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भीड़ के हिसाब से नहीं थे सुरक्षा इंतजाम, बड़े बवाल से बच गया शहर

Tue, 05 Oct 2021 02:27 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 05 Oct 2021 02:27 AM IST
सार

बेहद सीमित तादाद में जायरीन को उर्स में शामिल होने की थी सहमति, इकट्ठी हुई हजारों की भीड़, अब अफसर कर रहे गोलमोल
 

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The security arrangements were not according to the crowd, the city was saved from the big uproar
नाराज लोगों को समझाती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

विस्तार

बरेली। उर्स-ए-रजवी के कुल में जिस तरह हद से ज्यादा जायरीन की भीड़ इकट्ठी हुई, उसके हिसाब से पुलिस-प्रशासन ने शहर में सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए थे। श्यामगंज में पथराव के साथ कई और जगह पुलिस और जायरीन के बीच हुई झड़पों से पैदा हुई बड़े बवाल आशंका ने पूरे शहर को डरा दिया। उर्स में कितने लोगों को शामिल होने की अनुमति थी और पहले ही दिन से भीड़ बढ़ने के बावजूद क्यों नहीं जरूरी इंतजाम किए गए, इस पर अब कोई कुछ नहीं बोल रहा।
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जिला प्रशासन के साथ सहमति के बाद कोरोना के मद्देनजर इस बार भी उर्स-ए-रजवी ऑनलाइन होना तय हुआ था। दरगाह की ओर से कई बार अपील भी जारी की गई थी कि लोग अपने घरों में ही उर्स मनाएं। इसके बावजूद पहले ही दिन हजारों लोग आ गए। सड़कों पर उन्हें रोका भी नहीं गया। दूसरे दिन भीड़ और बढ़ी और जायरीन की तादाद 20 हजार के भी पार निकल गई, तब भी किसी ने कोई फिक्र नहीं की। रात को भीड़ और बढ़ी। सोमवार को यह नौबत आ गई कि दोपहर को इस्लामिया ग्राउंड पूरी तरह भर गया और भीड़ सड़कों पर उमड़ने लगी।
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इसके बाद पुलिस प्रशासन में खलबली मची। भीड़ को रोकने का प्रयास शुरू हुआ तो जगह-जगह टकराव की नौबत आ गई। जायरीन का कहना था कि उन्हें शहर में आने से कहीं नहीं रोका गया, लेकिन जब वे इस्लामिया मैदान के पास आ गए हैं तो उनका रोका जा रहा है। सीबीगंज, भोजीपुरा, कैंट आदि तमाम रास्तों से लोग शहर में आ गए, लेकिन उन्हें कहीं नहीं रोका गया। अगर रोका जाता तो शहर में हजारों की भीड़ इकट्ठी ही नहीं होती। (संवाद)
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बेपरवाही : पुलिस चौकी पर बैठकर लाइव देखते रहे

ऐसा नहीं कि सब कुछ अकस्मात हुआ हो। इस्लामिया मैदान के ठीक सामने बिहारीपुर पुलिस चौकी है। मैदान में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। अंदर चौकी में बैठकर पुलिस अफसर स्क्रीन पर मैदान के अंदर का हाल देखते रहे। तीन दिनों में बिहारीपुर चौकी पर पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी आकर बैठे। लिहाजा यह कहने की कोई गुंजाइश नहीं है कि अफसरों को भीड़ आने का पता नहीं था।

लाठीचार्ज में घायल हुईं स्कूल की शिक्षिका

शहर में सोमवार को हुए घटनाक्रम की चपेट में आम लोग भी आ गए। शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल की शिक्षिका एक अन्य महिला के साथ दोपहर करीब एक बजे अपने घर जाने के लिए पटेल चौक की तरफ से गुजरीं। दरअसल, उनका घर इस्लामिया स्कूल के पास था। पटेल चौक के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसी दौरान जायरीन की भीड़ बढ़ी तो पुलिस ने लाठियां फटकारनी शुरू कर दीं। मुंह पर लाठी लगने से शिक्षिका घायल हो गईं। खून बहने लगा। वह रोते हुए किनारे खड़ी हो र्गइं। बाद में भीड़ कम हुई तो वह घर पहुंचीं।

