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गलियाें के राजा हैं ई-रिक्शा, जरा हटके... जरा बचके

Sun, 10 Dec 2017 02:25 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sun, 10 Dec 2017 02:25 AM IST
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रबड़ीटोला से कांकर टोला मार्ग को जोड़ने वाली गली में रहने वाली आठ साल की यासमीन स्कूल से आने के बाद घर में ही कैद हो जाती है। उसके घर के बाहर से इतने ई-रिक्शा निकलते हैं कि चाहकर भी घर के बाहर खेल नहीं पाती। बस, दरवाजे पर खड़ी होकर उन्हें देखती रहती है। गली में ही दुकान चलाने वाले मोहम्मद सिराज भी अपने बच्चों को घर से नहीं निकलने देते हैं। डरते हैं कि बच्चे कहीं चोट न खा जाएं। शहर की प्रमुख सड़कों पर स्पोर्ट्स और बुलेट बाइक फर्राटा भर रहीं हैं तो गलियों के राजा ई-रिक्शा बने हुए हैं। एक मिनट के अंदर पुरानी शहर की गलियों में इतने ई-रिक्शा पहुंच जाते हैं कि जाम लग जाता है। सड़क पर लगे जाम से बचने के लिए जब लोग गलियों में घुसते हैं तो उन्हें फिर अपने वाहन मोड़ने पड़ते हैं। शहर में ई-रिक्शा पर बैठकर शान की सवारी का आनंद लेने वालो जरा पुराने शहर भी घूम आइए, तब आपको पता चलेगा कि यहां रहने वाले लोग इन ई-रिक्शा से कितना परेशान है। अमर उजाला टीम ने पुराने शहर का जायजा लिया तो हालात बेहद खराब नजर आए और लोग नाराज दिखे। पेश है लाइव रिपोर्ट- 
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सीन 1
रबड़ीटोला में मस्जिद कानमैलान के पीछे वाली गली में अगर दो पहिया वाहन एक साथ इधर-उधर से आ जाएं तो फंस ही जाएंगे, लेकिन ई-रिक्शा यहां हटो.. बचो.. करते हुए आराम से निकलते हैं। बड़े वाहनाें का गली में प्रवेश रोकने के लिए लोहे का एक एंगल बीच सड़क में लगाया गया है, इसे हिला हिलाकर टेढ़ा कर दिया गया है ताकि ई-रिक्शा आसानी से निकल सकें। दो ई-रिक्शा जब गली में आते हैं जो फिर पैदल निकलने वाले भी नहीं निकल सकते हैं। इससे आगे आजाद इंटर कॉलेज मैदान के पास ई-रिक्शा चालकों ने अवैध स्टैंड बना रखा है। 
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सीन 2
शाहदाना में दादू कुआं मस्जिद बासागरान गली का हाल तो और भी खराब है। यहां गली में एक साथ एनएन 25बी 0181, 8039, 0409, 250118, 0326, 250498 नंबर वाले ई-रिक्शा घुसे हुए थे। सभी पर सवारियां बैठी थीं, जो जाम में फंसने पर चिल्ला रहीं थीं। गली पूरी तरह से जाम हो गई तो कुछ लोगों ने सवारियों को उतारकर रिक्शे को इधर-उधर खिसकाया। कुछ जगह बनी, तब जाकर रिक्शा गली के बाहर निकले। जब गली से बाहर आए तो जाम लग गया क्याेंकि कुछ लोग गली में जाने के लिए बाहर खड़े थे। करीब 20 मिनट बाद स्थिति सामान्य हो पाई। 
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सीन 3
बारादरी और कांकरटोला से निकलने वाले ई-रिक्शा सैलानी तक आने के लिए कोट मोहल्ला की गली का प्रयोग करते हैं। सौ मीटर की इस गली में दिन भर ई-रिक्शा चलते रहते हैं। गली में ही कुछ घराें के दरवाजे खुलते हैं, इससे लोग परेशान हैं। गली में रहने वाले रईस अहमद का नया घर बनकर तैयार है लेकिन उन्होंने अभी तक इसका चबूतरा नहीं बनवाया है। रईस बताते हैं कि एक बार चबूतरा बनकर तैयार था लेकिन सीमेंट सूखा नहीं था। ई-रिक्शा वालों ने ऐसी टक्कर मारी कि पूरा चबूतरा टूट गया। रईस अब इसे बनवा ही नहीं रहे हैं। जाम की वजह से लोगों को 20-20 मिनट तक गली में खड़े रहना पड़ता है। बिना मदद के यहां लगा जाम खुलता भी नहीं है। 

