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खून के इंतजार में दम तोड़ गई जननी
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sat, 28 May 2016 01:38 AM IST
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जननी सुरक्षा योजना का इससे बड़ा मजाक क्या होगा? खून की कमी के कारण एक महिला सुरक्षित बच्चे को जन्म नहीं दे पायी। घर में दाई ने प्रसव कराया। बेहद कमजोर बच्चे को छह दिन पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया तीसरे दिन उसने दम तोड़ दिया। इस बीच एनीमिक मां गांव में ही रही। खून की अत्यधिक कमी के कारण उसे भी बेहद गंभीर स्थिति में 26 मई की रात साढ़े दस बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार वाले दूसरे दिन एक यूनिट खून का ही इंतजाम कर पाए जबकि डाक्टरों ने चार यूनिट की जरूरत बतायी थी। डाक्टरों ने सभी घर वालों को रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया लेकिन वे कहते रहे कि किन्हीं कारणों से वह खून नहीं दे सकते। हार कर डाक्टरों ने उन्हें मरीज को लखनऊ ले जाने को कहा तो घर वाले अस्पताल वालों पर ही बिगड़ने लगे। शुक्रवार को विवाद चल ही रहा था कि बेचारी मां ने खून के इंतजार में दम तोड़ दिया।
फरीदपुर के परा मुहल्ले के बलबीर सिंह की पत्नी भूरी पहले से ही बेहद कमजोर थी। बलबीर की बुआ शारदा ने बताया कि जब वह सातवें महीने में थी तो पैरों में सूजन बढ़ने पर उसे वहां के अस्पताल में दिखाया तो पहली बार उसका कार्ड बना। वहां उसे एक इंजेक्शन लगाया गया था। तब से पता था कि उसके शरीर में खून कम है। डॉक्टरों ने क्या सलाह दी इस बारे में घर वाले नहीं बता पा रहे हैं। सीएचसी ने भी हाईरिस्क के बावजूद बस एक कार्ड बना कर खानापूरी कर ली। न उसके घर कोई आशा पहुंची और न घर वालों ने ही आगे इलाज कराया। महीने पूरे हुए तो प्रसव पीड़ा पर एक दाई को बुला कर प्रसव कराया गया। बच्चा मरणासन्न था तो उसे जिला अस्पताल लाया गया। एनआईसीयू में बच्चा तीसरे दिन दम तोड़ गया। मां घर में ही तड़पती रही। 26 मई को उसे भी तब अस्पताल लाया गया जब हालत बेहद खराब हो चुकी थी। डाक्टरों का कहना है कि पहले दिन खून का इंतजाम हुआ नहीं दूसरे दिन एक यूनिट मिला। मरीज की हालत इतनी खराब थी कि उसे एक दिन में एक यूनिट से अधिक चढ़ा भी नहीं सकते थे। घर वाले तो खून देने को तैयार ही नहीं थे। महिला के खून के नमूने शुक्रवार को ही जांच के लिए भेजे गए थे। यह भी आशंका है कि असुरक्षित प्रसव की वजह से उसे सेप्टिसीमिया हो गया हो। शाम को घर वाले उसकी हालत देख कर हंगामा करने लगे तो डॉक्टरों ने बताया कि हालत बेहद खराब है चाहें तो वे उसे लखनऊ रिफर कर सकते हैं। इसी बीच करीब साढ़े दस बजे उसने दम तोड़ दिया।
महिला के पति ने हंगामा किया तो अस्पताल कर्मियों ने उसे और उनके एक रिश्तेदार को मेडिकल के लिए कोतवाली भिजवाया। उनका कहना था वे शराब पिये हुए थे। घर वालों ने बताया कि भूरी की पहले भी एक बेटी हुई थी उसकी भी कमजोरी की वजह से मौत हो गई थी।
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फरीदपुर के परा मुहल्ले के बलबीर सिंह की पत्नी भूरी पहले से ही बेहद कमजोर थी। बलबीर की बुआ शारदा ने बताया कि जब वह सातवें महीने में थी तो पैरों में सूजन बढ़ने पर उसे वहां के अस्पताल में दिखाया तो पहली बार उसका कार्ड बना। वहां उसे एक इंजेक्शन लगाया गया था। तब से पता था कि उसके शरीर में खून कम है। डॉक्टरों ने क्या सलाह दी इस बारे में घर वाले नहीं बता पा रहे हैं। सीएचसी ने भी हाईरिस्क के बावजूद बस एक कार्ड बना कर खानापूरी कर ली। न उसके घर कोई आशा पहुंची और न घर वालों ने ही आगे इलाज कराया। महीने पूरे हुए तो प्रसव पीड़ा पर एक दाई को बुला कर प्रसव कराया गया। बच्चा मरणासन्न था तो उसे जिला अस्पताल लाया गया। एनआईसीयू में बच्चा तीसरे दिन दम तोड़ गया। मां घर में ही तड़पती रही। 26 मई को उसे भी तब अस्पताल लाया गया जब हालत बेहद खराब हो चुकी थी। डाक्टरों का कहना है कि पहले दिन खून का इंतजाम हुआ नहीं दूसरे दिन एक यूनिट मिला। मरीज की हालत इतनी खराब थी कि उसे एक दिन में एक यूनिट से अधिक चढ़ा भी नहीं सकते थे। घर वाले तो खून देने को तैयार ही नहीं थे। महिला के खून के नमूने शुक्रवार को ही जांच के लिए भेजे गए थे। यह भी आशंका है कि असुरक्षित प्रसव की वजह से उसे सेप्टिसीमिया हो गया हो। शाम को घर वाले उसकी हालत देख कर हंगामा करने लगे तो डॉक्टरों ने बताया कि हालत बेहद खराब है चाहें तो वे उसे लखनऊ रिफर कर सकते हैं। इसी बीच करीब साढ़े दस बजे उसने दम तोड़ दिया।
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महिला के पति ने हंगामा किया तो अस्पताल कर्मियों ने उसे और उनके एक रिश्तेदार को मेडिकल के लिए कोतवाली भिजवाया। उनका कहना था वे शराब पिये हुए थे। घर वालों ने बताया कि भूरी की पहले भी एक बेटी हुई थी उसकी भी कमजोरी की वजह से मौत हो गई थी।
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