फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   The ponds are shrinking, even the Yaksha Sarovar's thirst is not being quenched.

Bareilly News: सिमट रहे ताल-तलैया, यक्ष सरोवर की भी नहीं बुझ रही प्यास

Fri, 02 Feb 2024 04:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 02 Feb 2024 04:00 AM IST
विज्ञापन
The ponds are shrinking, even the Yaksha Sarovar's thirst is not being quenched.
बरेली। हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाने वालीं आर्द्रभूमि (वेटलैंड) का वजूद सिमट रहा है। ताल, सिकुड़कर तलैया हो गए हैं। तलैया को पाटकर लोगों ने खेत व मकान बना लिए हैं। महाभारत कालीन यक्ष सरोवर (लीलौर झील) भी प्यासा है। बढ़ती जनसंख्या का दबाव आर्द्रभूमि को निगलता जा रहा है। जो तालाब आदि बचे हैं, वे भी अपना वजूद बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नतीजा, जलीय वनस्पतियों व जीवों के वास स्थान खत्म हो रहे हैं। चरिंदे और परिंदे भी परेशान हो रहे हैं। इसके बाद भी आर्द्रभूमि को बचाने के लिए ठोस पहल नहीं की जा रही है।
विज्ञापन


दो साल पहले आईआईटी कानपुर की ओर से जिले में आर्द्रभूमि की मैपिंग कराई गई थी। तब ढाई एकड़ से बड़े 275 वेटलैंड पाए गए थे। अब इनमें से छोटे स्तर के ज्यादातर वेटलैंड खत्म हो चुके हैं। बड़े तालाबों का दायरा भी लगातार कम हो रहा है। विदेशी परिंदों के कलरव से गुलजार रहने वाली महाभारतकालीन लीलौर झील का भी अधिकतर हिस्सा सूख चुका है। इस वजह से यहां साल दर साल प्रवासी पक्षियों की आमद कम हो रही है। कई तरह के जलीय जीवों व वनस्पतियों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है।
विज्ञापन


वेटलैंड को खत्म करने में शहर के साथ गांव भी पीछे नहीं हैं। कई गांव में किसानों ने अपने खेत का दायरा बढ़ाने के लिए इन्हें सिकोड़ दिया है। वेटलैंड के बड़े हिस्से पर खेती की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसलिए जरूरी है आर्द्रभूमि का संरक्षण
बरेली कॉलेज में भूगोल विभाग के प्रभारी डॉ. अक्षय कुमार शुक्ला ने बताया कि वेटलैंड के सिकुड़ने का बड़ा कारण वनों का कटाव, वर्षा में कमी और तापमान में बढोत्तरी के साथ बढ़ती जनसंख्या भी है। आर्द्रभूमि हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा हैं। यह कई तरह के जीवों व वनस्पतियों का घर हैं। प्रवासी पक्षियों के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं। इनके खत्म होने से पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ जाएगा। इस वजह से इनका संरक्षण जरूरी है।


भू-जलस्तर को भी रोकने में सक्षम

जिले के अधिकतर हिस्सों में भू-जलस्तर तेजी से गिर रहा है। वेटलैंड का संरक्षण कर हम इसे रोक सकते हैं। ये बारिश के पानी को संचित करते हैं। बाद में यह पानी भू-जलस्तर को रिचार्ज करता है। ये प्रकृति के जलचक्र को संतुलित करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed