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Bareilly News: जिनकी थी जिम्मेदारी... छूट गए वे अधिकारी
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बरेली। नियमित चेकिंग में लापरवाही की वजह से बेटिकट सफर कराने का सिलसिला नहीं थमा। अब इसपर परिवहन मुख्यालय ने कार्रवाई का शिकंजा कसा है। कई अधिकारी ऐसे भी हैं जिन पर अब तक कार्रवाई की कोई आंच नहीं आई है।
हल्द्वानी, बदायूं और मुरादाबाद मार्ग पर चलने वाली बसों की चेकिंग और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी एआरएम बरेली डिपो के पास है। शाहजहांपुर, बीसलपुर, पीलीभीत मार्ग पर संचालित बसों पर चेकिंग की जिम्मेदारी रुहेलखंड डिपो के एआरएम पर है। बेटिकट पकड़े जाने के मामले में हल्द्वानी मार्ग के उन अधिकारियों पर कार्रवाई की कोई आंच नहीं आई, जिनके पास नियमित चेकिंग की जिम्मेदारी थी। असल में बस रुहेलखंड डिपो की थी। बेटिकट यात्री पकड़े जाने की सूचना पर सबसे पहले अगर कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा तो वह एआरएम रुहेलखंड डिपो ही थे। उन्होंने खुद ही एफआईआर दर्ज कराई। निलंबन की कार्रवाई प्रबंध निदेशक ने की है। इसलिए अब पूरे मामले में तह तक जाने की जरूरत है। यह बात भी स्पष्ट होनी चाहिए कि बेटिकट सफर कराने में कौन-कौन अधिकारी शामिल थे। उन अधिकारियों ने चेकिंग की या सिर्फ खानापूरी। रुहेलखंड डिपो की बात करें तो इससे पहले भी कई बार बिना टिकट यात्री बसों में पकड़े गए हैं जब इस संबंध में रुहेलखंड डिपो के निलंबित एआरएम से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जो भी मामले आए उनमें जिम्मेदार परिचालकों पर कार्रवाई की गई है। कोई मामला लंबित नहीं है।
मुरादाबाद में पकड़ी गई रुहेलखंड डिपो की बस तब चेते बरेली के अफसर
बरेली। रोडवेज की जिस बस पर बिना टिकट सफर कराने के मामले को परिवहन निगम के मुख्यालय ने भ्रष्टाचार का गंभीर मामला माना है। उस बस में 17 नवंबर को ही दिन में मुरादाबाद में नौ यात्री बेटिकट मिले थे। मुरादाबाद की चेकिंग टीम ने जब इसकी सूचना मुख्यालय तक को दे दी तब बरेली के अफसर चोरी रोकने के लिए जागे। रात में साढ़े दस बजे बरेली की चेकिंग टीम ने इसी बस में 19 यात्री बेटिकट पकड़े। इसके बाद मुख्यालय उन अधिकारियों पर भी सवाल उठे जिनकी जिम्मेदारी नियमित चेकिंग की थी। निलंबन आदेश में चेकिंग कराने में लापरवाही बरतने और परिवहन निगम को वित्तीय क्षति पहुंचाने के आरोप एआरएम राजेश कुमार पर लगाया है।
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हल्द्वानी, बदायूं और मुरादाबाद मार्ग पर चलने वाली बसों की चेकिंग और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी एआरएम बरेली डिपो के पास है। शाहजहांपुर, बीसलपुर, पीलीभीत मार्ग पर संचालित बसों पर चेकिंग की जिम्मेदारी रुहेलखंड डिपो के एआरएम पर है। बेटिकट पकड़े जाने के मामले में हल्द्वानी मार्ग के उन अधिकारियों पर कार्रवाई की कोई आंच नहीं आई, जिनके पास नियमित चेकिंग की जिम्मेदारी थी। असल में बस रुहेलखंड डिपो की थी। बेटिकट यात्री पकड़े जाने की सूचना पर सबसे पहले अगर कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा तो वह एआरएम रुहेलखंड डिपो ही थे। उन्होंने खुद ही एफआईआर दर्ज कराई। निलंबन की कार्रवाई प्रबंध निदेशक ने की है। इसलिए अब पूरे मामले में तह तक जाने की जरूरत है। यह बात भी स्पष्ट होनी चाहिए कि बेटिकट सफर कराने में कौन-कौन अधिकारी शामिल थे। उन अधिकारियों ने चेकिंग की या सिर्फ खानापूरी। रुहेलखंड डिपो की बात करें तो इससे पहले भी कई बार बिना टिकट यात्री बसों में पकड़े गए हैं जब इस संबंध में रुहेलखंड डिपो के निलंबित एआरएम से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जो भी मामले आए उनमें जिम्मेदार परिचालकों पर कार्रवाई की गई है। कोई मामला लंबित नहीं है।
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मुरादाबाद में पकड़ी गई रुहेलखंड डिपो की बस तब चेते बरेली के अफसर
बरेली। रोडवेज की जिस बस पर बिना टिकट सफर कराने के मामले को परिवहन निगम के मुख्यालय ने भ्रष्टाचार का गंभीर मामला माना है। उस बस में 17 नवंबर को ही दिन में मुरादाबाद में नौ यात्री बेटिकट मिले थे। मुरादाबाद की चेकिंग टीम ने जब इसकी सूचना मुख्यालय तक को दे दी तब बरेली के अफसर चोरी रोकने के लिए जागे। रात में साढ़े दस बजे बरेली की चेकिंग टीम ने इसी बस में 19 यात्री बेटिकट पकड़े। इसके बाद मुख्यालय उन अधिकारियों पर भी सवाल उठे जिनकी जिम्मेदारी नियमित चेकिंग की थी। निलंबन आदेश में चेकिंग कराने में लापरवाही बरतने और परिवहन निगम को वित्तीय क्षति पहुंचाने के आरोप एआरएम राजेश कुमार पर लगाया है।
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