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Bareilly News: परसाखेड़ा आवासीय योजना में होंगे 12 सेक्टर, साइट प्लान को अंतिम रूप दे रहे अभियंता
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बरेली। लैंड पूलिंग स्कीम के तहत प्रस्तावित परसाखेड़ा आवासीय योजना में 12 सेक्टर होंगे। आवास विकास परिषद के अभियंता साइट प्लान को अंतिम रूप दे रहे हैं। योजना अब तक टियूलिया और धंतिया तक सीमित थी। नए साल में इसे हमीरपुर, वोहित, मिलक इमामगंज, बल्लिया और फरीदापुर रामचरण में विस्तार मिलेगा। इन गांवों के किसानों से सहमतिपत्र भरवाए जाएंगे।
परसाखेड़ा में 561 हेक्टेयर जमीन पर आवासीय योजना विकसित होनी है। पहले चरण में ट्यूलिया व धंतिया गांव की 149 हेक्टेयर जमीन पर योजना विकसित हो रही है। दोनों गांवों के करीब छह सौ किसानों में 240 ने भूमि देने के लिए सहमति दी है। फसल मुआवजे के लिए 142 किसानों के बैंक खाते लिए गए हैं। उन्हें जनवरी से फसल मुआवजा के रूप में पांच हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से क्षतिपूर्ति मिलेगी। इस साल के अंत तक भूखंडों का आवंटन शुरू हो जाएगा। भूखंड आवंटन के साथ ही मुआवजा बंद होगा।
आवास एवं विकास परिषद के अधिशासी अभियंता नवीन कुमार वर्मा ने बताया कि प्रस्तावित कॉलोनी के मानचित्र को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके बाद सड़क, सीवर लाइन आदि का काम शुरू कराया जाएगा। मार्च तक स्थल विकास के काम शुरू करने की तैयारी है। योजना में सबसे छोटा भूखंड 60 तो सबसे बड़ा भूखंड 2,000 वर्गमीटर का होगा। साथ ही, 105, 144, 162 ,200, 300, 450, 600, 1200 वर्गमीटर के भूखंड भी होंगे। कॉलोनी में कम से कम 7.5 और अधिकतम 45 मीटर चौड़ी सड़कों का निर्माण होगा।
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जानिए, क्या है लैंड पूलिंग स्कीम
आवास विकास परिषद और विकास प्राधिकरणों के प्रोजेक्ट्स के लिए वर्ष 2019 में प्रदेश सरकार ने लैंड पूलिंग स्कीम लागू की थी। इसमें किसान द्वारा दी गई भूमि का अधिकतम 25 फीसदी हिस्सा उसको विकसित क्षेत्र में निशुल्क मिल सकता है। इसके लिए किसान को कोई विकास शुल्क नहीं देना पड़ेगा। स्कीम से नई कॉलोनियों का विकास होगा। लैंड बैंक स्थापित करना आसान होगा। ऐसा अधिकारियों का मानना है। अमर उजाला ब्यूरो
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परसाखेड़ा में 561 हेक्टेयर जमीन पर आवासीय योजना विकसित होनी है। पहले चरण में ट्यूलिया व धंतिया गांव की 149 हेक्टेयर जमीन पर योजना विकसित हो रही है। दोनों गांवों के करीब छह सौ किसानों में 240 ने भूमि देने के लिए सहमति दी है। फसल मुआवजे के लिए 142 किसानों के बैंक खाते लिए गए हैं। उन्हें जनवरी से फसल मुआवजा के रूप में पांच हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से क्षतिपूर्ति मिलेगी। इस साल के अंत तक भूखंडों का आवंटन शुरू हो जाएगा। भूखंड आवंटन के साथ ही मुआवजा बंद होगा।
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आवास एवं विकास परिषद के अधिशासी अभियंता नवीन कुमार वर्मा ने बताया कि प्रस्तावित कॉलोनी के मानचित्र को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके बाद सड़क, सीवर लाइन आदि का काम शुरू कराया जाएगा। मार्च तक स्थल विकास के काम शुरू करने की तैयारी है। योजना में सबसे छोटा भूखंड 60 तो सबसे बड़ा भूखंड 2,000 वर्गमीटर का होगा। साथ ही, 105, 144, 162 ,200, 300, 450, 600, 1200 वर्गमीटर के भूखंड भी होंगे। कॉलोनी में कम से कम 7.5 और अधिकतम 45 मीटर चौड़ी सड़कों का निर्माण होगा।
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जानिए, क्या है लैंड पूलिंग स्कीम
आवास विकास परिषद और विकास प्राधिकरणों के प्रोजेक्ट्स के लिए वर्ष 2019 में प्रदेश सरकार ने लैंड पूलिंग स्कीम लागू की थी। इसमें किसान द्वारा दी गई भूमि का अधिकतम 25 फीसदी हिस्सा उसको विकसित क्षेत्र में निशुल्क मिल सकता है। इसके लिए किसान को कोई विकास शुल्क नहीं देना पड़ेगा। स्कीम से नई कॉलोनियों का विकास होगा। लैंड बैंक स्थापित करना आसान होगा। ऐसा अधिकारियों का मानना है। अमर उजाला ब्यूरो