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ऐसे तो नहीं हो सकता देवबंदियों से इत्तेहाद
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sun, 15 May 2016 01:48 AM IST
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बीबी जी मस्जिद बिहारीपुर स्थित दारुल उलूम मजहरे इस्लाम के मुफ्ती उबैदुर्रहमान ने कहा है कि हमें कुराने मुकद्दस और अपने बुजुर्ग की पैरवी करना चाहिए। उससे हटना किसी भी तरह दुरुस्त नहीं।
उन्होंने कहा कि हजरते इब्राहिम का इत्तेहाद नमरूद से नहीं हुआ, हजरत मूसा का इत्तेहाद फिरौनीयों से नहीं हुआ, नबी अखीरुल जमा का इत्तेहाद अबू जहल और अबू लहब से नहीं हुआ, हजरते आली मुकाम इमाम हुसैन का इत्तेहाद यजीदियों से नहीं हुआ, आला हजरत और मुफ्तिए आजम हिंद का इत्तेहाद बातिल फिरकों से नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बातिल फिरकों से हमारा इत्तेहाद उस वक्त तक नहीं हो सकता जब तक फतवा उल्माए हरमैन की तस्दीक न हो। उसकी हर्फ ब हर्फ तस्दीक हो तो इत्तेहाद खुद ही कायम हो जायेगा। न कहीं जाने की जरूरत है न कुछ कहने की। जुल्मों ज्यादती और दहशतगर्दी के खिलाफ हर आदमी को आवाज उठाने का हक है। अपने-अपने प्लेटफार्म से सब उसके खिलाफ आवाज उठाएं ये बहुत काफी है।
तौकीर मियां के मुद्दे पर शरई फैसला दो दिन बाद
सुब्हानी मियां के निवास पर मुफ्तियों ने देवबंद जाने के मुद्दे पर की मौलाना से पूछताछ
आईएमसी मुखिया मौलाना तौकीर रजा खां के देवबंद दारुल उलूम जाने के पर मुद्दे पर शनिवार को आला हजरत दरगाह के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) ने निवास पर शरई मजलिस का आयोजन हुआ। मुफ्तियों के पैनल ने मौलाना तौकीर से बंद कमरे में पूछताछ की और फैसला सुरक्षित कर लिया गया है। इसका खुलासा दो दिन बाद होगा।
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सुब्हानी मियां ने मुफ्तियों से पहले ही साफ कर दिया कि वह यह बिल्कुल न सोचें की तौकीर मेरे भाई हैं या खानदान आला हजरत के सदस्य। जो पूछना है साफ तौर पर पूछें। वहीं तौकीर मियां ने भी कह दिया कि मुफ्तियाने इकराम को पूरी स्वतंत्रता है वह जो भी फैसला करेंगे मानूंगा।
सुब्हानी मियां और सज्जादानशीन मौलाना अहसन रजा खां की ओर से बनाए गए मुफ्तियों के पैनल ने पहले मौलाना तौकीर पर लगे इल्जामों को लिखा। इसी के अनुसार सवाल बने कि वह देवबंद कैसे गए, क्यों गए, क्या बात हुई आदि। इन बिंदुओं पर तहरीर बनी फिर मौलाना तौकीर का बयान लिया गया। इसके बाद बयान पर जिरह (बहस) की गई। मौलाना तौकीर ने भी बहुत बेबाकी के साथ अपनी बात रखी और तर्क भी दिए।
पैनल में मुफ्ती मोहम्मद आजम नूरी, मुफ्ती मोहम्मद स्वालेह रजवी, मुफ्ती मोहम्मद शमशाद हुसैन रजवी (बदायूं), मुफ्ती मोहम्मद हनीफ खां रजवी, बहेड़ी के शहर इमाम अल्लामा काजी मुख्तार अहमद कादरी, मुफ्ती सगीर अहमद जोखनपुरी, मुफ्ती सगीर अख्तर शामिल रहे। मौलाना तौकीर के जाने के बाद तय किया गया कि मुफ्तियाने इकराम हुक्म शरई हवाले से अपने-अपने फैसले सुब्हानी मियां को बंद लिफाफे में रविवार को सौंपेंगे।
दरगाह प्रवक्ता मुफ्ती सलीम नूरी ने बताया कि दो दिन बाद अगली बैठक में लिफाफे खोले जाएंगे फिर इसकी तस्दीक कराई जाएगी। इसमें कुछ बाहरी उलमा के शामिल होने की भी उम्मीद है। इन सभी की शरई राय और तस्दीक के बाद फैसला जारी किया जाएगा। इस मजलिस में दरगाह से जुड़े मुफ्ती मोहम्मद आकिल, मुफ्ती सय्यद कफील अहमद, मुफ्ती मोहम्मद अय्यूब खां नूरी आदि मौजूद रहे।
