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Bareilly News: घर, कार और स्वरोजगार की चाह में बढ़ रहा ऋण-जमा अनुपात
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बरेली। हाल के वर्षों में लोगों में घर, कार, शिक्षा और स्वरोजगार की चाहत बढ़ी है। इसके लिए लोग बचत भी कर रहे हैं और बैंकों से कर्ज भी ले रहे हैं। कर्ज का आंकड़ा बचत से थोड़ा ज्यादा है। नतीजा, बीते चार साल में ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशो) में करीब 13 फीसदी वृद्धि हुई है। बीते वित्त वर्ष में भी इसमें करीब तीन फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
बैंकों के डिजिटलाइजेशन से लोगों को कागजी झंझट से छुटकारा मिला है। अब उनको रकम की जमा-निकासी के लिए बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। घर, कार, बच्चों की शिक्षा, स्वरोजगार और उद्योगों आदि की स्थापना के लिए कर्ज की शर्तें भी पहले के मुकाबले आसान हुई हैं। सरकारी योजनाओं में अनुदान की व्यवस्था युवाओं को स्वरोजगार की ओर आकर्षित कर रही है। जिले का सीडी रेशो बढ़ने की यही प्रमुख वजह है।
इसके अलावा ग्राहक घर और कार सहित अन्य घरेलू जरूरतों के लिए बचत भी कर रहे हैं। इस बचत को वह फिक्स्ड डिपॉजिट सहित विभिन्न स्वरूपों में बैंकों में रखते हैं। इस वजह से ऋण के साथ-साथ जमा राशि में भी बढ़ोतरी हुई है। इस वृद्धि के पीछे कई अन्य आर्थिक और मौद्रिक कारण भी जिम्मेदार हैं, जिनका प्रभाव सीधे तौर पर आम जनता और बैंकिंग क्षेत्र पर पड़ रहा है।
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जानिए, क्या होता है सीडी रेशो
बैंक द्वारा जुटाई गई जमा राशि और दिए गए कर्ज के अनुपात को सीडी रेशो कहते हैं। आरबीआई इसके लिए न्यूनतम या अधिकतम स्तर निर्धारित नहीं करता, लेकिन कम अनुपात यह दर्शाता है कि बैंक अपने संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं कर रहे हैं। संवाद
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10-12 साल पहले के मुकाबले अब लोग बैंक से ज्यादा कर्ज ले रहे हैं। बैंकिंग सेक्टर में हुए बदलाव के बाद अब पर्सनल लोन, शिक्षा ऋण, होम लोन बहुत आसान हो गए हैं। ब्याज दरें भी कम हुई हैं। निजी बैंक घर बैठे ही लोन उपलब्ध करा रहे हैं। इस वजह से सीडी रेशो में वृद्धि हुई है। - वीके अरोरा, एलडीएम
ज्यादातर एकल परिवार होम लोन पर निर्भर
यूनियन बैंक एसोसिएशन के महामंत्री पीके महेश्वरी के मुताबिक, संयुक्त परिवार की अवधारणा में कमी के कारण अब लोग शादी के बाद अलग रहना पसंद करने लगे हैं। उनको मकान का किराया देने के बजाय लोन पर घर बनवाकर बाद में किस्तें देना ज्यादा फायदेमंद लगता है। ऐसे लोगों को आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए कॉलोनाइजर बैंकों से सांठगांठ भी रखते हैं। वहीं, सरकारी योजनाओं के अंतर्गत ऋण लेकर लोग स्वरोजगार के सपने को साकार कर रहे हैं। इन योजनाओं में मिलने वाला अनुदान भी इसकी प्रमुख वजह है।
बीते चार वित्त वर्ष के आंकड़े
वित्तीय वर्ष 2021-22 2022-23 2023-24 2024-25
ऋण 1623447.73 2037603.66 2404041.29 2603906.63
जमा 2789909.71 2981537.06 3492118.93 3627405.28
सीडी रेशों 58.19 68.34 68.84 71.78
नोट : सीडी रेशो प्रतिशत में, ऋण और जमा के आंकड़े लाख रुपये में हैं।
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बैंकों के डिजिटलाइजेशन से लोगों को कागजी झंझट से छुटकारा मिला है। अब उनको रकम की जमा-निकासी के लिए बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। घर, कार, बच्चों की शिक्षा, स्वरोजगार और उद्योगों आदि की स्थापना के लिए कर्ज की शर्तें भी पहले के मुकाबले आसान हुई हैं। सरकारी योजनाओं में अनुदान की व्यवस्था युवाओं को स्वरोजगार की ओर आकर्षित कर रही है। जिले का सीडी रेशो बढ़ने की यही प्रमुख वजह है।
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इसके अलावा ग्राहक घर और कार सहित अन्य घरेलू जरूरतों के लिए बचत भी कर रहे हैं। इस बचत को वह फिक्स्ड डिपॉजिट सहित विभिन्न स्वरूपों में बैंकों में रखते हैं। इस वजह से ऋण के साथ-साथ जमा राशि में भी बढ़ोतरी हुई है। इस वृद्धि के पीछे कई अन्य आर्थिक और मौद्रिक कारण भी जिम्मेदार हैं, जिनका प्रभाव सीधे तौर पर आम जनता और बैंकिंग क्षेत्र पर पड़ रहा है।
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जानिए, क्या होता है सीडी रेशो
बैंक द्वारा जुटाई गई जमा राशि और दिए गए कर्ज के अनुपात को सीडी रेशो कहते हैं। आरबीआई इसके लिए न्यूनतम या अधिकतम स्तर निर्धारित नहीं करता, लेकिन कम अनुपात यह दर्शाता है कि बैंक अपने संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं कर रहे हैं। संवाद
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10-12 साल पहले के मुकाबले अब लोग बैंक से ज्यादा कर्ज ले रहे हैं। बैंकिंग सेक्टर में हुए बदलाव के बाद अब पर्सनल लोन, शिक्षा ऋण, होम लोन बहुत आसान हो गए हैं। ब्याज दरें भी कम हुई हैं। निजी बैंक घर बैठे ही लोन उपलब्ध करा रहे हैं। इस वजह से सीडी रेशो में वृद्धि हुई है। - वीके अरोरा, एलडीएम
ज्यादातर एकल परिवार होम लोन पर निर्भर
यूनियन बैंक एसोसिएशन के महामंत्री पीके महेश्वरी के मुताबिक, संयुक्त परिवार की अवधारणा में कमी के कारण अब लोग शादी के बाद अलग रहना पसंद करने लगे हैं। उनको मकान का किराया देने के बजाय लोन पर घर बनवाकर बाद में किस्तें देना ज्यादा फायदेमंद लगता है। ऐसे लोगों को आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए कॉलोनाइजर बैंकों से सांठगांठ भी रखते हैं। वहीं, सरकारी योजनाओं के अंतर्गत ऋण लेकर लोग स्वरोजगार के सपने को साकार कर रहे हैं। इन योजनाओं में मिलने वाला अनुदान भी इसकी प्रमुख वजह है।
बीते चार वित्त वर्ष के आंकड़े
वित्तीय वर्ष 2021-22 2022-23 2023-24 2024-25
ऋण 1623447.73 2037603.66 2404041.29 2603906.63
जमा 2789909.71 2981537.06 3492118.93 3627405.28
सीडी रेशों 58.19 68.34 68.84 71.78
नोट : सीडी रेशो प्रतिशत में, ऋण और जमा के आंकड़े लाख रुपये में हैं।