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Bareilly News: पोर्टल पर अंक दर्ज करने वाले का नहीं चला पता
Mon, 06 Jul 2026 01:05 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Mon, 06 Jul 2026 01:05 AM IST
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बरेली। बरेली कॉलेज के फारसी विभाग में आंतरिक परीक्षाओं के अंक बिना प्रोफेसर की जानकारी के पोर्टल पर दर्ज करने के मामले में पांच सदस्यीय टीम ने कई लोगों से पूछताछ की। हालांकि, पोर्टल पर अंक दर्ज करने वाले का अब तक पता नहीं लग सका है। प्रकरण सामने आने के बाद पासवर्ड बदल दिया गया है।
विभाग के लॉगिन पोर्टल का पासवर्ड प्राचार्य कार्यालय के छह लोगों के पास है। सभी को अलग-अलग बुलाकर पूछताछ की गई। सभी ने लिखित में दिया कि उन्हें इस प्रकरण की जानकारी नहीं है।
समिति की संयोजक व उप प्राचार्य प्रो. वंदना शर्मा ने बताया कि कॉलेज के पास कोई तरीका नहीं है, जिससे पता लगाया जा सके कि लॉगिन किस आईपी एड्रेस से हुआ है। फिलहाल पहले से दर्ज अंकों को हटा दिया गया है। प्रोफेसर की ओर से दिए गए अंक ही पोर्टल पर दर्ज किए गए हैं।
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नई व्यवस्था के अनुसार जो भी कर्मचारी पोर्टल पर अंक चढ़ाएगा वह एक कॉपी प्राचार्य कक्ष में अपने व संबंधित शिक्षक के हस्ताक्षर के साथ जमा भी करेगा।
यह था मामला
विभाग के प्रो. सदरे आलम ने प्राचार्य को लिखे पत्र में कहा है कि 22 जून को पोर्टल पर मिडटर्म व आंतरिक परीक्षाओं के अंक पहले से ही दर्ज थे। संदेह होने पर उन्होंने प्राचार्य प्रो. ओपी राय को शिकायत की। इसके बाद पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई थी।
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विभाग के लॉगिन पोर्टल का पासवर्ड प्राचार्य कार्यालय के छह लोगों के पास है। सभी को अलग-अलग बुलाकर पूछताछ की गई। सभी ने लिखित में दिया कि उन्हें इस प्रकरण की जानकारी नहीं है।
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समिति की संयोजक व उप प्राचार्य प्रो. वंदना शर्मा ने बताया कि कॉलेज के पास कोई तरीका नहीं है, जिससे पता लगाया जा सके कि लॉगिन किस आईपी एड्रेस से हुआ है। फिलहाल पहले से दर्ज अंकों को हटा दिया गया है। प्रोफेसर की ओर से दिए गए अंक ही पोर्टल पर दर्ज किए गए हैं।
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नई व्यवस्था के अनुसार जो भी कर्मचारी पोर्टल पर अंक चढ़ाएगा वह एक कॉपी प्राचार्य कक्ष में अपने व संबंधित शिक्षक के हस्ताक्षर के साथ जमा भी करेगा।
यह था मामला
विभाग के प्रो. सदरे आलम ने प्राचार्य को लिखे पत्र में कहा है कि 22 जून को पोर्टल पर मिडटर्म व आंतरिक परीक्षाओं के अंक पहले से ही दर्ज थे। संदेह होने पर उन्होंने प्राचार्य प्रो. ओपी राय को शिकायत की। इसके बाद पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई थी।