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Bareilly News: तंबाकू जानलेवा है... फिर भी जिले में प्रतिमाह 50 करोड़ का कारोबार

Sat, 31 May 2025 12:36 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Sat, 31 May 2025 12:36 PM IST
सार

कारोबारियों के मुताबिक दशकभर पहले तंबाकू उत्पादों का कारोबार प्रतिमाह करीब 30 करोड़ था। लेकिन अब बढ़कर 50 करोड़ तक हो गया है। 

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Tobacco is deadly yet the bareilly district has a turnover of 50 crores per month
तंबाकू-धूम्रपान - फोटो : Freepik.com

विस्तार

तंबाकू के सेवन से लाइलाज कैंसर होता है। जो दर्दनाक मौत की वजह बनता है। इस जानकारी के बावजूद लोग तंबाकू उत्पादों से तौबा नहीं कर रहे। यही वजह है कि बरेली जिले में प्रतिमाह करीब 50 करोड़ के पास तंबाकू का कारोबार पहुंच जाता है।

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कारोबारियों के मुताबिक दशकभर पहले तंबाकू उत्पादों का कारोबार प्रतिमाह करीब 30 करोड़ था। दशकभर में ही खैनी, पान मसाला, जर्दा, सिगरेट, बीड़ी आदि का बेतहाशा प्रयोग बढ़ा है। इसी तरह थोक कारोबारियों समेत चौराहों पर दुकानदारों की तादाद भी बढ़ी है। पान मसाला, सिगरेट, खैनी की कई कंपनियों के उत्पाद मोहल्ले की दुकान से मॉल के बाहर धड़ल्ले से बिक रहे हैं। युवाओं में पान मसाला, सिगरेट का प्रयोग स्टेटस सिंबल बन रहा है। लिहाजा, सेवन करने वाले रोगी और कारोबारी मालामाल हो रहे हैं।
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जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्लोगन, पोस्टर के भरोसे ही तंबाकू नियंत्रण का दावा है। कभी-कभार अभियान चलाकर अंकुश लगाने की कवायद होती है। इधर, स्कूल-कॉलेज के पास, अस्पतालों के बाहर तंबाकू की बिक्री हो रही है। इसी कारण कारोबार भी 50 करोड़ के पार पहुंच रहा है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि पहले यह कारोबार 30 करोड़ के करीब था, लेकिन अब यह 50 करोड़ तक पहुंच गया है।

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कैंसर ही नहीं कई रोगों की वजह बनती है तंबाकू
तीन सौ बेड अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सतीश चंद्रा के मुताबिक तंबाकू सेवन हृदय समेत डायबिटीज, हाइपरटेंशन रोग की वजह बन सकता है। मरीजों को तंबाकू छोड़ने का परामर्श दिया जा रहा है।

क्षणिक राहत के लिए खतरे में न डालें जीवन
मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक निकोटीन मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमिशन की स्थिति बदलकर डोपामाइन को बढ़ाकर दिमागी रसायन संरचना बदलने लगता है। जो तंबाकू पर निर्भरता बढ़ाता है। निकोटीन का असर कम होने से चिंता, बेचैनी, तनाव बढ़ता है। इससे निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। अनिद्रा, सिजोफ्रेनिया, व्यावहारिक बदलाव होते हैं। दृढ़ इच्छाशक्ति से ही तंबाकू से मुक्ति मिलती है।
 
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