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Bareilly News: रुहेलखंड विश्वविद्यालय में शोध का ग्राफ औंधे मुंह गिरा
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22वें दीक्षांत समारोह में 187 की तुलना में इस बार सिर्फ 113 को ही मिली उपाधि
बरेली। महात्मा ज्योति फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय की उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध को बढ़ावा देने के दावों पर हाल ही में आयोजित दीक्षांत समारोह के आंकड़े ने गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इस बार डॉक्टरेट (पीएचडी) की उपाधि पाने वाले शोधार्थियों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
22वें दीक्षांत समारोह में 187 की तुलना में इस बार सिर्फ 113 को ही उपाधि मिली है। 20वें दीक्षांत समारोह में 77 और 21वें में 148 शोधार्थियों को उपाधि दी गई थी। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि विश्वविद्यालय एक साल के भीतर ही अपने शोध कार्यों के निष्पादन में बड़ी कमी का सामना कर रहा है।
शोध निदेशालय के निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि बीते वर्षो में बैकलॉग वाले बहुत विद्यार्थी थे, लेकिन अब कोई बैकलॉग वाला नहीं है, अब अधिकतर शोधर्थियों की पीएचडी पूरी होने में लंबा समय नहीं लगता है। इसी वजह से संख्या कम हुई है। संवाद
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बरेली। महात्मा ज्योति फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय की उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध को बढ़ावा देने के दावों पर हाल ही में आयोजित दीक्षांत समारोह के आंकड़े ने गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इस बार डॉक्टरेट (पीएचडी) की उपाधि पाने वाले शोधार्थियों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
22वें दीक्षांत समारोह में 187 की तुलना में इस बार सिर्फ 113 को ही उपाधि मिली है। 20वें दीक्षांत समारोह में 77 और 21वें में 148 शोधार्थियों को उपाधि दी गई थी। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि विश्वविद्यालय एक साल के भीतर ही अपने शोध कार्यों के निष्पादन में बड़ी कमी का सामना कर रहा है।
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शोध निदेशालय के निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि बीते वर्षो में बैकलॉग वाले बहुत विद्यार्थी थे, लेकिन अब कोई बैकलॉग वाला नहीं है, अब अधिकतर शोधर्थियों की पीएचडी पूरी होने में लंबा समय नहीं लगता है। इसी वजह से संख्या कम हुई है। संवाद
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