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Bareilly News: विज्ञान के प्रति बढ़ रहा युवाओं का रुझान, नवाचार के नायक बने
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बरेली। युवाओं का रुझान विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार पर है। शहर में ऐसे युवाओं की कमी नहीं है जो वैज्ञानिक आविष्कार कर रहे हैं। मॉडलों पर घंटों कार्य करने के साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी में भी भाग ले चुके हैं। युवाओं का कहना है कि घंटों प्रयोग कर कुछ बनाना उत्पादक महसूस कराता है।
फीस के रुपये बचाकर बनाई इलेक्ट्रिक बाइक
भुता के रहने वाले समय हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मोटर प्रदर्शनी से भाग लेकर लौटे हैं। वहां उन्होंने मोटर स्पोर्ट्स वर्ग में शीर्ष पांच में जगह बनाई। समय ने बताया तीसरी कक्षा से वह छोटे विद्युत खिलौनों पर प्रयोग करते आ रहे हैं। कक्षा नौ में एक ड्रोन बनाने में कामयाबी मिली। बीटेक के छात्र समय ने अपनी फीस से रुपये बचाकर प्रथम वर्ष में इलेक्ट्रिक बाइक बनाई। वर्तमान में वह एक कृषि ड्रोन पर कार्य कर रहे हैं। समय ने बताया कई बार पैसे की कमी के कारण समस्या आती है, लेकिन पिता हमेशा साथ देते हैं।
अहकाफ ने बनाया ऑनलाइन गेम
नकटिया के रहने वाले अहकाफ इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। प्रथम वर्ष में उन्होंने इंडीपिक्सल नाम का एक गेम बनाया। बाद इसे बंद भी कर दिया। इसके बाद जिला स्तर पर हुए हैकाथॉन में उन्होंने अपने तीन एआई मॉडल प्रस्तुत किए। अहकाफ ने बताया 12वीं से पहले नहीं पता था आगे क्या करना है। एक साल इंजीनियरिंग की तैयारी की लेकिन परीक्षा नहीं दी। लगा मैं ऑनलाइन गेम में बेहतर कर सकता हूं तो इस दिशा में काम शुरू किया। वर्तमान में मैं सुखोई-35 की तर्ज पर एक छोटे प्रतिरूप पर काम कर रहा हूं।
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उधार लेकर कर रहे अविष्कार
सिकलापुर के रहने वाले गोपाल ने बीएससी के बाद एक स्कूल की प्रयोगशाला में सहायक के रूप में प्रयोग करने शुरू किए। चार साल की मेहनत के बाद पानी से चलने वाली ट्रेन बनाई। रेल विभाग ने भी इसकी सराहना की। गोपाल ने बताया वर्तमान में उन्होंने एक जेनरेटर बनाया है। इस जेनरेटर को 500 वाट की ऊर्जा दी जाए तो वह 700 वाट ऊर्जा प्रकट करता है। ये भौतिक विज्ञान के नियमों को चुनौती दे सकता है। गोपाल का कहना है इस अपने सभी प्रयोगों को वह उधारी लेकर पूरा कर रहे हैं। लेकिन नए प्रयोग करना उनका जुनून है। संवाद
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फीस के रुपये बचाकर बनाई इलेक्ट्रिक बाइक
भुता के रहने वाले समय हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मोटर प्रदर्शनी से भाग लेकर लौटे हैं। वहां उन्होंने मोटर स्पोर्ट्स वर्ग में शीर्ष पांच में जगह बनाई। समय ने बताया तीसरी कक्षा से वह छोटे विद्युत खिलौनों पर प्रयोग करते आ रहे हैं। कक्षा नौ में एक ड्रोन बनाने में कामयाबी मिली। बीटेक के छात्र समय ने अपनी फीस से रुपये बचाकर प्रथम वर्ष में इलेक्ट्रिक बाइक बनाई। वर्तमान में वह एक कृषि ड्रोन पर कार्य कर रहे हैं। समय ने बताया कई बार पैसे की कमी के कारण समस्या आती है, लेकिन पिता हमेशा साथ देते हैं।
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अहकाफ ने बनाया ऑनलाइन गेम
नकटिया के रहने वाले अहकाफ इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। प्रथम वर्ष में उन्होंने इंडीपिक्सल नाम का एक गेम बनाया। बाद इसे बंद भी कर दिया। इसके बाद जिला स्तर पर हुए हैकाथॉन में उन्होंने अपने तीन एआई मॉडल प्रस्तुत किए। अहकाफ ने बताया 12वीं से पहले नहीं पता था आगे क्या करना है। एक साल इंजीनियरिंग की तैयारी की लेकिन परीक्षा नहीं दी। लगा मैं ऑनलाइन गेम में बेहतर कर सकता हूं तो इस दिशा में काम शुरू किया। वर्तमान में मैं सुखोई-35 की तर्ज पर एक छोटे प्रतिरूप पर काम कर रहा हूं।
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उधार लेकर कर रहे अविष्कार
सिकलापुर के रहने वाले गोपाल ने बीएससी के बाद एक स्कूल की प्रयोगशाला में सहायक के रूप में प्रयोग करने शुरू किए। चार साल की मेहनत के बाद पानी से चलने वाली ट्रेन बनाई। रेल विभाग ने भी इसकी सराहना की। गोपाल ने बताया वर्तमान में उन्होंने एक जेनरेटर बनाया है। इस जेनरेटर को 500 वाट की ऊर्जा दी जाए तो वह 700 वाट ऊर्जा प्रकट करता है। ये भौतिक विज्ञान के नियमों को चुनौती दे सकता है। गोपाल का कहना है इस अपने सभी प्रयोगों को वह उधारी लेकर पूरा कर रहे हैं। लेकिन नए प्रयोग करना उनका जुनून है। संवाद