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Bareilly News: रिकॉर्ड में चकाचक, हकीकत में सात साल से लंबित है वरासत

Sun, 01 Feb 2026 02:01 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Sun, 01 Feb 2026 02:01 AM IST
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The records are clear, but in reality the inheritance is pending for seven years
बरेली। राजस्व विभाग के आंकड़ों में वरासत का कोई मामला लंबित नहीं है, जबकि हकीकत ये है कि इसके लिए कोई सात साल से तो कोई इससे भी अधिक समय से लेखपाल और तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहा है। इसका खुलासा 16 जनवरी को डीएम की ओर से सभी तहसीलों के एसडीएम को लिखे गए पत्र से हुआ है।
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पत्र में डीएम ने लिखा है कि जीरो पॉवर्टी में चयनित 31 किसानों को सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल पाया है। उनके नाम खतौनी पर चढ़ गए हैं, पर अंश निर्धारण नहीं हुआ है। इसलिए उनकी फॉर्मर रजिस्ट्री भी नहीं हो पा रही है। कई किसानों की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों के नाम वरासत दर्ज नहीं है। उनके आवेदन तहसील स्तर पर लंबित हैं। कुछ किसानों के नाम खतौनी और आधार के विवरण से मिसमैच हैं। करीब 11 हजार किसानों को सम्मान निधि इसलिए नहीं मिल पा रही है क्योंकि उनका ई-केवाईसी पूर्ण होकर अप्रूवल के लिए लेखपाल स्तर पर लंबित है।
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नवाबगंज तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत बरखना हरचंदपुर के मजरा भीकमपुर निवासी राम गोपाल ने बताया कि उनके पिता रामदास की मृत्यु 27 अगस्त 2019 को हुई थी, पर दो एकड़ जमीन की वरासत अब तक नहीं हो पाई है। इसलिए उन्हें सम्मान निधि भी नहीं मिल पा रही है। रामगोपाल ने बताया कि परिवार पालने के लिए उन्हें किसानी के साथ मजदूरी भी करनी पड़ती है। उन्हें दो बहन की शादी भी करनी है। खुद के एक बेटा और बेटी है। कई बार तहसील गए, लेखपाल से भी मिले पर अब तक वरासत दर्ज नहीं हो सकी।
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बहेड़ी तहसील के खजुरिया गांव के अमर सिंह के पिता जयलाल की मृत्यु 20 जनवरी 2024 को हो गई थी। पिता के नाम की छह बीघे जमीन चार भाइयों के नाम वरासत होनी है। अमर सिंह ने बताया कि दो बार लेखपाल से मिल चुके हैं। लेखपाल वरासत कर देने की बात कहकर मामले को टाल देते हैं। दो-तीन बार छोटा भाई प्रदीप भी तहसील जा चुका है, लेकिन अभी तक न जमीन की वरासत हो सकी है, न ही सम्मान निधि मिलनी शुरू हुई है। अमर सिंह ने बताया कि वह चारों भाई मेहनत-मजदूरी कर परिवार का खर्च चला रहे हैं।
ब्लॉक रामनगर के गांव रेवती की ओमवती, फतेहगंज पश्चिमी के लोहार नगला की रुकसाना, शेरगढ़ ब्लाॅक के गांव दुनका की बेलावती और गहलुइया के अक्कन खां के नाम खतौनी पर अंकित हैं, लेकिन उनका अंश निर्धारित नहीं है। दमखोदा ब्लाॅक के माधौपुर के मेवाराम, करनपुर के मुकेश कुमार, गोपालपुर के लालाराम, मंगदपुर के राजीव कुमार व हीरा लाल के भी हिस्से की जमीन का अंश निर्धारण नहीं हुआ है। क्यारा ब्लॉक के गांव हिंडोलिया भोलापुर की सुशीला देवी के आधार व खतौनी के विवरण में मिसमैचिंग है। इससे इनकी फॉर्मर रजिस्ट्री भी अटकी हुई है। ये सभी 11 लोग सत्यापन में सम्मान निधि के लिए पात्र पाए जा चुके हैं।
फतेहगंज पश्चिमी के मंधौली के राम सिंह, भदपुरा के परसरामपुर गांव के इसरार, नवी हुसैन, बरखना हरचंदपुर के राम गोपाल, फरीदपुर के खानपुरा की नेमवती और गोपालपुर के नरेश मौर्य जमीन की वरासत के लिए कई वर्ष से तहसील की दौड़ लगा रहे हैं। नवाबगंज ब्लाॅक के शाहपुर इनायतुल्लाह निवासी हरीश कुमार, हाफिजगंज की सलमा, दमखोदा के खुजरिया के अमर सिंह भी लेखपाल-कानूनगो के पास चक्कर काट रहे हैं।

वर्जन
वरासत और अंश निर्धारण न होने एवं आधार व खतौनी के विवरण में मिसमैचिंग से प्रभावित किसानों की सूची तहसीलों को भेजी है। इनके विवरण दुरुस्त होने पर ही उन्हें पीएम सम्मान निधि से लाभान्वित किया जा सकेगा। - हिमांशु पांडेय, उप निदेशक कृषि
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