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न आपरेशन कराएंगे, न खून  देंगे, चाहे गर्भवती मर जाए

Thu, 19 Jan 2017 01:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Thu, 19 Jan 2017 01:51 AM IST
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The operation will not, not blood Will die, whether pregnant
दान के रक्त से बचती है दूसरों की जान - फोटो : Amar Ujala
पति और तीमारदारों की जिद गर्भवती महिलाओं के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है। जिला अस्पताल में प्रसव के लिए आईं दो महिलाआें को उनके पति और घरवाले इसलिए लौटा ले गए क्याेंकि वे आपरेशन नहीं कराना चाहते थे। उनका कहना था कि जब दर्द शुरू होगा तब फिर ले आएंगे। इनमें से एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाने का बात कह रहा था। डॉक्टरों ने दोनाें परिवाराें से उनका निर्णय लिखवाकर हस्ताक्षर करवा लिए हैं। 
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जिला महिला अस्पताल में भर्ती हुई सीबीगंज दौली मुरुपुरा गांव के ओमप्रकाश की 25 वर्षीय पत्नी सावित्री को प्रसव पीड़ा दो दिन से हो रही है। नार्मल डिलीवरी न हो सकने की बात डॉक्टर पहले ही महिला के पति ओमप्रकाश को बता चुके हैं, लेकिन ओमप्रकाश सामान्य प्रसव से ही बच्चा चाहता है। उसका कहना है कि पहला बच्चा आपरेशन से हुआ था, वह दूसरा बच्चा आपरेशन से नहीं चाहता। उसकी डॉक्टरों से काफी झिकझिक भी हुई, बाद में वह पत्नी को वापस ले गया। 
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दूसरा मामला कौसर से जुड़ा है। कौसर का बच्चा नाल में फंस गया है और धड़कन भी ढूंढे नहीं मिल रही है। डॉक्टराें ने उसके पति से आपरेशन की इजाजत मांगी, तो उसने भी आपरेशन से इंकार कर दिया। हंगामा भी हुआ। बाद में वह भी पत्नी को लौटा ले गया। बताया जा रहा है कि कौसर को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि महिला अस्पताल में पूरी डिलीवरी फ्री है। 
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खून के लिए दो दिन तक इंतजाम करते रहे परिवार वाले 
सुभाषनगर बीडीए कालोनी के रहने वाले रिंकू पाल की पत्नी राजबाला को पहला बच्चा होना था। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने खून की कमी बताकर इंतजाम करने को कहा। दो दिन हो गए, परिवार वाले खून नहीं ला सके। लेबर रूम के बाहर शराब पीकर आए उसके घरवालों को डॉक्टराें को भगाना तक पड़ गया। सास का कहना था कि घर में कोई नहीं है रक्त देने के लिए। जबकि उसका हष्ट पुष्ट पति व अन्य तीमारदार वहीं खड़े थे। बाद में गांव से किसी को लाकर रक्त दिलाया गया। 


पति और परिवार वाले सामान्य डिलीवरी के लिए कहते हैं, जब दिक्कतें हैं तो कुछ केस में बिना आपरेशन के बच्चा नहीं हो सकता, लेकिन तीमारदार हंगामा करने और लड़ने को आतुर हो जाते हैं। नार्मल डिलीवरी के लिए दो लोग अपनी गर्भवती को वापस ले गए। खून का इंतजाम भी नहीं करते, सिर्फ फ्री में सेवाएं लेने को लगे रहते हैं, जबकि कई पुरुष घर में होते हैं। 
- डॉ. शशि गुप्ता, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ, महिला अस्पताल 
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