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परिजन गए अपनों को भूल.. समाजसेवियों ने सिराए फूल

Thu, 17 Sep 2020 02:18 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2020 02:18 AM IST
सार

  • सिटी और संजयनगर श्मशान भूमि में रखी अस्थियों का हुआ विसर्जन
  • गुलाबबाड़ी श्मशान में रखी अस्थियां भी आज कछला में हाेंगी विसर्जित

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The family forgot their loved ones .. social workers stole flowers
गुलाबबाड़ी श्मशान भूमि में बरसों से पड़ीं अस्थियों को सिराने ले जाते समाजसेवी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

विस्तार

बरेली। पितृ पक्ष में पुरखों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण की परंपरा बरसों पुरानी है। मगर कुछ लोग अपने कार्यों में ऐसे व्यस्त हो गए हैं कि इस परंपरा को ही भूल गए हैं। उनके पास अपनों की अस्थियां विसर्जित करने तक का वक्त नहीं है। ऐसे में श्मशान भूमि में लटक रहे अस्थि कलशों का विसर्जन न हो पाने के संबंध में अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की तो समाजसेवियों ने संजयनगर और सिटी श्मशान में रखीं अस्थियों का विसर्जन करा दिया। अब बृहस्पतिवार को गुलाबबाड़ी श्मशान भूमि में रखी अस्थियों का कछला गंगाघाट पर विसर्जन होगा।
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शहर के तमाम परिवारों ने अपने पुरखों का अंतिम संस्कार करने के बाद उनके अस्थि कलश (फूल) श्मशान भूमि में ही रख दिए और फिर लौटकर उनकी सुध नहीं ली। इस वजह से साल भर से यह अस्थि कलश श्मशान भूमि में ही लटक रहे थे। श्राद्ध के दिन शुरू हुए तो अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया तो कई समाजसेवी संस्थाएं इस पुनीत कार्य के लिए आगे आईं। सिटी श्मशान भूमि ट्रस्ट के सचिव विजय अग्रवाल ने बताया कि 13 सितंबर को एकादशी के दिन समाजसेवी नीलम विजयन और राजेंद्र विजयन ने वहां रखीं अस्थियों को विधि विधान से हरिद्वार में विसर्जित करा दिया। इससे पहले संजयनगर श्मशान भूमि ट्रस्ट ने भी हरिद्वार में अस्थियों का विसर्जन कराया।
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बुधवार को सर्व धर्म सेवा समिति के संरक्षक ज्ञानेश साहू और संस्थापक प्रवीण उपाध्याय गुलाबबाड़ी श्मशान भूमि पहुंचे। उन्होंने वहां रखे पिछले सालों के सभी अस्थि कलश एकत्र किए। समिति के लोगों ने बताया कि बृहस्पतिवार को पितृ विसर्जन अमावस्या के अवसर पर इन अस्थियों को कछला में गंगा में विसर्जित किया जाएगा।
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