 
ई-रिक्शा से इन गलियों की हालत पतली 
पुराना शहर, चकमहमूद, नई बस्ती, जगतपुर, कांकरटोला, एजाजनगर, बुखारपुरा, रबड़ीटोला, काजीटोला, सैलानी, गंगापुर, शहामतगंज, बड़ा बाजार की गली, सराय, सिकलापुर, कुतुबखाना, साहूकारा, किला आदि इलाकों की तंग गलियों में दिन भर ई-रिक्शा चलते हैं। 

अवैध स्टैंड भी बनाए 
ई-रिक्शा चालकों ने शहर के बाजारों में अवैध स्टैंड भी बना रखे हैं। ये जहां खाली जगह पाते हैं वहीं, रिक्शे खड़े कर देते हैं। शहामतगंज, सैलानी, कुतुबखाना, नावल्टी, कालीबाड़ी, चौकी चौराहा, अयूब खां चौराहा, चौपुला, संजयनगर आदि इलाकों में इनके अवैध स्टैंड बने हुए हैं। 

इसलिए गलियों से निकलते हैं रिक्शा 
अवैध ई-रिक्शा की संख्या शहर में 1200 से अधिक है। इन्हें चलाने वालों के पास न तो डीएल है और न ही रिक्शे के कागज। आरटीओ का परमिट भी नहीं है। ऐसे में ये पुलिस से बचने के लिए गलियों से निकलते हैं। गलियों से निकलने वाले अधिकतर रिक्शा नगर निगम में पंजीकृत हैं। कई बिना नंबर वाले भी हैं। 


शहर में इतने ई-रिक्शा 
नगर निगम में पंजीकृत- 690 
आरटीओ में पंजीकृत- 550
अवैध ई-रिक्शा-     1200 

नगर निगम के ई-रिक्शा बने मुसीबत, यह है नियम 
नगर निगम ने 690 ई-रिक्शा अपने यहां पंजीकृत किए हैं, जो मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अवैध हैं। इन रिक्शा चालकाें के पास डीएल नहीं है। दूसरी श्रेणी में आरटीओ के यहां पंजीकृत ई-रिक्शा हैं, इनके चालकों के डीएल बने हैं। तीसरी श्रेणी ऐसे ई-रिक्शा की है जिनका कोई पंजीकरण ही नहीं है। ये बिना परमिट दौड़ रहे हैं। आरटीओ कार्यालय में वैध ई-रिक्शा का पंजीकरण, परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस बनाया जाता है। जिले भर में तीन दर्जन से अधिक डीलर ई-रिक्शा की अवैध बिक्री कर रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग इन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। ई-रिक्शा पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चेसिस नंबर होने चाहिए। इनका पंजीकरण होना जरूरी है और परमिट भी जारी किए जाने चाहिए। चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी है। हर साल इनका फिटनेस चेक होना चाहिए।  


कोट 
जिन ई-रिक्शा का मोटर व्हीकल एक्ट के तहत पंजीकरण नहीं होगा, उनके खिलाफ जल्द कार्रवाई शुरू करेंगे। नगर निगम द्वारा ई-रिक्शा का पंजीकरण करने से स्थिति बिगड़ी थी। इसके लिए नगर आयुक्त से अनुरोध किया तो उन्होंने इसे बंद कराया। जल्द ही अभियान शुरू होगा। 
- कमलेश बहादुर, एसपी ट्रैफिक


ई-रिक्शा गली में इतनी तेज चलते हैं कि बच्चे चोट खा जाते हैं। कई बार तो झगड़ा हो चुका है।- शगीर अहमद, जरी कारीगर
घर के बाहर चबूतरा बनवाया था, गली में ई-रिक्शा घुसेड़कर इसे तोड़ ताला। अब इसे बनवा ही नहीं रहा हूं। - रईस अहमद, सब्जी विक्रेता 
स्कूल से बच्चे आते हैं तो घरों में ही रहते हैं। गली में इतने ई-रिक्शा निकलते हैं कि हमेशा खतरा बना रहता है। - मो. सिराज, दुकानदार 
पुल के नीचे ई-रिक्शा वाले अपना स्टैंड बना लेते हैं। सड़क जाम हो जाती है। - अनीस अहमद, शाहदाना 
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