{"_id":"58f7bb754f1c1beb02473817","slug":"thunderstorms-in-overloading","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओवरलोडिंग में धड़ाधड़ फाल्ट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ओवरलोडिंग में धड़ाधड़ फाल्ट
बरेली।
Updated Thu, 20 Apr 2017 01:27 AM IST
विज्ञापन
ओवरलोडिंग में धड़ाधड़ फाल्ट
- फोटो : Thunderstorms in overloading
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर में 24 घंटे बिजली सप्लाई देने का दावा छठे दिन ठहरा हुआ नजर आया, क्याेंकि तापमान 40 डिग्री पहुंचा तो बिजली मांग भी बढ़ गई। चोरी वाले इलाकों में ट्रांसफार्मराें के फ्यूज उड़ गए। जगह-जगह लाइनों में फाल्ट आ गया। इससे बुधवार सुबह से देर शाम तक पांच से छह घंटे तक विभिन्न इलाकों में बिजली गुल रही। पीलीभीत बाईपास स्थित बीसलपुर चौराहे पर एचटी लाइन चिपकने से कई पॉश कालोनियाें की सप्लाई सुबह से दोपहर तक गुल रही।
योगी सरकार ने भले ही शहरों में 24 घंटे बिजली देना अनिवार्य कर दिया है, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने अभी कटिया लगाकर सिस्टम ओवरलोड करने वालों पर सीधी कार्रवाई करने की योजना ही नहीं बनाई है। वैसे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन 70 प्रतिशत तक लाइन लॉस देने वाले चिह्नित इलाकों में अभियान चलाने को लेकर गंभीरता नहीं दिख रही है। इसका खामियाजा नियमित भुगतान करने वाले कनेक्शनधारक हैं। तथाकथित प्राइवेट संविदा कर्मी खुलेआम 200 रुपये प्रति घर वसूलकर पूरी सप्लाई देने की गारंटी देते घूम रहे हैं।
शहर में सवा दो लाख कनेक्शन कागजाें पर हैं, जबकि एक लाख से ज्यादा लोग कटिया डालकर बिजली चला रहे हैं। शाम होते ही कटिया डालने की प्रतियोगिता शुरू हो जाती है। इसके बाद धड़ाधड़ फेज उड़ते रहते हैं, जिससे उपकेंद्र स्टाफ दबाव में आकर फाल्ट सही करता है।
विज्ञापन
यहां हुए खूब फाल्ट
खुशबू इंक्लेव, आकाशपुरम्, पशुपति विहार, सुरेश शर्मा नगर, सन सिटी विस्तार, सनराइज, ग्रीन पार्क, रूहेलखंड विश्वविद्यालय, आशीष रायल पार्क, संजयनगर, नई बस्ती, जोगी नवादा, गौटिया, नकटिया, चक महमूद, गोसाई गौटिया, किला, बाजार संदल खां, जखीरा, मलूकपुर, बिहारीपुर, शाहदाना, सूफीटोला, सैलानी, कटरा चांद खां, बालजती, सिंधु नगर, दुर्गानगर, पीर बहोड़ा, इज्जतनगर, सुभाषनगर, करगैना, राजीव नगर, शांति विहार, बानखाना, सीबीगंज, परसाखेड़ा, बड़ा बाजार, आजमनगर, सिकलापुर, बांस मंडी आदि इलाकों में फाल्ट होने से सप्लाई समस्या बनी रही।
ग्राउंड रिपोर्ट- चकमहमूद, नई बस्ती, गोसाई गोटिया, कांकरटोला, मोहन तालाब।
इन क्षेत्रों में बिजली चोरी की कर्मी लेता है गारंटी
