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छठें दिन पिंजरे से आजाद हुई बाघिन: रेडियो कॉलर आईडी लगाकर पीटीआर में छोड़ी गई बाघिन, टीम रखेगी नियमित नजर

Sun, 31 Dec 2023 08:01 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत Published by: श्याम जी. Updated Sun, 31 Dec 2023 08:01 PM IST
सार

पीलीभीत जिले में एख बाघिन को छह दिन बाद पीटीआर के जंगल में छोड़ा गया है। कतर्नियाघाट घाट और पीटीआर के पशु चिकित्सक की मौजूदगी में बाघिन को जांच कर छोड़ा गया है। 
 

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tigress was released into PTR forest after six days in Pilibhit
पीटीआर के जंगल में बाघिन को छोड़ा गया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कलीनगर थाना क्षेत्र के अटकोना गांव से पकड़ी गई बाघिन को छठें दिन पीटीआर के जंगल में छोड़ दिया गया। गले में कॉलर आईडी लगाकर बाघिन को छोड़ा गया। अब पीटीआर की एक टीम बाघिन पर नियमित नजर भी रखेगी। कतर्नियाघाट घाट और पीटीआर के पशु चिकित्सक की मौजूदगी में बाघिन को जांच कर छोड़ा गया।

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जानकारी के अनुसार, कलीनगर क्षेत्र के अटकोना गांव में 26 दिसंबर को किसान सुखविंदर सिंह के घर से बाघिन को रेस्क्यू किया गया था। बाघिन के शांत स्वभाव को देख विशेषज्ञों ने उसके स्वस्थ होने को लेकर आशंका जताई थी। इसके बाद बाघिन के खून के सैंपल आईवीआरआई भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में बाघिन को कोई बीमारी नहीं निकली। मामला सुर्खियों में आने के बाद एनटीसीए के डीआईजी ने भी बाघिन को आकर देखा व उसे स्वस्थ पाया था। 
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जांच रिपोर्ट आने के बाद दो दिन तक टीम ने बाघिन के स्वभाव को देखा। बाघिन को निगरानी में रखने का फैसला लिया गया। कतर्नियाघाट के चिकित्सक डॉ. दीपक को पीटीआर भेजा गया। माला गेस्ट हाउस में बाघिन को बेहोश कर उसके गले में कॉलर आईडी लगाई गई। इसके बाद रविवार दोपहर को डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल की मौजूदगी में पीटीआर के जंगल में बाघिन को छोड़ दिया गया।
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ऐसे काम करता है रेडियो कॉलर आईडी
रेडियो कॉलर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। इसमें लगे ट्रांसमीटर के जरिए सिग्नल का आदान प्रदान होता है, जिससे जगह की जानकारी होती रहती है। इससे कई किलोमीटर तक वन्य जीव की लोकेशन ट्रेस की जा सकती है। इनमें वीएचएफ, जीपीएस, सैटेलाइट कॉलर्स शामिल हैं। रेडियो कॉलर आमतौर पर नायलॉन या चमड़े से बनाया जाता है। इससे टाइगर की गर्दन को नुकसान नहीं पहुंचता। इसे बाघ की गर्दन में बांधा जाता है। 

चांदूपुर से पकड़े बाघ को लगाई गई थी कॉलर आईडी
ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी बाघिन को कॉलर आईडी लगाकर पीटीआर के जंगल में छोड़ा गया हो, हालांकि 2019 में लगातार इंसानों पर हमलावर हो रहे एक बाघ को कलीनगर के गांव चांदूपुर से बेहोश कर पकड़ा गया था। अफसर के निर्देश के बाद बाघ को कॉलर आईडी लगाकर दुधवा के जंगल में छोड़ा गया था। हालांकि कुछ समय बाद बाघ की लोकेशन न मिलने की बात भी सामने आई थी। ऐसे में अटकोना गांव से पकड़ी गई बाघिन को कॉलर आईडी लगाकर छोड़ने के बाद उसकी नियमित निगरानी पीटीआर प्रशासन के लिए चुनौती बनी रहेगी। 


पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि बाघिन के स्वास्थ्य की जांच कर आला अफसरों के निर्देश पर कालर आईडी लगाई गई है। उसे पीटीआर के कोर जोन के क्षेत्र में छोड़ दिया गया।

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