब बीस लाख रुपये की आय होती है, जंक्शन ग्रेड ए की श्रेणी में आता है। यहां हेल्थ बूथ तो होना ही चाहिए। वैसे तो रेलवे अस्पताल में दो डॉक्टरों की पोस्ट है, लेकिन यहां तैनाती सिर्फ एक डॉक्टर वेद प्रकाश की ही है, जो रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवार के इलाज में अस्पताल में उलझे रहते हैं। इसीलिए वह जंक्शन से पहुंचने वाली कॉल के अनुसार समय से नहीं आ पाते हैं।
चेयरमैन के निरीक्षण के दौरान हुई थी नवजात की मौत
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल 25 मार्च को बरेली में दौरे पर आए थे। वह इज्जतनगर स्टेशन का निरीक्षण कर रहे थे, इसी दौरान बरेली जंक्शन पर आई गरीब रथ एक्सप्रेस में बिहार के सिवान जा रहे मुन्ना राम के नौ साल के बेटे की हालत बिगड़ गई थी। डॉक्टर के न आने पर इलाज के अभाव में बच्चे की मौत हो गई थी।
लखनऊ की तरह बरेली जंक्शन पर भी हेल्थ बूथ की आवश्यकता है। इसकी मांग की जाएगी। रेलवे अस्पताल में दो डॉक्टरों की जगह एक ही डॉक्टर होने से वह अस्पताल के काम में फंसे रहते हैं, इसीलिए जंक्शन पर हेल्थ बूथ के साथ डॉक्टर होना बहुत जरूरी है।
चेतन स्वरूप शर्मा, स्टेशन अधीक्षक
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शाहजहांपुर में भी महिला ने ट्रेन में दिया बच्ची को जन्म
बरेली/शाहजहांपुर। अमृतसर से हावड़ा जाने वाली डुप्लीकेट एक्सप्रेस ट्रेन के महिला कोच में बिहार की एक महिला ने बच्ची को जन्म दिया। इस दौरान ट्रेन रेलवे स्टेशन पर आधा घंटा रुकी रही। महिला को नवजात के साथ ट्रेन से उतारने के बाद जिला अस्पताल भेजा गया। इसके बाद ही ट्रेन रवाना की गई।
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बिहार के जिला नालंदा के मछलदिना गांव निवासी सरवन कुमार मांझी जालंधर मेें एक ईट भट्ठे पर मेहनत मजदूरी करता है। उसकी पत्नी रूना नौ माह के गर्भ से थी। उसने घर जाने के लिए मालिक से कई बार छुट्टी के लिए कहा, लेकिन उसे छुट्टी नहीं मिली। बमुश्किल उसे मंगलवार को छुट्टी दी गई। वह डुप्लीकेट ट्रेन से पत्नी को लेकर महिला बोगी में सवार हो गया। रास्ते में पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई तो टीटी को बताया, लेकिन उसे शाहजहांपुर पहुंचकर मेडिकल रिलीफ दिलाने को कहा गया। ट्रेन बुधवार सुबह लगभग आठ बजे तिलहर और शाहजहांपुर के बीच थी, तभी उसे फिर से प्रसव पीड़ा होने लगी। जैसे ही ट्रेन शाहजहांपुर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर आकर रुकी, तभी रूना को प्रसव पीड़ा बढ़ गई। बोगी में सवार महिलाओं ने उसे संभाला। इस दौरान उसने एक बच्ची का जन्म दिया। तब तक जीआरपी और आरपीएफ के लोग पहुंच गए और उसे ट्रेन से उतारकर स्ट्रेचर पर लिटाया। फिर 108 एंबुलेंस से उसे जिला महिला अस्पताल भेजकर भर्ती कराया गया, जहां बताया गया कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। प्रसव के दौरान डुप्लीकेट ट्रेन को आधा घंटा रोकना पड़ा। महिला को जिला अस्पताल भेजने के बाद ही ट्रेन को रवाना किया गया।
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इस जंक्शन पर सिर दर्द की गोली तक नहीं
बरेली जंक्शन पर सिर दर्द तक की गोली की व्यवस्था रेलवे के पास नहीं हैं।। हेल्थ बूथ है नहीं, रेलवे अस्पताल से डॉक्टर को आने में देर स्वाभाविक है। एक डाक्टर क्या क्या देखे। महिला डाक्टर तो है ही नहीं।
बरेली जंक्शन से हर रोज करीब 18 हजार से अधिक यात्री आते जाते हैं। रेलवे को हर रोज करीब बीस लाख रुपये की आय होती है, जंक्शन ग्रेड ए की श्रेणी में आता है। यहां हेल्थ बूथ तो होना ही चाहिए। वैसे तो रेलवे अस्पताल में दो डॉक्टरों की पोस्ट है, लेकिन यहां तैनाती सिर्फ एक डॉक्टर वेद प्रकाश की ही है, जो रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवार के इलाज में अस्पताल में उलझे रहते हैं। इसीलिए वह जंक्शन से पहुंचने वाली कॉल के अनुसार समय से नहीं आ पाते हैं।
चेयरमैन के निरीक्षण के दौरान हुई थी नवजात की मौत
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल 25 मार्च को बरेली में दौरे पर आए थे। वह इज्जतनगर स्टेशन का निरीक्षण कर रहे थे, इसी दौरान बरेली जंक्शन पर आई गरीब रथ एक्सप्रेस में बिहार के सिवान जा रहे मुन्ना राम के नौ साल के बेटे की हालत बिगड़ गई थी। डॉक्टर के न आने पर इलाज के अभाव में बच्चे की मौत हो गई थी।
लखनऊ की तरह बरेली जंक्शन पर भी हेल्थ बूथ की आवश्यकता है। इसकी मांग की जाएगी। रेलवे अस्पताल में दो डॉक्टरों की जगह एक ही डॉक्टर होने से वह अस्पताल के काम में फंसे रहते हैं, इसीलिए जंक्शन पर हेल्थ बूथ के साथ डॉक्टर होना बहुत जरूरी है।
चेतन स्वरूप शर्मा, स्टेशन अधीक्षक