बरेली। शहर में बिजली सुधार के लिए स्काडा योजना आई। साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये से ज्यादा नेटवर्क सुधार पर खर्च भी किए जा चुके हैं, लेकिन दर्जनों इलाके अभी भी ऐसे हैं जहां सिस्टम बेहद लचर है। इसका फायदा कटियाबाज उठा रहे हैं। अमर उजाला टीम ने पुराना शहर स्थित कुछ इलाकों में सर्वे किया और लोगाें से बातचीत की। प्रभावित लोगाें ने बताया कि वे कनेक्शन लेना तो चाहते हैं लेकिन लाइन मैन चोरी कराने की गारंटी लेता हैै। चकमहमूद, नई बस्ती, गोसाई गोटिया, कांकरटोला, मोहन तालाब का जायज़ा लेने गई टीम ने देखा कि खंभों पर तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। लोगाें ने बताया कि इससे कई बार आग लग जाती है। इलाके में कई ऐसे मकान हैं जहां मीटर घर के बाहर नहीं लगे हैं। कई घराें में बिजली का बिल भी नहीं आ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिजली विभाग के कर्मी चोरी में साथ देते हैं, कार्रवाई नहीं करते। इनका पैसा बंधा है।
इलाके में खूब उड़ रहा है फ्यूज, नहीं आ रहे बिल
अब्बास नगर में रहने वाले फैजान रजा का कहना है कि बिजली पहले से बेहतर आ रही है, लेकिन महीने भर में दस बार फ्यूज उड़ चुका है। बिजली कर्मियों को फोन करके बुलाना पड़ता है। एक दिन में सही हो जाए तो ठीक वरना इंतजार करते हैं। चकमहमूद के जिशान का कहना है कि आठ महीने से उनका बिजली का बिल नहीं आ रहा है।
बाकरगंज तो सुधर गया...
बाकरगंज, स्वालेनगर, कटघर कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां पिछले कई सालों से बिजली देने के नाम पर मजाक हो रहा था। यहां गलियों में तार झूलते हुए मौत को दावत दे रहे थे और बांस के खंभे लगे हुए थे। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने इलाके का दौरा करके पाया कि स्काडा के काम से काफी हद तक स्थिति सुधरी है। जिस इलाके में तार झूल रहे थे, वहां खंभे लगा दिए गए हैं। एबीसी तार भी इलाके में लगाई गई है। चोरी वाले इलाकों में एबीसी तार होने से कटियाबाजी कम हुई है, जिससे फाल्ट की संख्या घट गई। बाकरगंज में जनरल स्टोर चलाने वाले रहबर बताते हैं कि अब फाल्ट कम होते हैं और बिजली की सप्लाई भी अच्छी मिल रही है। फाल्ट डेढ़ से दो घंटे में सुधरते हैं। प्रमोद कुमार का कहना है कि अभी गर्मी ज्यादा नहीं बढ़ी है शायद इसलिए सप्लाई ठीक आ रही है। आगे बिगड़ सकती है।
विज्ञापन
योगी सरकार ने भले ही शहरों में 24 घंटे बिजली देना अनिवार्य कर दिया है, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने अभी कटिया लगाकर सिस्टम ओवरलोड करने वालों पर सीधी कार्रवाई करने की योजना ही नहीं बनाई है। वैसे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन 70 प्रतिशत तक लाइन लॉस देने वाले चिह्नित इलाकों में अभियान चलाने को लेकर गंभीरता नहीं दिख रही है। इसका खामियाजा नियमित भुगतान करने वाले कनेक्शनधारक हैं। तथाकथित प्राइवेट संविदा कर्मी खुलेआम 200 रुपये प्रति घर वसूलकर पूरी सप्लाई देने की गारंटी देते घूम रहे हैं।
विज्ञापन
शहर में सवा दो लाख कनेक्शन कागजाें पर हैं, जबकि एक लाख से ज्यादा लोग कटिया डालकर बिजली चला रहे हैं। शाम होते ही कटिया डालने की प्रतियोगिता शुरू हो जाती है। इसके बाद धड़ाधड़ फेज उड़ते रहते हैं, जिससे उपकेंद्र स्टाफ दबाव में आकर फाल्ट सही करता है।
विज्ञापन
यहां हुए खूब फाल्ट
