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इन अवैध निर्माण को रोकने वाला कोई नहीं
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sat, 17 Sep 2016 01:36 AM IST
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पीलीभीत हाईवे पर अवैध निमाण
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केस एक- माधोबाड़ी में एक साल से तीन सौ गज से ज्यादा एरिया में कामर्शियल फैक्ट्री की बिल्डिंग बन रही है। न इस बिल्डिंग का बीडीए से नक्शा स्वीकृत है और न ही अब तक भवन मालिक पर चालान या सीलिंग की कार्रवाई हुई।
केस दो- मूर्ति नर्सिंग होम से थोड़ी दूर आगे एक और बिल्डिंग बिना नक्शा स्वीकृत कराए बन रही है। देखने से लगता है कि दुकानों का मार्केट बनवाकर किराए पर उठाने की तैयारी है। बिल्डिंग बनकर तैयार हो चुकी है। बीडीए खामोश है।
केस तीन- प्रेमनगर थाने के निकट शराब कारोबारी ग्रुप का काफी बड़े एरिया में निर्माण चल रहा है। प्राधिकरण से इसका नक्शा स्वीकृत नहीं कराया गया। बीडीए के एई और जेई इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं। निर्माण पूरा होने की ओर है। अब तक कोई कार्रवाई नहीं।
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केस चार-पीलीभीत रोड पर शरद अग्रवाल के हॉस्पिटल के पास रघुनंदन जायसवाल नाम के किसी व्यक्ति का चार मंजिला निर्माण बिना नक्शा स्वीकृत कराए पूरा हो चुका है। छह महीने से भी ज्यादा समय से निर्माण चल रहा है। एई और जेई झांकने तक नहीं आए।
शहर के हर कोने में अवैध निर्माण बीडीए के धंधे की तरह चल रहा है। बीडीए के संरक्षण में शोरूम, कांपलेक्स, दुकान, मार्केट, कालोनियां और भवन बनाए जा रहे हैं। भवन मालिक दिन में कार्रवाई के डर से निर्माण के काम नहीं करते रात में काम चलता है।
संजय नगर, पुराना शहर, सेटेलाइट से बीसलपुर चौराहा, बैरियर चौकी से प्रेमनगर, सीआईआई पार्क, माधौबाड़ी, नैनीताल रोड, सुर्खा बानखाना, मिनी बाईपास, कर्मचारी नगर, दिल्ली हाइवे के सीबीगंज एरिया के अलावा मॉडल टाउन रोड, सिविल लाइंस एरिया में प्राधिकरण से बिना नक्शा स्वीकृत कराए निर्माण चल रहे हैं। अवैध निर्माण और कंपाउंउिंग का पटल देखने वाले तीन लिपिक निर्माण के बाद कंपाउंडिंग तक की जिम्मेदारी ले लेते हैं। चौकीदार अवैध निर्माण की सूचनाएं दफ्तर में देते हैं। अफसरों की ओर से अगर किसी अनाधिकृत निर्माण पर चालान, सीलिंग या ध्वस्तीकरण कार्रवाई के आदेश किए जाते हैं तो उनकी फाइलें दब जाती है।
फिर वही रटा रटाया जवाब
अगर कोई सूचना मिलती है तो अवैध निर्माण पर प्राधिकरण के नियमानुसार चालान और सीलिंग की कार्रवाई की जाती है। मजिस्ट्रेट और पुलिस मिलने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होती है। अगर इस तरह के निर्माण चल रहे हैं तो इन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
- अजय कुमार, डिप्टी सेक्रेटरी बीडीए
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केस दो- मूर्ति नर्सिंग होम से थोड़ी दूर आगे एक और बिल्डिंग बिना नक्शा स्वीकृत कराए बन रही है। देखने से लगता है कि दुकानों का मार्केट बनवाकर किराए पर उठाने की तैयारी है। बिल्डिंग बनकर तैयार हो चुकी है। बीडीए खामोश है।
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केस तीन- प्रेमनगर थाने के निकट शराब कारोबारी ग्रुप का काफी बड़े एरिया में निर्माण चल रहा है। प्राधिकरण से इसका नक्शा स्वीकृत नहीं कराया गया। बीडीए के एई और जेई इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं। निर्माण पूरा होने की ओर है। अब तक कोई कार्रवाई नहीं।
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केस चार-पीलीभीत रोड पर शरद अग्रवाल के हॉस्पिटल के पास रघुनंदन जायसवाल नाम के किसी व्यक्ति का चार मंजिला निर्माण बिना नक्शा स्वीकृत कराए पूरा हो चुका है। छह महीने से भी ज्यादा समय से निर्माण चल रहा है। एई और जेई झांकने तक नहीं आए।
शहर के हर कोने में अवैध निर्माण बीडीए के धंधे की तरह चल रहा है। बीडीए के संरक्षण में शोरूम, कांपलेक्स, दुकान, मार्केट, कालोनियां और भवन बनाए जा रहे हैं। भवन मालिक दिन में कार्रवाई के डर से निर्माण के काम नहीं करते रात में काम चलता है।
संजय नगर, पुराना शहर, सेटेलाइट से बीसलपुर चौराहा, बैरियर चौकी से प्रेमनगर, सीआईआई पार्क, माधौबाड़ी, नैनीताल रोड, सुर्खा बानखाना, मिनी बाईपास, कर्मचारी नगर, दिल्ली हाइवे के सीबीगंज एरिया के अलावा मॉडल टाउन रोड, सिविल लाइंस एरिया में प्राधिकरण से बिना नक्शा स्वीकृत कराए निर्माण चल रहे हैं। अवैध निर्माण और कंपाउंउिंग का पटल देखने वाले तीन लिपिक निर्माण के बाद कंपाउंडिंग तक की जिम्मेदारी ले लेते हैं। चौकीदार अवैध निर्माण की सूचनाएं दफ्तर में देते हैं। अफसरों की ओर से अगर किसी अनाधिकृत निर्माण पर चालान, सीलिंग या ध्वस्तीकरण कार्रवाई के आदेश किए जाते हैं तो उनकी फाइलें दब जाती है।
फिर वही रटा रटाया जवाब
अगर कोई सूचना मिलती है तो अवैध निर्माण पर प्राधिकरण के नियमानुसार चालान और सीलिंग की कार्रवाई की जाती है। मजिस्ट्रेट और पुलिस मिलने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होती है। अगर इस तरह के निर्माण चल रहे हैं तो इन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
- अजय कुमार, डिप्टी सेक्रेटरी बीडीए