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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   The mayor's chair is not the flower beds, the crown of thorns

मेयर की कुर्सी फूलों की सेज नहीं, कांटों का ताज

Mon, 20 Nov 2017 02:09 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Mon, 20 Nov 2017 02:09 AM IST
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 निकाय चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होते ही पहले तो मेयर के टिकट के लिए 50 से ज्यादा दावेदारों में खींचतान मची। जब प्रमुख राजनीतिक दलों ने प्रत्याशी घोषित कर दिए तो अब मतदाताओं को अपने पाले में करने की होड़ है। पूर्व मेयरों की मानें तो यह कुर्सी फूलों की सेज नहीं.. कांटों का ताज है। नए चेहरे तो अपनी लड़ाई कुर्सी मिलने तक ही समझते हैं लेकिन मेयर की असली लड़ाई तो चुनाव जीतने के बाद शुरू होती है। इस कुर्सी पर बैठकर नगर निगम चलाने वाले पूर्व मेयरों के अनुभव दिल दहलाने वाले रहे हैं। सीधे-सादे माने जाने वाले शहर के प्रथम मेयर राजकुमार अग्रवाल को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कार्रवाई को लेकर तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी से धक्का मुक्की करनी पड़ी थी। सादगी पसंद पूर्व मेयर सुभाष पटेल के कार्यकाल में मुख्य नगर अधिकारी रिवाल्वर लेकर ऑफिस आ गए थे। बोले, हम हरियाणा के रहने वाले हैं। ऐसे भी निपटना जानते हैं। इस पर सुभाष पटेल दो रिवाल्वर लेकर नगर निगम के दफ्तर गए और उनको संदेश भिजवाया कि हम उनसे कमजोर नहीं हैं। जैसे चाहें, निपट लें। बसपा शासनकाल में मेयर रहीं कांग्रेस की सुलझी महिला नेता सुप्रिया ऐरन के ऊपर नगर निगम बोर्ड में मायावती और कांशीराम की मूर्ति न लगाने पर एक पार्षद ने कुर्सी फेंक दी, हालांकि कुर्सी उनसे कुछ दूर जाकर गिरी थी। नगर निगम प्रशासन चलाने को लेकर पूर्व मेयरों के क्या रहे अनुभव, प्रस्तुत है अमर उजाला की एक रिपोर्ट - 
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एएमएनए सुनते थे, वरना ट्रांसफर  
शहर के प्रथम मेयर राजकुमार अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने 1989 से 1995 तक पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी, मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह की सरकारों में नगर निगम चलाया। एक बार उनके पास घरों में गंदे पानी की सप्लाई की शिकायत आई। जलकल अभियंता से जब समस्या दूर करने को कहा तो उसने बहाना बनाया। तब वह खुद जुबली पार्क वाली टंकी पर चढ़ गए। वहां देखा तो टंकी की जाली खुली थी और उसमें मरे कबूतर पड़े थे। इस पर अफसरों को फटकारा और टंकी की सफाई कराके जाली बंद कराई। एक बार किसी ने शिकायत की कि नगर निगम के कई विभागों में कर्मचारी लोगों से पैसा वसूल रहे हैं। इसकी अपर मुख्य नगर अधिकारी शिवराज सिंह यादव से जांच कराने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया। इस पर उनसे विवाद हो गया। नौबत हाथापाई तक की आ गई। तब उनका ट्रांसफर कराना पड़ा। अब तो यह कहा जाता है कि मेयर के पास अधिकार नहीं हैं। ऐसे नहीं चलता। जनता नहीं मानती कि मेयर के पास अधिकार नहीं। 
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एमएनए ने एक रिवाल्वर दिखाया.. तो हमने दो
सुभाष पटेल 1995 से 2000 तक मेयर रहे। अपने कार्यकाल के अनुभव सुनाते हुए उन्होंने कहा, उस समय के मुख्य नगर अधिकारी डॉ. दिलबाग सिंह से एक मुद्दे पर उनका मतभेद हो गया। दिलबाग खुद को हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवीलाल का खास बताकर नगर निगम में सब पर रौब गांठते थे। इस पर हमने पहले तो ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब एक बार नौकरी देने के नाम पर पैसा लेने की शिकायत मिलीं तो उनके खिलाफ शासन से लिखा पढ़ी की। तब दिलबाग नगर निगम के दफ्तर में रिवाल्वर लेकर आ गए। एक अधिकारी से बोले, मैं हरियाणा का हूं। हर तरह से निपटना जानता हूं। जब यह बात हमें पता चली तो अगले दिन हम दो रिवाल्वर लेकर नगर निगम गए। उसी अफसर को बुलाकर कहा, एमएनए को बता देना कि हम उनसे कमजोर नहीं हैं। यह हरियाणा नहीं, बरेली है। जैसे निपटना चाहें, निपट लें। इसके बाद एमएनए माफी मांगने घर आए।
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जब बसपा पार्षद ने सदन में फेंकी कुर्सी 
वर्ष 2007 से 2012 तक मेयर रहीं सुलझे हुए सरल स्वभाव की सुप्रिया ऐरन को भी सदन में अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ा। बसपा की सरकार बनते ही नगर निगम बोर्ड की बैठक हुई। उससे दो दिन पहले बसपा के कुछ पार्षद उनसे मिले और सदन में कांशीराम तथा मायावती की फोटो लगवाने को कहा, लेकिन बैठक शुरू होने से पहले फोटो नहीं लग पाई। बैठक शुरू हुई तो बसपा पार्षद हंगामा करने लगे। जब में सदन में पहुंची तो बसपा पार्षदों ने कुर्सी उठाकर मेरे ऊपर फेंकी जो कुछ दूर जाकर गिरी। इस पर मैंने कहा, महिला मुख्यमंत्री होते हुए भी आप महिलाओं की इज्जत करना नहीं जानते। तुरंत बाहर निकल जाओ। सदन में मायावती और कांशीराम की फोटो तब लगेगी, जब मैं चाहूंगी। उन पार्षदों के क्रियाकलाप के बारे में मायावती को पत्र भी लिखा, लेकिन उनका जवाब नहीं आया। इससे निराशा हुई। एक बार पार्षद दुकान आवंटन का प्रस्ताव लेकर सदन में आए तब भी मैंने मना कर दिया। मैं मानती हूं कि पार्षदों को कुछ मिलता नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनको भ्रष्टाचार की खुली छूट दे दी जाए।   
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