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Bareilly News: डिजिटल होगा पुस्तकालय, अंतरराष्ट्रीय स्तर के तैयार होंगे शोध प्रबंध
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बरेली। डिजिटल शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को रुहेलखंड विश्वविद्यालय और गांधीनगर सूचना, पुस्तकालय नेटवर्क (इंफिलबनेट) सेंटर के बीच करार हुआ है। राजभवन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की उपस्थिति में एमओयू पर प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए।
इंफिलबनेट भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत यूजीसी की ओर से संचालित एक स्वायत्त संस्था है। जो देश भर के शैक्षणिक संस्थानों को डिजिटल लाइब्रेरी, शोध डेटाबेस, प्लेजियारिज्म चेक टूल्स और ऑनलाइन शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराती है। समझौते के बाद विश्वविद्यालय के छात्रों को शोधगंगा में उपलब्ध शोध प्रबंध मुफ्त में पढ़ने को मिलेंगे।
शोध शुद्धि यानी साहित्यिक चोरी से निजात मिलेगी। थीसिस या शोध पत्र जमा करने से पहले इस टूल की मदद से मौलिकता जांची जा सकेगी। इंडकैट और यूपीकैट डेटाबेस मुहैया होगा। सोल लाइब्रेरी ऑटोमेशन से पुस्तकों की खोज और प्रबंधन आसान होगा। इंस्टीट्यूशनल रिसर्च इंफॉर्मेशन सिस्टम से शोध प्रकाशन वैश्विक स्तर का होगा। साथ ही, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित होंगे। इस करार का दीर्घकालिक लाभ विद्यार्थियों को होगा। ब्यूरो
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अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के योग्य बन सकेंगे विद्यार्थी
कुलपति प्रो. केपी सिंह के मुताबिक करार से विश्वविद्यालय का शोध और शैक्षणिक ढांचा मजबूत होगा। डिजिटल लाइब्रेरी, प्लेजियारिज्म चेक और शोध डेटाबेस जैसी सुविधाओं से छात्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएंगी। विश्वविद्यालय का पुस्तकालय डिजिटल होगा। शोधार्थियों को देश भर के शोध प्रबंधों और अकादमिक संसाधनों का उपयोग करने में सक्षम होंगे।
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इंफिलबनेट भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत यूजीसी की ओर से संचालित एक स्वायत्त संस्था है। जो देश भर के शैक्षणिक संस्थानों को डिजिटल लाइब्रेरी, शोध डेटाबेस, प्लेजियारिज्म चेक टूल्स और ऑनलाइन शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराती है। समझौते के बाद विश्वविद्यालय के छात्रों को शोधगंगा में उपलब्ध शोध प्रबंध मुफ्त में पढ़ने को मिलेंगे।
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शोध शुद्धि यानी साहित्यिक चोरी से निजात मिलेगी। थीसिस या शोध पत्र जमा करने से पहले इस टूल की मदद से मौलिकता जांची जा सकेगी। इंडकैट और यूपीकैट डेटाबेस मुहैया होगा। सोल लाइब्रेरी ऑटोमेशन से पुस्तकों की खोज और प्रबंधन आसान होगा। इंस्टीट्यूशनल रिसर्च इंफॉर्मेशन सिस्टम से शोध प्रकाशन वैश्विक स्तर का होगा। साथ ही, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित होंगे। इस करार का दीर्घकालिक लाभ विद्यार्थियों को होगा। ब्यूरो
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कुलपति प्रो. केपी सिंह के मुताबिक करार से विश्वविद्यालय का शोध और शैक्षणिक ढांचा मजबूत होगा। डिजिटल लाइब्रेरी, प्लेजियारिज्म चेक और शोध डेटाबेस जैसी सुविधाओं से छात्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएंगी। विश्वविद्यालय का पुस्तकालय डिजिटल होगा। शोधार्थियों को देश भर के शोध प्रबंधों और अकादमिक संसाधनों का उपयोग करने में सक्षम होंगे।