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Bareilly News: एक आईएएस और तीन पीसीएस अधिकारियों तक पहुंच सकती है जांच की आंच

Wed, 04 Sep 2024 07:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 04 Sep 2024 07:13 AM IST
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The heat of investigation may reach one IAS and three PCS officers
लोगो भू-अधिग्रहण घोटाला-जांच की जद में आए एक आईएएस व तीन पीसीएस अधिकारी
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बरेली। एक आईएएस व तीन पीसीएस अधिकारी भी भूमि अधिग्रहण घोटाले की जद में आ गए हैं। बरेली-सितारगंज हाईवे का चौड़ीकरण मंजूर होने के बाद आईएएस अधिकारी ने जमीन खरीदकर मुआवजा हासिल किया। वहीं, भू उपयोग परिवर्तित करने के खेल में तीन पीसीएस अधिकारी शामिल रहे। अब इन अधिकारियों ने बचाव का रास्ता तलाशना शुरू कर दिया है, लेकिन शासन की जीरो टॉलरेंस नीति की वजह से इन पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। जांच टीम इसकी पड़ताल कर रही है कि किस पीसीएस अधिकारी के कार्यकाल में भू उपयोग परिवर्तित कर घोटाले की नींव रखी गई?
भू उपयोग परिवर्तन में लेखपाल, कानूनगो, नायब तहसीलदार, तहसीलदार के हस्ताक्षर के बाद एसडीएम अंतिम निर्णय लेते हैं। इसमें खेल का अंदेशा है। इस पर जांच टीम की नजर है। टीम एक-एक मामले को परखेगी। बताया जा रहा है कि तीन पीसीएस अधिकारियों के कार्यकाल में भू उपयोग में बदलाव हुए। बरेली-सितारगंज हाईवे और रिंग रोड के लिए अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद भू उपयोग में बदलाव के कुछ मामले तो एनएचएआई मुख्यालय से आई टीम की जांच में ही सामने आ चुके हैं। यह आर्थिक अपराध का बड़ा मामला बन सकता है। एनएचएआई के चेयरमैन संतोष कुमार यादव पहले ही यूपी के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह को पत्र भेजकर आर्थिक अपराध शाखा से जांच कराने की सिफारिश कर चुके हैं।
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कर्मचारियों की जुबां खुली तो सामने आएगी हकीकत
बरेली। घोटाले की तह तक जाने के लिए जांच टीम लेखपाल, कानूनगो, अमीन, नायब तहसीलदार और तहसीलदार आदि से बात करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि अगर इनकी जुबां खुली तो अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। लेखपाल और अमीन उन अधिकारियों का नाम उजागर कर सकते हैं, जिनके इशारे पर यह फर्जीवाड़ा हुआ था। लेखपाल से लेकर तहसीलदार तक की रिपोर्ट लगी और तत्कालीन एसडीएम ने भूमि के श्रेणीकरण में बदलाव किया। इसके बाद अधिक मुआवजा तय हो सका। बताते हैं कि बरेली-सितारगंज हाईवे की अधिसूचना जारी होने के बाद भुगतान होने तक खेल चलता रहा। एनएचएआई मुख्यालय से आई टीम ने पीलीभीत और ऊधमसिंह नगर में छह मामलों में 38 करोड़ रुपये का घोटाला पकड़ा गया था। खेती की जमीन पर भवन और गोदाम आदि दर्शाकर राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से ऊधमसिंह नगर, लखनऊ और अन्य स्थानों के कुछ लोगों ने अधिक भुगतान हासिल किए हैं। अमर उजाला ब्यूरो
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