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क्रिकेट सीखने आए जम्मू के खिलाड़ियों की उम्मीदों पर लॉकडाउन ने फेरा पानी
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लॉकडाउन में फंसे खिलाड़ी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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दो महीने से शहर में फंसे हैं प्रिंस और वरिंदर, नहीं मिल रही लौटने की इजाजत
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बरेली। लॉकडाउन के दौरान शहर में कई राज्यों के लोग फंसे हैं। उन्हें घर लौटने की प्रशासन से इजाजत नहीं मिल रही है। शहर में क्रिकेट की ट्रेनिंग लेने जम्मू से आए दो खिलाड़ी भी लॉकडाउन में फंस गए हैं। होली की छुट्टियों के कारण न तो उन्हें एकेडमी में एडमिशन ही मिल पाया और न ही अब लौटने की इजाजत मिल पा रही है।
जम्मू के उधमपुर जिले के वरिंदर कुमार और आरएसपुरा के प्रिंस क्रिकेट की बेहतर ट्रेनिंग लेने की आस में सात मार्च को बरेली आए थे। वरिंदर के पिता मदनलाल शिक्षक हैं, जबकि प्रिंस के पिता धर्मपाल कारपेंटर। दोनों जम्मू के स्टेट लेवल खिलाड़ी हैं। उन्होंने बताया कि फरवरी में एक टूर्नामेंट खेलने नोएडा आए थे। वहां उनकी मुलाकात बरेली के क्रिकेट एकेडमी संचालक महफूज खान से हुई। इसके बाद परिजन की सहमति से दोनों क्रिकेट की बारीकियां सीखने बरेली आ गए, लेकिन यहां होली की छुट्टियों के कारण उन्हें एकेडमी में एडमिशन नहीं मिल सका। इसके बाद कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन घोषित हो गया। तब से दोनों यहीं फंसे हैं।
जम्मू के उधमपुर जिले के वरिंदर कुमार और आरएसपुरा के प्रिंस क्रिकेट की बेहतर ट्रेनिंग लेने की आस में सात मार्च को बरेली आए थे। वरिंदर के पिता मदनलाल शिक्षक हैं, जबकि प्रिंस के पिता धर्मपाल कारपेंटर। दोनों जम्मू के स्टेट लेवल खिलाड़ी हैं। उन्होंने बताया कि फरवरी में एक टूर्नामेंट खेलने नोएडा आए थे। वहां उनकी मुलाकात बरेली के क्रिकेट एकेडमी संचालक महफूज खान से हुई। इसके बाद परिजन की सहमति से दोनों क्रिकेट की बारीकियां सीखने बरेली आ गए, लेकिन यहां होली की छुट्टियों के कारण उन्हें एकेडमी में एडमिशन नहीं मिल सका। इसके बाद कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन घोषित हो गया। तब से दोनों यहीं फंसे हैं।
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आठ हजार महीने का गेस्टहाउस, छूट के नाम पर किए दो हजार कम
प्रिंस और वरिंदर ने बताया कि ट्रेनर ने ही यहां कुर्मांचलनगर के एक गेस्टहाउस में उनके ठहरने का इंतजाम आठ-आठ हजार रुपये महीने पर पर करा दिया। रुपये खत्म होने पर गेस्टहाउस मालिक से राहत मांगी तो उसने सिर्फ दो-दो हजार रुपये कम किए। अब महीना पूरा होने पर तकाजा कर रहा है।
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