{"_id":"5814d2f24f1c1bad2bbc1a28","slug":"today-the-festival-of-lanterns-taurus-lakshmi-puja-in-the-ascendant","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुख्य दीपोत्सव आज, वृष लग्न में करें लक्ष्मी पूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुख्य दीपोत्सव आज, वृष लग्न में करें लक्ष्मी पूजा
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Sun, 30 Oct 2016 01:11 AM IST
विज्ञापन
दीवाली
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्य दीपोत्सव आज मनाया जाएगा। रविवार सुबह से देर रात तक अमावस्या रहेगी। चित्रा नक्षत्र सूर्योदय से सुबह 9.02 मिनट रहेगा। शाम 6.15 से 8.11 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा, इस बीच लक्ष्मी पूजा फलदायक रहेगा।
पांच दिन तक चलने वाले दीपोत्सव के तीसरे दिन मुख्य पर्व अमावस्या में मनाया जाता है। अमावस्या शनिवार रात 8.40 बजे से लग गई, जो कि रविवार रात 11.07 बजे तक रहेगी। रविवार सुबह में चित्रा नक्षत्र है। सुबह 9.02 मिनट के बाद स्वाति नक्षत्र लगेगा। आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि चित्रा और स्वाति नक्षत्र से पद्म और लुम्बक योग बनता है जो लक्ष्मी प्राप्ति कराता है। मिश्रा ने बताया कि रविवार शाम शाम 6.15 से 8.11 बजे तक शुभ मुहूर्त है इस बीच लक्ष्मी पूजा करना चाहिए। क्योंकि धन और ऐश्वर्य की प्रतीक महालक्ष्मी का विशेष पूजन वृष लग्न में ही श्रेष्ठ माना गया है। मिश्रा ने बताया महानिशा यानी मध्य रात्रि पूजा रात 12.40 से 2.57 बजे तक करना उचित होगा। यह मुहूर्त तंत्र, मंत्र, यंत्र सिद्धि साधना के लिए विशेष फलदायी है। रविवार में प्रीति योग भी है जो कि पर्व की ज्यादा शोभा बढ़ाएगा।
डॉ. अनुराग शंखधार बताते हैं कि शुभ मुहूर्त में प्रदोष बेला भी है। प्रदोष बेला के स्वामी भगवान शंकर जी हैं जो इस अवधि में किए गए दीपदान से प्रसन्न होकर स्थिर लक्ष्मी का वरदान देते हैं। शंखधार ने बताया कि इस अवधि में अमृत मुहूर्त का चौघड़िया भी रहेगा। पंडित रमेश चंद तिवारी ने बताया कि रविवार दोपहर 1.57 बजे मकर लग्न है। व्यापारी इस अवधि में अपने प्रतिष्ठानों पर लक्ष्मी, गणेश और कुबेर देवताओं का पूजन करें। दोपहर में मकर के धन लग्न भी है, मकर के स्वामी शनि और धनु के स्वामी बृहस्पति हैं। दोनों गृह और व्यापार में वृद्धि कारक माने जाते हैं। इस अवधि के मध्य में अभिजीत नामक मुहूर्त भी आएगा यह भी व्यापार वृद्धि करेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
पांच दिन तक चलने वाले दीपोत्सव के तीसरे दिन मुख्य पर्व अमावस्या में मनाया जाता है। अमावस्या शनिवार रात 8.40 बजे से लग गई, जो कि रविवार रात 11.07 बजे तक रहेगी। रविवार सुबह में चित्रा नक्षत्र है। सुबह 9.02 मिनट के बाद स्वाति नक्षत्र लगेगा। आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि चित्रा और स्वाति नक्षत्र से पद्म और लुम्बक योग बनता है जो लक्ष्मी प्राप्ति कराता है। मिश्रा ने बताया कि रविवार शाम शाम 6.15 से 8.11 बजे तक शुभ मुहूर्त है इस बीच लक्ष्मी पूजा करना चाहिए। क्योंकि धन और ऐश्वर्य की प्रतीक महालक्ष्मी का विशेष पूजन वृष लग्न में ही श्रेष्ठ माना गया है। मिश्रा ने बताया महानिशा यानी मध्य रात्रि पूजा रात 12.40 से 2.57 बजे तक करना उचित होगा। यह मुहूर्त तंत्र, मंत्र, यंत्र सिद्धि साधना के लिए विशेष फलदायी है। रविवार में प्रीति योग भी है जो कि पर्व की ज्यादा शोभा बढ़ाएगा।
विज्ञापन
डॉ. अनुराग शंखधार बताते हैं कि शुभ मुहूर्त में प्रदोष बेला भी है। प्रदोष बेला के स्वामी भगवान शंकर जी हैं जो इस अवधि में किए गए दीपदान से प्रसन्न होकर स्थिर लक्ष्मी का वरदान देते हैं। शंखधार ने बताया कि इस अवधि में अमृत मुहूर्त का चौघड़िया भी रहेगा। पंडित रमेश चंद तिवारी ने बताया कि रविवार दोपहर 1.57 बजे मकर लग्न है। व्यापारी इस अवधि में अपने प्रतिष्ठानों पर लक्ष्मी, गणेश और कुबेर देवताओं का पूजन करें। दोपहर में मकर के धन लग्न भी है, मकर के स्वामी शनि और धनु के स्वामी बृहस्पति हैं। दोनों गृह और व्यापार में वृद्धि कारक माने जाते हैं। इस अवधि के मध्य में अभिजीत नामक मुहूर्त भी आएगा यह भी व्यापार वृद्धि करेगा।
विज्ञापन