खुशबू इंक्लेव, आकाशपुरम्, पशुपति विहार, सुरेश शर्मा नगर, सन सिटी विस्तार, सनराइज, ग्रीन पार्क, रूहेलखंड विश्वविद्यालय, आशीष रायल पार्क, संजयनगर, नई बस्ती, जोगी नवादा, गौटिया, नकटिया, चक महमूद, गोसाई गौटिया, किला, बाजार संदल खां, जखीरा, मलूकपुर, बिहारीपुर, शाहदाना, सूफीटोला, सैलानी, कटरा चांद खां, बालजती, सिंधु नगर, दुर्गानगर, पीर बहोड़ा, इज्जतनगर, सुभाषनगर, करगैना, राजीव नगर, शांति विहार, बानखाना, सीबीगंज, परसाखेड़ा, बड़ा बाजार, आजमनगर, सिकलापुर, बांस मंडी आदि इलाकों में फाल्ट होने से सप्लाई समस्या बनी रही।
ग्राउंड रिपोर्ट- चकमहमूद, नई बस्ती, गोसाई गोटिया, कांकरटोला, मोहन तालाब।
इन क्षेत्रों में बिजली चोरी की कर्मी लेता है गारंटी
बरेली। शहर में बिजली सुधार के लिए स्काडा योजना आई। साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये से ज्यादा नेटवर्क सुधार पर खर्च भी किए जा चुके हैं, लेकिन दर्जनों इलाके अभी भी ऐसे हैं जहां सिस्टम बेहद लचर है। इसका फायदा कटियाबाज उठा रहे हैं। अमर उजाला टीम ने पुराना शहर स्थित कुछ इलाकों में सर्वे किया और लोगाें से बातचीत की। प्रभावित लोगाें ने बताया कि वे कनेक्शन लेना तो चाहते हैं लेकिन लाइन मैन चोरी कराने की गारंटी लेता हैै। चकमहमूद, नई बस्ती, गोसाई गोटिया, कांकरटोला, मोहन तालाब का जायज़ा लेने गई टीम ने देखा कि खंभों पर तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। लोगाें ने बताया कि इससे कई बार आग लग जाती है। इलाके में कई ऐसे मकान हैं जहां मीटर घर के बाहर नहीं लगे हैं। कई घराें में बिजली का बिल भी नहीं आ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिजली विभाग के कर्मी चोरी में साथ देते हैं, कार्रवाई नहीं करते। इनका पैसा बंधा है।
इलाके में खूब उड़ रहा है फ्यूज, नहीं आ रहे बिल
अब्बास नगर में रहने वाले फैजान रजा का कहना है कि बिजली पहले से बेहतर आ रही है, लेकिन महीने भर में दस बार फ्यूज उड़ चुका है। बिजली कर्मियों को फोन करके बुलाना पड़ता है। एक दिन में सही हो जाए तो ठीक वरना इंतजार करते हैं। चकमहमूद के जिशान का कहना है कि आठ महीने से उनका बिजली का बिल नहीं आ रहा है।
बाकरगंज तो सुधर गया...
बाकरगंज, स्वालेनगर, कटघर कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां पिछले कई सालों से बिजली देने के नाम पर मजाक हो रहा था। यहां गलियों में तार झूलते हुए मौत को दावत दे रहे थे और बांस के खंभे लगे हुए थे। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने इलाके का दौरा करके पाया कि स्काडा के काम से काफी हद तक स्थिति सुधरी है। जिस इलाके में तार झूल रहे थे, वहां खंभे लगा दिए गए हैं। एबीसी तार भी इलाके में लगाई गई है। चोरी वाले इलाकों में एबीसी तार होने से कटियाबाजी कम हुई है, जिससे फाल्ट की संख्या घट गई। बाकरगंज में जनरल स्टोर चलाने वाले रहबर बताते हैं कि अब फाल्ट कम होते हैं और बिजली की सप्लाई भी अच्छी मिल रही है। फाल्ट डेढ़ से दो घंटे में सुधरते हैं। प्रमोद कुमार का कहना है कि अभी गर्मी ज्यादा नहीं बढ़ी है शायद इसलिए सप्लाई ठीक आ रही है। आगे बिगड़ सकती है।