तौकीर का कदम वक्त की जरूरत
मुबल्लिग सय्यद राशिद ने कहा देवबंद उनकी रहनुमाई में साथ है
दारुल उलूम देवबंद के मुबल्लिग सैयद मोहम्मद राशिद ने कहा कि मौलाना तौकीर रजा खां ने वक्त की जरूरत के हिसाब से मुत्तहिद होने का जो फैसला लिया है वह काबिले तारीफ है। जो मौजूदा हालत हैं उसमें सभी मुसलमानों को एक होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मौलाना तौकीर की गलत मुखालफत कर रहे हैं। ऐसे लोगों को वक्त के तकाजे का ख्याल नहीं है।
नगर के कासिम उल उलूम मदरसे में पत्रकारो से बातचीत के दौरान सैयद मोहम्मद राशिद ने कहा कि मुसलमानों की हिमायत के लिए दारूल उलूम देवबंद ही सामने आता है। कोई भी तंजीम मुसलमानों के लिए काम नहीं कर रही है। आतंकवाद के नाम पर फांसे जाने वाले बेगुनाह लोगों को बचाने के लिए कोई तंजीम काम नहीं करती दारूल उलूम देवबंद ही ऐसे लोगों की पैरवी करती है।
उन्होंने कहा कि जब मौलाना तौकीर रजा को दंगे में फंसाया गया तब किसी के कहने के बगैर दारूल उलूम देवबंद से खुद सरकार को पत्र भेजकर उनको छुड़ाने की पैरवी की थी। उन्होंने कहा कि मरकज में जो लोग मौलाना तौकीर रजा के देवबंद जाने पर ऐतराज कर रहे हैं वह उनके परिवार का आपस का मामला है। उन्होंने कहा कि मौलाना तौकीर रजा अगर लोगों को मुत्तहिद करना चाह रहे हैं तो पूरा देवबंद उनकी रहनुमाई में उनके साथ है। उन्होंने कहा कि दारूल उलूम देवबंद इंसानियत का पैगाम देता है और हिंदू सिख ईसाई बौध जैन सबको साथ लेकर चलने की पैरवी करता है। इस मौके पर मौलाना मोहम्मद आरिफ, नदीम बबलू, हाफिज एहतशाम, सलीम अहमद, मोहम्मद तैय्यब, मो नाजिम, इंतयाज अहमद आदि थे।
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उन्होंने कहा कि हजरते इब्राहिम का इत्तेहाद नमरूद से नहीं हुआ, हजरत मूसा का इत्तेहाद फिरौनीयों से नहीं हुआ, नबी अखीरुल जमा का इत्तेहाद अबू जहल और अबू लहब से नहीं हुआ, हजरते आली मुकाम इमाम हुसैन का इत्तेहाद यजीदियों से नहीं हुआ, आला हजरत और मुफ्तिए आजम हिंद का इत्तेहाद बातिल फिरकों से नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बातिल फिरकों से हमारा इत्तेहाद उस वक्त तक नहीं हो सकता जब तक फतवा उल्माए हरमैन की तस्दीक न हो। उसकी हर्फ ब हर्फ तस्दीक हो तो इत्तेहाद खुद ही कायम हो जायेगा। न कहीं जाने की जरूरत है न कुछ कहने की। जुल्मों ज्यादती और दहशतगर्दी के खिलाफ हर आदमी को आवाज उठाने का हक है। अपने-अपने प्लेटफार्म से सब उसके खिलाफ आवाज उठाएं ये बहुत काफी है।
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तौकीर मियां के मुद्दे पर शरई फैसला दो दिन बाद
सुब्हानी मियां के निवास पर मुफ्तियों ने देवबंद जाने के मुद्दे पर की मौलाना से पूछताछ
आईएमसी मुखिया मौलाना तौकीर रजा खां के देवबंद दारुल उलूम जाने के पर मुद्दे पर शनिवार को आला हजरत दरगाह के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) ने निवास पर शरई मजलिस का आयोजन हुआ। मुफ्तियों के पैनल ने मौलाना तौकीर से बंद कमरे में पूछताछ की और फैसला सुरक्षित कर लिया गया है। इसका खुलासा दो दिन बाद होगा।
