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Bareilly News: सीता हरण की लीला का किया गया मंचन
Sun, 18 Oct 2026 01:25 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sun, 18 Oct 2026 01:25 AM IST
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बरेली। कूर्मांचल नगर में आयोजित पर्वतीय समाज की रामलीला के चौथे दिन शनिवार को राम-भरत मिलाप, सूर्पणखा नासिका छेदन का मंचन मुख्य आकर्षण रहा है। खरदूषण वध, सीता हरण, जटायु मरण आदि लीलाओं का मंचन किया गया।
पर्वतीय समाज के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह दियोलिया और महासचिव डॉ. नरेंद्र सिंह बिष्ट ने मुख्य अतिथि पार्थ गौतम और विशिष्ट अतिथि कर्नल राजेंद्र सिंह मेहता का सम्मान किया। पर्वतीय समाज के पूर्व कार्यकर्ताओं की धर्म पत्नियों को पर्वतीय समाज की ओर से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कुंवर सिंह बिष्ट, मदन सिंह बिष्ट, इंदर सिंह बिष्ट, चंद्र प्रकाश जोशी, अतुल डालाकोटी, जीत सिंह वोहरा आदि का विशेष योगदान रहा।
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माता शबरी के आश्रम में पहुंचे श्रीराम
बरेली। मढ़ीनाथ में आयोजित रामलीला महोत्सव में शनिवार को भगवान श्रीराम के वनवास काल की विभिन्न लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। मंचन के दौरान शूर्पणखा अंगभंग, खर-दूषण वध, मारीच वध, सीता हरण, जटायु-रावण युद्ध, जटायु उद्धार, शबरी पर भगवान श्रीराम की कृपा तथा भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता तक की लीलाओं का सजीव चित्रण किया गया। इस मौके पर अनिल चौधरी, दिनेश यादव, चरनजीत यादव उर्फ टिंकू, रामदीन आदि उपस्थित रहे।
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रावण ने विभीषण को लंका से निकाला
बरेली। श्री रामलीला सभा सुभाष नगर में चल रही रामलीला में शनिवार को विभीषण शरणागति, सेतुबंध रामेश्वरम व अंगद-रावण संवाद की लीला का मंचन किया गया। लीला में दिखाया गया कि रावण विभीषण को लंका से निकाल देता है तो विभीषण श्रीराम की शरण में चले जाते हैं। इस प्रसंग के बाद रामेश्वरम की स्थापना की कथा का मंचन किया गया। लीला में दिखाया गया कि श्रीराम पुरोहित के रूप में रावण को बुलाते हैं। रावण वहां आकर पूजा संपन्न कराता है। इसके बाद अंगद को लंका में दूत बनाकर भेजने और अंगद-रावण संवाद की लीला दिखाई गई। यहां राज कुमार तिवारी, डॉ. अजय शर्मा, सुनील सक्सेना, मिलन, श्यामदीप सक्सेना, अमूल श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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लंका जलते ही गूंजा जय श्रीराम
बरेली। श्री रानी महालक्ष्मी बाई रामलीला समिति की ओर से चल रहे रामलीला मंचन में शनिवार को लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। बड़ा बाग स्थित रामलीला मैदान में हुए मंचन के दौरान दिखाया गया कि हनुमान अशोक वाटिका में शोकग्रस्त बैठी माता सीता के सम्मुख पहुंचकर श्रीराम की दी हुई मुद्रिका (अंगूठी) गिरा दी। उन्होंने माता सीता को ढांढ़स बंधाया। चूड़ामणि साथ लेकर माता से विदा लेने के बाद हनुमान ने अशोक वाटिका को तहस-नहस कर दिया। मेघनाद ने उन्हें ब्रह्मपाश में बांधकर रावण के दरबार में पेश किया। जहां रावण के आदेश पर हनुमान जी की पूंछ में कपड़ा और घी डालकर आग लगा दी गई। पूंछ में आग लगते ही वीर हनुमान ने एक छलांग से रावण के घमंड को चकनाचूर करते हुए पूरी सोने की लंका को आग की लपटों में झोंक दिया। इस अलौकिक लंका दहन के दृश्य को देखकर श्रद्धालुओं ने ''''जय श्रीराम'''' और ''''जय बजरंगबली'''' के नारों से पूरे आकाश को गुंजायमान कर दिया।
