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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   The inert desire and lack of ethics are the root cause of all the problems

अति आकांक्षा और नैतिकता में कमी सारी समस्याओं की जड़

Fri, 22 Sep 2017 12:59 AM IST
बरेली
बरेली Updated Fri, 22 Sep 2017 12:59 AM IST
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आज की पूरी पीढ़ी में ही नैतिकता और व्यवहारिकता न के बराबर है। दूसरी ओर आकांक्षाएं अति की हैं। समाज की सारी समस्याओं का कारण भी यही है। युवाओं में इसी भटकाव के कारण परिवार में विघटन, समाज में अपराध और भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। जब यह भटकाव नहीं था तो समस्याएं भी इतनी नहीं थी। आदमी सुखी और शांत था, लेकिन अब अशांत और दुखी है। महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. उमाकान्तानंद सरस्वती जी महाराज ने एक विशेष साक्षात्कार में अमर उजाला से ये बातें कहीं। 
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राजेंद्र नगर में एक खास भेंट के दौरान महामंडलेश्वर ने युवाओं में भटकाव और तनाव के सवाल पर कहा कि युवाओं को तकनीकी ज्ञान तो दिया जा रहा है, लेकिन व्यवहारिक ज्ञान नहीं। उन्हेें जीवन दर्शन का पाठ नहीं पढ़ाया जा रहा। यही कारण है कि युवा गलत रास्ते पर जा रहा है। समाज और नौकरशाही में भ्रष्टाचार के लिए उन्होंने नैतिकता की कमी को वजह बताया। कहा, जब ज्ञान और कर्तव्यनिष्ठा नहीं होगी तो कोई भी भ्रष्ट हो जाएगा। आज तो लोगों के जीवन का उद्देश्य ही नोट कमाना रह गया है। 
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उन्होंने कहा कि इस स्थिति में सुधार के लिए दबाव बनाया जा सकता है, लेकिन इसे खत्म करने के लिए नैतिक ज्ञान की जरूरत है। महामंडलेश्वर ने परिवार में विघटन और तलाक जैसी घटनाओं के संदर्भ में कहा कि शिक्षा का अभाव और अहम का टकराव परिवार खंडित कर रहा है। उन्होंने टीवी सीरियल ‘तलाक क्यों’ का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति सभी के लिए कठिन है। ब्यूरोक्रेसी में आलस्य और बेईमानी है। इसे ठीक करने में समय लगेगा। समय अपने आप में हर समस्या का इलाज है। समय ही यह स्थिति भी बदल देगा। देश का भविष्य उज्ज्वल है। जीवन के अभिप्राय की बात पर स्वामी जी ने कहा कि सुख साधन में नहीं सुख तो मन में हैं। आकांक्षाएं अग्नि में घी के समान हैं। इसलिए आकांक्षाएं पालना गलत नहीं। अति आकांक्षाएं पाल लेना अशांति पैदा करती है। 
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संक्षिप्त परिचय
जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी डा. उमाकान्तानंद सरस्वती जी महाराज ने 12 वर्ष की अवस्था में गुरु से दीक्षा लेकर 16 वर्ष की उम्र में गृह त्याग कर दिया था। पिछले 25 वर्षों से रामायण, गीता, वेद, उपनिषद और भारतीय संस्कृति के विभिन्न विषयों पर देश विदेश में प्रवचन करते आ रहे हैं। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार से पीएचडी की उपाधि हासिल करने वाले स्वामी जी व्यक्तित्व निर्माण और जीवन लक्ष्य प्राप्ति हेतु शाश्वत जीवन विद्या पर कोर्स करा रहे हैं। महाराज जी को 2014 में एनएआई (न्यूज पेपर ऐसोसिएशन आफ इंडिया) की ओर से संत की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। 
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