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सुब्हानी मियां ने मुफ्तियों से पहले ही साफ कर दिया कि वह यह बिल्कुल न सोचें की तौकीर मेरे भाई हैं या खानदान आला हजरत के सदस्य। जो पूछना है साफ तौर पर पूछें। वहीं तौकीर मियां ने भी कह दिया कि मुफ्तियाने इकराम को पूरी स्वतंत्रता है वह जो भी फैसला करेंगे मानूंगा।
सुब्हानी मियां और सज्जादानशीन मौलाना अहसन रजा खां की ओर से बनाए गए मुफ्तियों के पैनल ने पहले मौलाना तौकीर पर लगे इल्जामों को लिखा। इसी के अनुसार सवाल बने कि वह देवबंद कैसे गए, क्यों गए, क्या बात हुई आदि। इन बिंदुओं पर तहरीर बनी फिर मौलाना तौकीर का बयान लिया गया। इसके बाद बयान पर जिरह (बहस) की गई। मौलाना तौकीर ने भी बहुत बेबाकी के साथ अपनी बात रखी और तर्क भी दिए।
पैनल में मुफ्ती मोहम्मद आजम नूरी, मुफ्ती मोहम्मद स्वालेह रजवी, मुफ्ती मोहम्मद शमशाद हुसैन रजवी (बदायूं), मुफ्ती मोहम्मद हनीफ खां रजवी, बहेड़ी के शहर इमाम अल्लामा काजी मुख्तार अहमद कादरी, मुफ्ती सगीर अहमद जोखनपुरी, मुफ्ती सगीर अख्तर शामिल रहे। मौलाना तौकीर के जाने के बाद तय किया गया कि मुफ्तियाने इकराम हुक्म शरई हवाले से अपने-अपने फैसले सुब्हानी मियां को बंद लिफाफे में रविवार को सौंपेंगे।
दरगाह प्रवक्ता मुफ्ती सलीम नूरी ने बताया कि दो दिन बाद अगली बैठक में लिफाफे खोले जाएंगे फिर इसकी तस्दीक कराई जाएगी। इसमें कुछ बाहरी उलमा के शामिल होने की भी उम्मीद है। इन सभी की शरई राय और तस्दीक के बाद फैसला जारी किया जाएगा। इस मजलिस में दरगाह से जुड़े मुफ्ती मोहम्मद आकिल, मुफ्ती सय्यद कफील अहमद, मुफ्ती मोहम्मद अय्यूब खां नूरी आदि मौजूद रहे।
तौकीर का कदम वक्त की जरूरत
मुबल्लिग सय्यद राशिद ने कहा देवबंद उनकी रहनुमाई में साथ है
दारुल उलूम देवबंद के मुबल्लिग सैयद मोहम्मद राशिद ने कहा कि मौलाना तौकीर रजा खां ने वक्त की जरूरत के हिसाब से मुत्तहिद होने का जो फैसला लिया है वह काबिले तारीफ है। जो मौजूदा हालत हैं उसमें सभी मुसलमानों को एक होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मौलाना तौकीर की गलत मुखालफत कर रहे हैं। ऐसे लोगों को वक्त के तकाजे का ख्याल नहीं है।
नगर के कासिम उल उलूम मदरसे में पत्रकारो से बातचीत के दौरान सैयद मोहम्मद राशिद ने कहा कि मुसलमानों की हिमायत के लिए दारूल उलूम देवबंद ही सामने आता है। कोई भी तंजीम मुसलमानों के लिए काम नहीं कर रही है। आतंकवाद के नाम पर फांसे जाने वाले बेगुनाह लोगों को बचाने के लिए कोई तंजीम काम नहीं करती दारूल उलूम देवबंद ही ऐसे लोगों की पैरवी करती है।
उन्होंने कहा कि जब मौलाना तौकीर रजा को दंगे में फंसाया गया तब किसी के कहने के बगैर दारूल उलूम देवबंद से खुद सरकार को पत्र भेजकर उनको छुड़ाने की पैरवी की थी। उन्होंने कहा कि मरकज में जो लोग मौलाना तौकीर रजा के देवबंद जाने पर ऐतराज कर रहे हैं वह उनके परिवार का आपस का मामला है। उन्होंने कहा कि मौलाना तौकीर रजा अगर लोगों को मुत्तहिद करना चाह रहे हैं तो पूरा देवबंद उनकी रहनुमाई में उनके साथ है। उन्होंने कहा कि दारूल उलूम देवबंद इंसानियत का पैगाम देता है और हिंदू सिख ईसाई बौध जैन सबको साथ लेकर चलने की पैरवी करता है। इस मौके पर मौलाना मोहम्मद आरिफ, नदीम बबलू, हाफिज एहतशाम, सलीम अहमद, मोहम्मद तैय्यब, मो नाजिम, इंतयाज अहमद आदि थे।