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पर्वतीय समाज के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह दियोलिया और महासचिव डॉ. नरेंद्र सिंह बिष्ट ने मुख्य अतिथि पार्थ गौतम और विशिष्ट अतिथि कर्नल राजेंद्र सिंह मेहता का सम्मान किया। पर्वतीय समाज के पूर्व कार्यकर्ताओं की धर्म पत्नियों को पर्वतीय समाज की ओर से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कुंवर सिंह बिष्ट, मदन सिंह बिष्ट, इंदर सिंह बिष्ट, चंद्र प्रकाश जोशी, अतुल डालाकोटी, जीत सिंह वोहरा आदि का विशेष योगदान रहा।
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माता शबरी के आश्रम में पहुंचे श्रीराम
बरेली। मढ़ीनाथ में आयोजित रामलीला महोत्सव में शनिवार को भगवान श्रीराम के वनवास काल की विभिन्न लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। मंचन के दौरान शूर्पणखा अंगभंग, खर-दूषण वध, मारीच वध, सीता हरण, जटायु-रावण युद्ध, जटायु उद्धार, शबरी पर भगवान श्रीराम की कृपा तथा भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता तक की लीलाओं का सजीव चित्रण किया गया। इस मौके पर अनिल चौधरी, दिनेश यादव, चरनजीत यादव उर्फ टिंकू, रामदीन आदि उपस्थित रहे।
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रावण ने विभीषण को लंका से निकाला
बरेली। श्री रामलीला सभा सुभाष नगर में चल रही रामलीला में शनिवार को विभीषण शरणागति, सेतुबंध रामेश्वरम व अंगद-रावण संवाद की लीला का मंचन किया गया। लीला में दिखाया गया कि रावण विभीषण को लंका से निकाल देता है तो विभीषण श्रीराम की शरण में चले जाते हैं। इस प्रसंग के बाद रामेश्वरम की स्थापना की कथा का मंचन किया गया। लीला में दिखाया गया कि श्रीराम पुरोहित के रूप में रावण को बुलाते हैं। रावण वहां आकर पूजा संपन्न कराता है। इसके बाद अंगद को लंका में दूत बनाकर भेजने और अंगद-रावण संवाद की लीला दिखाई गई। यहां राज कुमार तिवारी, डॉ. अजय शर्मा, सुनील सक्सेना, मिलन, श्यामदीप सक्सेना, अमूल श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
लंका जलते ही गूंजा जय श्रीराम
बरेली। श्री रानी महालक्ष्मी बाई रामलीला समिति की ओर से चल रहे रामलीला मंचन में शनिवार को लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। बड़ा बाग स्थित रामलीला मैदान में हुए मंचन के दौरान दिखाया गया कि हनुमान अशोक वाटिका में शोकग्रस्त बैठी माता सीता के सम्मुख पहुंचकर श्रीराम की दी हुई मुद्रिका (अंगूठी) गिरा दी। उन्होंने माता सीता को ढांढ़स बंधाया। चूड़ामणि साथ लेकर माता से विदा लेने के बाद हनुमान ने अशोक वाटिका को तहस-नहस कर दिया। मेघनाद ने उन्हें ब्रह्मपाश में बांधकर रावण के दरबार में पेश किया। जहां रावण के आदेश पर हनुमान जी की पूंछ में कपड़ा और घी डालकर आग लगा दी गई। पूंछ में आग लगते ही वीर हनुमान ने एक छलांग से रावण के घमंड को चकनाचूर करते हुए पूरी सोने की लंका को आग की लपटों में झोंक दिया। इस अलौकिक लंका दहन के दृश्य को देखकर श्रद्धालुओं ने ''''जय श्रीराम'''' और ''''जय बजरंगबली'''' के नारों से पूरे आकाश को गुंजायमान कर दिया।