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Bareilly News: मुआवजा लेने के लिए घटिया सामग्री से बनाए पक्के ढांचे
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बरेली। बीसलपुर-शाहजहांपुर हाईवे के एलाइनमेंट के दायरे में आने वाली जमीन पर घपलेबाजों ने घटिया सामग्री का प्रयोग कर अधिक मुआवजा लेने की मानसिकता से ढांचे खड़े कर दिए। इसकी पुष्टि लोक निर्माण विभाग की ओर से भेजी गई अंतिम जांच रिपोर्ट में हुई है। स्थलीय निरीक्षण में जब मामला सामने आया तो अधिकारियों ने आकलन रिपोर्ट में न्यूनतम मुआवजा देने की संस्तुति एनएचएआई को भेजी है।
बीसलपुर-शाहजहांपुर हाईवे की अंतिम जांच रिपोर्ट डेढ़ माह बाद लोक निर्माण विभाग पीलीभीत के अधिशासी अभियंता ने गत बुधवार को बरेली के विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) को भेज दी थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार स्थलीय निरीक्षण में कमेटी के सदस्याें ने पाया कि ढांचों का निर्माण सिर्फ मुआवजा लेने के उद्देश्य से ही किया गया है। ढांचों को प्रस्तावित हाईवे के एलाइनमेंट पर ही बनाया गया। ढांचों का निर्माण इस प्रकार किया गया कि उसके निर्माण में घटिया किस्म की सामग्री का प्रयोग हुआ है। जांच में टीम ने पाया कि ढांचों का निर्माण मुआवजा लेने के उद्देश्य से ही किया गया था।
वहीं, पूर्व में तैयार की गई मुआवजा रिपोर्ट में इसकी गुणवत्ता को सही दर्शाते हुए आकलन की धनराशि अधिक दिखाई गई थी। साथ ही ढांचों को करीब 10 वर्ष पुराना बताया गया है। जबकि इसका निर्माण अधिक आर्थिक लाभ लेने के उद्देश्य से दिसंबर 2023 में किया गया है। कमेटी के अनुसार अधिसूचना जारी होने के बाद जमीनों की खरीद फरोख्त की गई है। जबकि अधिसूचना जारी होने के बाद एलाइनमेंट के दायरे में आने वाली जमीनों की बिक्री और रजिस्ट्री पर ब्लॉक लगा दिया जाता है। ऐसे में रजिस्ट्री करने वाले अधिकारियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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जांच करने गई टीम तीसरी बार में कर पाई ढांचों का आकलन
ढांचों का निर्माण खेतों के बीच में ऐसे स्थान पर किया गया जहां तक टीम दो बार पहुंच ही नहीं पाई। तीसरी बार में टीम कड़ी मशक्कत के बाद पहुंची। इसके बाद ढांचों का आकलन कर पाई।
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ढांचों का निर्माण अधिक आर्थिक लाभ लेने के उद्देश्य घटिया सामग्री का प्रयोग कर किया गया था। ताकि मुआवजा लेने के बाद इनको एक साल के भीतर आसानी से हटाया जा सके। रिपोर्ट को एसएलएओ को भेज दिया गया है। - राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता, पीलीभीत
संवाद
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बीसलपुर-शाहजहांपुर हाईवे की अंतिम जांच रिपोर्ट डेढ़ माह बाद लोक निर्माण विभाग पीलीभीत के अधिशासी अभियंता ने गत बुधवार को बरेली के विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) को भेज दी थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार स्थलीय निरीक्षण में कमेटी के सदस्याें ने पाया कि ढांचों का निर्माण सिर्फ मुआवजा लेने के उद्देश्य से ही किया गया है। ढांचों को प्रस्तावित हाईवे के एलाइनमेंट पर ही बनाया गया। ढांचों का निर्माण इस प्रकार किया गया कि उसके निर्माण में घटिया किस्म की सामग्री का प्रयोग हुआ है। जांच में टीम ने पाया कि ढांचों का निर्माण मुआवजा लेने के उद्देश्य से ही किया गया था।
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वहीं, पूर्व में तैयार की गई मुआवजा रिपोर्ट में इसकी गुणवत्ता को सही दर्शाते हुए आकलन की धनराशि अधिक दिखाई गई थी। साथ ही ढांचों को करीब 10 वर्ष पुराना बताया गया है। जबकि इसका निर्माण अधिक आर्थिक लाभ लेने के उद्देश्य से दिसंबर 2023 में किया गया है। कमेटी के अनुसार अधिसूचना जारी होने के बाद जमीनों की खरीद फरोख्त की गई है। जबकि अधिसूचना जारी होने के बाद एलाइनमेंट के दायरे में आने वाली जमीनों की बिक्री और रजिस्ट्री पर ब्लॉक लगा दिया जाता है। ऐसे में रजिस्ट्री करने वाले अधिकारियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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जांच करने गई टीम तीसरी बार में कर पाई ढांचों का आकलन
ढांचों का निर्माण खेतों के बीच में ऐसे स्थान पर किया गया जहां तक टीम दो बार पहुंच ही नहीं पाई। तीसरी बार में टीम कड़ी मशक्कत के बाद पहुंची। इसके बाद ढांचों का आकलन कर पाई।
ढांचों का निर्माण अधिक आर्थिक लाभ लेने के उद्देश्य घटिया सामग्री का प्रयोग कर किया गया था। ताकि मुआवजा लेने के बाद इनको एक साल के भीतर आसानी से हटाया जा सके। रिपोर्ट को एसएलएओ को भेज दिया गया है। - राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता, पीलीभीत
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