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Bareilly News: आग से धधकती रही मंडी, पानी के लिए जूझता रहा अग्निशमन दल
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ऊपरी मंजिल की आग बुझाने की कोशिश में हर बार नीचे की ओर भड़की आग
काम आया डेलापीर चौराहे के पास लगा हाइड्रेंट, डेढ़ साल से खराब है मंडी का ओवरहेड टैंक
बरेली। डेलापीर फल मंडी में आग बुझाने के इंतजाम नहीं थे। मंडी के ओवरहेड टैंक का मोटर डेढ़ साल से खराब है। आग लगी तो दमकल टीम को पानी नहीं मिला। मंडी में पानी नहीं मिला तो दमकल टीम ने दूसरे संसाधनों को तलाशना शुरू किया। अंदर पानी की आपूर्ति का कोई साधन ही नहीं मिला। इससे जहां दमकल स्टाफ बेबस हो गया, वहीं आग भड़कती रही। डेलापीर चौराहे के पास हाइड्रेंट तो मिला, पर पानी खत्म होने के बाद हर बार टीम को बाहर की दौड़ लगानी पड़ रही थी। रात दो बजे आग पर काबू पाया जा सका।
एफएसओ संजीव यादव ने बताया कि डेलापीर चौैराहे के पास मिला हाईड्रेंट काम तो आया, पर गाड़ियों को बार-बार बाहर का चक्कर लगाना पड़ा। इस वजह से काफी समय बर्बाद हुआ। ऊपरी मंजिल पर आग बुझाने के लिए टीम ने पाइप के साथ ही विशेष बाइक व छोटी गाड़ी की मदद ली। इस दौरान जब ऊपर की आग बुझनी शुरू होती थी तो नीचे भड़क जाती थी।
फट गए दुकानों के लिंटर
आग बुझाने के दौरान अग्निशमन कर्मियों को कई बार जान जोखिम में डालनी पड़ी। दरअसल, बार-बार हो रहे धमाकों के साथ ही आग भड़कती जा रही थी। पता लगा कि कभी मजदूरों के छोटे एलपीजी सिलिंडर फट रहे थे तो कभी दुकानों के लिंटर आग से चटक रहे थे। जब-जब आवाज होती थी, वहां मौजूद दुकानदार व अन्य लोग दहल जाते थे। अमर उजाला ब्यूरो
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काम आया डेलापीर चौराहे के पास लगा हाइड्रेंट, डेढ़ साल से खराब है मंडी का ओवरहेड टैंक
बरेली। डेलापीर फल मंडी में आग बुझाने के इंतजाम नहीं थे। मंडी के ओवरहेड टैंक का मोटर डेढ़ साल से खराब है। आग लगी तो दमकल टीम को पानी नहीं मिला। मंडी में पानी नहीं मिला तो दमकल टीम ने दूसरे संसाधनों को तलाशना शुरू किया। अंदर पानी की आपूर्ति का कोई साधन ही नहीं मिला। इससे जहां दमकल स्टाफ बेबस हो गया, वहीं आग भड़कती रही। डेलापीर चौराहे के पास हाइड्रेंट तो मिला, पर पानी खत्म होने के बाद हर बार टीम को बाहर की दौड़ लगानी पड़ रही थी। रात दो बजे आग पर काबू पाया जा सका।
एफएसओ संजीव यादव ने बताया कि डेलापीर चौैराहे के पास मिला हाईड्रेंट काम तो आया, पर गाड़ियों को बार-बार बाहर का चक्कर लगाना पड़ा। इस वजह से काफी समय बर्बाद हुआ। ऊपरी मंजिल पर आग बुझाने के लिए टीम ने पाइप के साथ ही विशेष बाइक व छोटी गाड़ी की मदद ली। इस दौरान जब ऊपर की आग बुझनी शुरू होती थी तो नीचे भड़क जाती थी।
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फट गए दुकानों के लिंटर
आग बुझाने के दौरान अग्निशमन कर्मियों को कई बार जान जोखिम में डालनी पड़ी। दरअसल, बार-बार हो रहे धमाकों के साथ ही आग भड़कती जा रही थी। पता लगा कि कभी मजदूरों के छोटे एलपीजी सिलिंडर फट रहे थे तो कभी दुकानों के लिंटर आग से चटक रहे थे। जब-जब आवाज होती थी, वहां मौजूद दुकानदार व अन्य लोग दहल जाते थे। अमर उजाला ब्यूरो
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