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लाइसेंस ड्रग विभाग ने दिया, हिसाब नारकोटिक्स मांग रहा

Thu, 09 Dec 2021 01:10 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 09 Dec 2021 01:10 AM IST
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The license was given by the drug department, the account is asking for narcotics
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दवा कारोबारी से 20 लाख वसूलने के बाद 50 लाख मांगने का मामला
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व्यापारी ने किया दावा- अगर मैं गलत हूं तो निरस्त करा दें मेरा लाइसेंस
बरेली। दवा के थोक कारोबारी अंकित सक्सेना ने नारकोटिक्स विभाग के अफसरों पर 20 लाख वसूलने के बाद 50 लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया है। इस मामले में नारकोटिक्स अफसरों की भूमिका सवालों के घेरे में है लेकिन वे दवा व्यापारी पर ही सवाल उठा रहे हैं। वहीं, व्यापारी का कहना है कि अगर वह गलत हैं तो अब तक उनका लाइसेंस निरस्त क्यों नहीं कराया गया।
प्रेमनगर के मोहल्ला चाहबाई में रहने वाले थोक दवा कारोबारी अंकित सक्सेना ने मंगलवार को एसएसपी रोहित सिंह सजवाण से अवैध वसूली की शिकायत की। आरोप लगाया कि वर्ष 2019-20 में किए गए कारोबार के बाद नारकोटिक्स अधीक्षक एलआर दिनकर ने इंस्पेक्टर महेश प्रताप को उनके पास भेजा और टैक्स बकाया बताकर 20 लाख रुपये की वसूली कराई। पांच दिसंबर, 2021 को उनसे 50 लाख रुपये की फिर मांग की गई। इस पर एसएसपी ने मामले की जांच एसपी सिटी रवींद्र कुमार को सौंप दी है, मगर औषधि विभाग के कार्यक्षेत्र में नारकोटिक्स के दखल से मामला दूसरा ही मोड़ लेता नजर आ रहा है। अंकित का कहना है कि उन्हें ड्रग विभाग ने लाइसेंस जारी किया है, फिर इन दवाआें के स्टॉक की जांच का नारकोटिक्स को क्या अधिकार है। इसके बाद भी वह सारे दस्तावेज मुहैया करा चुके हैं।
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नारकोटिक्स अधीक्षक बोले, साढ़े
पांच लाख सीरप का हिसाब नहीं
नारकोटिक्स अधीक्षक एलआर दिनकर का कहना है कि वर्ष 2019-20 में दवा कारोबारी ने लखनऊ से 5.40 लाख कोडीन, ट्रामाडोल और फेंसेडिल सीरप मंगाए। मगर साढ़े पांच लाख रुपये के इन सीरप की बिक्री कहां की गई है, इसका कोई हिसाब किताब नहीं है। दवा कारोबारी से इसका हिसाब मांगा जा रहा है, दो बार नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक जवाब नहीं दिया है। अब ड्रग विभाग के संज्ञान में डालकर इस मामले में कार्रवाई कराई जाएगी।
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कार्रवाई हमारे संज्ञान में नहीं
ड्रग विभाग के प्राधिकृत अधिकारी संजय का कहना है कि नारकोटिक्स की कार्रवाई के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। दवा कारोबारी को लाइसेंस औषधि विभाग ने दिया है। अगर नारकोटिक्स को कोई कार्रवाई करनी थी तो इस मामले को औषधि विभाग के संज्ञान में लाना चाहिए था।
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