सौ की अनुमति थी या ज्यादा की अफसरों के अलग-अलग बयान

एसपी सिटी रविंद्र कुमार का कहना है कि उर्स में सौ लोगों के शामिल होने की ही अनुमति थी, लेकिन अब भीड़ आ गई तो क्या कर सकते हैं। कितनी भीड़ थी, इस सवाल पर बोले- सौ से तो ज्यादा ही लोग थे। आईजी रमित शर्मा पीलीभीत थे। उन्होंने कहा इस बारे में एसएसपी बरेली ही बता सकते हैं। सीओ प्रथम और थर्ड ने भी फोन नहीं उठाया।

एसएसपी रोहित सिंह सजवाण का कहना था कि परमीशन सौ लोगों की नहीं थी। मैदान की क्षमता के हिसाब से परमीशन थी। पुलिस ने अनुमान लगाया था कि इस्लामिया मैदान में आठ-दस हजार और पांच-छह हजार लोग मथुरापुर में आएंगे लेकिन इस्लामिया मैदान में उम्मीद से ज्यादा भीड़ आ गई।

डीएम नितीश कुमार ने कहा कि सभी के सहयोग से शांतिपूर्ण ढंग से उर्स की नमाज अदा हुई। कुछ जगहों पर लोगों ने उपद्रव करने का प्रयास किया मगर उस पर तत्काल काबू कर लिया गया।

सज्जादानशीन ने जताया अफसोस, आरएसी युवा अध्यक्ष बोले- प्रशासन की लापरवाही

दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी अहसन मियां ने घटनाक्रम पर अफसोस जताते हुए कहा कि दरगाह से ऑनलाइन उर्स मनाने की अपील की गई थी। डीएम के साथ हुई दरगाह के प्रतिनिधिमंडल की बैठक में तय हुआ था कि कोविड गाइड लाइन के मुताबिक सीमित संख्या में उर्स मनाया जाएगा। वैसी ही तैयारियां की गई थीं। इसी बीच शासन की नई गाइड लाइन जारी हुई जिसमें कहा गया कि खुले मैदान में संख्या की बाध्यता हटा ली गई है, इसी वजह से भ्रम पैदा हुआ। यह प्रेस विज्ञाप्ति टीटीएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य परवेज नूरी की ओर से जारी की गई है।
ऑल इंडिया रजा एक्शन कमेटी के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नबीरे आला हजरत मौलाना अब्दुल्लाह रजा कादरी ने कहा कि जो इस बार हुआ, वह पुलिस की लापरवाही और जायरीन का उत्पीड़न है। जब प्रदेश में कहीं पाबंदी नहीं है तो अकीदतमंदों को क्यों रोका गया। अगर ट्रैफिक डायवर्जन किया था तो इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि इस बार ऐसा क्या हुआ कि पुलिस प्रशासन स्थिति का अंदाजा नहीं हो सका।

दूसरे जिलों से मंगाते थे फोर्स इस बार कुछ भी नहीं किया

आम दिनों में आला हजरत के उर्स में लाखों जायरीन शामिल होते रहे हैं। इसी वजह से पुलिस प्रशासन व्यवस्था करता है। दूसरे जिलों से भी फोर्स मंगवाई जाती रही है। कोरोना के चलते इस बार भी ऑनलाइन उर्स का कार्यक्रम जारी किया गया था। तय हुआ था कि उर्स स्थल इस्लामिया मैदान में सौ से ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं होंगे। इसके लिए पास की भी व्यवस्था की गई थी। बावजूद इसके पहले ही दिन से ढील दी जाती रही। शनिवार को पहले दिन जायरीन की संख्या ज्यादा नहीं रही, लेकिन रविवार रात को हजारों की भीड़ जुट गई।
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