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हाईकोर्ट ने पशु आहार वाली नमकीन पर कड़े तेवर दिखाए तो सिस्टम को पांच साल पुराने मुद्दे याद आए

Sun, 01 Mar 2020 02:39 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 01 Mar 2020 02:39 AM IST
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five-year-old issues when the High Court showed strong attitude towards the animal food snacks.
सैंपल लेते खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला, बरेली

बिस्कुट, सरसों तेल, बेकरी आइटम, आटा नूडल्स, मैदा समेत कई बड़े ब्रांडों पर भी जुर्माना
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पांच साल पुराने करीब 30 मामलों को सिर्फ दो तारीखों में निपटाया, पनीर, दूध, गुटखा, हल्दी,

बरेली। चाहे आम लोगों की सेहत से जुड़ा मामला हो या फिर जिंदगी से, सरकारी सिस्टम के काम करने का अपना ही ढंग है। मिलावट के केसों की जिन फाइलों पर अफसरों ने बरसों से हाथ नहीं लगाया था, हाईकोर्ट के रिजेक्टेड नमकीन को बाजार में उतारे जाने पर सख्ती दिखाते ही उन पर धड़ाधड़ कार्रवाई शुरू हो गई। 27 फरवरी को हाईकोर्ट का आदेश आने के सिर्फ दो दिन बाद प्रशासन ने मीडिया से जानकारी साझा कि मिलावट के पांच साल तक पुराने 30 मामले निपटा दिए गए हैं। इन मामलों में जारी आदेश की शक्ल में प्रशासन का यह दावा मीडिया के हाथों में पहुंचा तो इस पर सवाल उठ गए कि फरवरी की ही दो तारीखों में इतने ज्यादा मामले आखिर कैसे निपटा दिए गए।
हैरत इस बात पर भी जताई जा रही है कि एफएसडीए की 13 सदस्यीय जिलास्तरीय टीम ने महीनों से शहर में मिलावट रोकने की अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए शहर में एक भी कार्रवाई नहीं की। होली का सीजन शुरू होने के बावजूद ज्यादातर अफसर दफ्तरों में ही व्यापारियों को बुलाकर उनसे मिलने में मशगूल थे। कुछ अफसर दिवाली की तरह होली के ऐन मौके पर छुट्टी भी जा चुके थे लेकिन हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर के बरेली में अमर उजाला में छपी बड़ी कंपनियों की रिजेक्टेड नमकीन को पशु आहार के नाम से नीलामी में खरीदकर उसे मिक्सचर और नवरत्न नमकीन के नाम से मार्केट में उतारे जाने की खबर को गंभीरता से लेकर खुद ही जनहित याचिका कायम कराते ही सरकारी मशीन हरकत में आ गई। शुक्रवार को एफएसडीए की जनपदीय टीम ने ताबड़तोड़ छापे मारे तो शनिवार को प्रशासन के पास पांच सालों तक से लंबित 30 मामलों को एक साथ निपटा दिए जाने की खबर आ गई।
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प्रशासन ने जो ब्योरा मीडिया के साथ साझा किया है, उसके मुताबिक उसकी अदालतों में इन सभी 30 मामलों को सिर्फ तीन और 17 फरवरी की दो तारीखों में निपटाया गया है। हालांकि इन मामलों में ज्यादातर दूधियों से संबंधित हैं। दूध और पनीर के नमूने फेल होने के बाद ये मामले एडीएम की कोर्ट में भेजे गए थे लेकिन वहां फाइलों में दबकर रह गए थे। कुछ मामलों में तो सालों से एक भी तारीख नहीं लगी। अब इनकों एक साथ निपटा दिया गया। प्रशासन के एकाएक तेजी पकड़ने का एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट की ओर से रिजेक्टेड नमकीन के मामले में अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी तलब किए जाने के बाद राज्य सरकार की ओर से सभी जिलों के खाद्य सुरक्षा विभाग से मिलावट के मामलों में कार्रवाई का रिकॉर्ड तलब किया गया है। इसी के बाद प्रशासन में अफरातफरी मची हुई है। सालों से गहरी नींद में सो रहा सिस्टम इसके बाद कागजी खानापूरी में जुटा हुआ है।
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दूध-पनीर में मिलावट के सबसे ज्यादा केस फिर भी इस बार सैंपलिंग नहीं

प्रशासन ने सालों से लंबित पड़े जो 30 केस पिछली दो तारीखों में ही निपटा दिए, उनमें ज्यादातर दूध और पनीर में मिलावट के थे। एफएसडीए की टीम ने शहर के बाजार में दूध-पनीर की सैंपलिंग करने के बजाय गांव-देहात से दूध लाने वाले दूधियों को रास्ते में पकड़कर ये सैंपल लिए थे जो जांच में फेल हो गए थे। इसके बाद इन मामलों को एडीएम कोर्ट भेज दिया गया था। गांवों से आने वाले दूध-पनीर में मिलावट के इतने ज्यादा मामले होने के बावजूद एफएसडीए की टीमों ने शहर में उन दुकानों पर एक भी छापा नहीं मारा जिनके जरिये ये दोनों चीजें आम लोगों तक पहुंचती हैं। इस बार तो एफएसडीए ने दूध में मिलावट रोकने के लिए कोई अभियान ही नहीं चलाया जबकि जिला दुग्ध संघ के आंकड़े ही दूध में मिलावट की कहानी साफ बयां कर रहे हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक जिले भर में सिर्फ एक लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है जबकि मांग दो लाख लीटर से ज्यादा की है। दूध की यह मांग उसमें मिलावट और सिंथेटिक दूध की आपूर्ति करके ही पूरी की जाती है।

खोखे वालों पर एक्शन पर कंपनी वालों को छोड़ा

प्रशासन की ओर से निपटाया गया एक मामला गगन रॉयल गुटखे का भी है जिसका नमूना किसी खोखे से लिया गया था। यह नमूना फेल होने के बाद खोखा चलाने वाले पर 15 हजार रुपये का जुर्माना डाला गया है। लेकिन एफएसडीए ने इसके बाद न तो गगन रॉयल गुटखा बनाने वाली कंपनी को कोई नोटिस जारी किया न उसके स्थानीय डीलर के यहां छापा मारा।

पांच जगहों से 12 नमूने भरे

एफएसडीए टीमों ने दूसरे दिन भी छापेमारी जारी रखी। जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा ने अपने निर्देशन में चार टीमों से शनिवार सुबह से शाम तक अभियान चलवाया। छापा टीमों ने गुलाटी स्वीट्स से पनीर, खोया, मून डेयरी संजयनगर से पनीर, खोया, आनंद उदय स्वीट्स किला से सोनपपड़ी, अग्रवाल डिपार्टमेंटल स्टोर सुभाषनगर से रंगीन कचरी, किशमिश, परसाखेड़ा से सोया पफ, मक्का, सूजी, सीबी गंज से दो नमूने दूध के भरे हैं। वीरेंद्र द्विवेदी खाद्य अधिकारी आदि शामिल रहे।
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