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जिंदगी पर भारी पड़ा मां बनने का सफर तो फरिश्ते बन गए एंबुलेंस कर्मी

Mon, 07 Sep 2020 01:44 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2020 01:44 AM IST
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The journey of becoming a mother overwhelmed the life, so the ambulance workers became angels
corona in world - फोटो : पीटीआई

हालत नाजुक होने पर 25 महिलाओं का एंबुलेंस में ही कराया प्रसव, पिछले चार महीनों में हुईं ये सभी घटनाएं
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कोरोना के दौर में बढ़ीं ग्रामीण इलाकों की गर्भवती महिलाओं की मुश्किलें
अस्पताल ले जाने को एंबुलेंस और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी पड़ रही भारी

बरेली। अस्पतालों में कोरोना का खतरा देखते हुए क्यारा गांव में रहने वाले लाल सिंह अपनी पत्नी साक्षी का प्रसव घर पर ही कराना चाह रहे थे लेकिन रविवार को ऐन मौके पर साक्षी की हालत बिगड़ी तो एंबुलेंस बुलानी पड़ी। एंबुलेंस अस्पताल पहुंचती, इससे पहले ही साक्षी की हालत नाजुक हो गई। आगे के सफर में लगने वाला वक्त उसकी जिंदगी पर भारी पड़ सकता था लिहाजा एंबुलेंस पर तैनात इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन ने उसे रास्ते में ही खड़ा करा लिया और फिर आशा की मदद से एंबुलेंस में ही साक्षी का प्रसव करा दिया। साक्षी ने स्वस्थ बेटे को जन्म दिया और खुद उसकी भी जान बच गई। साक्षी और उसका परिवार एंबुलेंस स्टाफ का मुरीद हो गया।
कोरोना काल में जब एक तरफ प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की जेबें खाली कराने के एक के बाद एक नए मामले सामने आ रहे हैं, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के एंबुलेंस स्टाफ ने उन गर्भवती महिलाओं की मदद कर मिसाल कायम की है जिनकी जिंदगी मुश्किल में पड़ गई थी। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले चार महीनों 25 गर्भवती महिलाओं का प्रसव एंबुलेंस में हुआ है। जिले के ग्रामीण इलाकों से अस्पताल ले जाई जा रही इन महिलाओं में से कई हालत पहले से नाजुक थी और कई की हालत रास्ते में नाजुक हो गई थी। एंबुलेंस के स्टाफ ने अपनी नौकरी दांव पर लगाकर आशाओं के सहयोग से एंबुलेंस में ही उनका प्रसव कराने का जोखिम लिया और उनकी जान बचाने में कामयाब भी रहा।
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रेनुका और ममता भी जिंदगी बचाने के लिए एंबुलेंस स्टाफ की शुक्रगुजार

कुछ ही दिन पहले भोजीपुरा के गांव मल्लपुर के दिलीप सिंह की पत्नी रेनुका को प्रसव पीड़ा होने के बाद एंबुलेस से अस्पताल ले जाया जा रहा था। उनकी हालत भी रास्ते में ही नाजुक हो गई जिसके बाद ईएमटी और आशा ने एंबुलेंस में ही उनका प्रसव कराया। प्रसव के बाद भी उनकी हालत ठीक न होने पर उन्हें आननफानन में ले जाकर अस्पताल में भी भर्ती कराया। नकटिया में रहने वाली ममता देवी की जून में प्रसव से पहले हालत बिगड़ गई थी। एंबुलेंस स्टाफ ने उन्हें अस्पताल ले जाने में समय खराब करने के बजाय आशा की मदद से एंबुलेंस में ही प्रसव करा दिया।
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गर्भवती महिलाओं की हालत नाजुक होने के बाद भी भर्ती नहीं करते अस्पताल

कोरोना के दौर में निजी अस्पताल भी गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों की मुश्किल बढ़ा रहे हैं। गर्भवती महिला के संक्रमित होने की आशंका से वे उसे भर्ती करने से ही इनकार कर देते हैं। कोविड टेस्ट की रिपोर्ट आने तक इन महिलाओं की जान संकट में रहती है। ऐसे नाजुक दौर में स्वास्थ्य विभाग के एंबुलेंस स्टाफ ने बड़ी मिसाल कायम की है।

शासन से मिली शाबासी.. प्रदेश में टॉप 5 में बरेली का एंबुलेंस स्टाफ 

शासन की ओर से हाल ही में उन जिलों की रैंकिंग जारी की है जहां कोरोना के दौर में संक्रमण की आशंका के बावजूद एंबुलेंस पर तैनात स्टाफ ने स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में बढ़चढ़कर सहयोग किया। इस रिपोर्ट में बरेली को टॉप पांच में जगह मिली है। बता दें कि कोरोना संक्रमितों को अस्पताल पहुंचाने या कोरोना से मरने वालों को श्मशान भूमि ले जाने में दर्जन भर से ज्यादा एंबुलेंसकर्मी संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से ज्यादातर स्वस्थ होने के बाद फिर ड्यूटी पर लौट चुके हैं।

गर्भवती महिलाओं को रास्ते में समस्या होने पर तत्काल इमरजेंसी मेडिकल सुविधा मुहैया कराने की परिकल्पना एंबुलेंस स्टाफ सच कर रहा है। संक्रमण काल में भी लोग इमरजेंसी में 102 और 108 एंबुलेंस सेवा का लाभ लें। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ
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