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Bareilly News: बदलते मौसम का असर.... बढ़े सर्दी-खांसी के मरीज, डॉक्टर मिले ही नहीं
Fri, 03 Mar 2023 02:08 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Fri, 03 Mar 2023 02:08 AM IST
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बरेली। मौसम में बदलाव का असर सेहत पर दिख रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों में 80 फीसदी से ज्यादा सर्दी-खांसी, सांस और बुखार के हैं। आमतौर पर ओपीडी में सोमवार और शनिवार को ज्यादा भीड़ रहती है लेकिन वायरल के प्रकोप के बीच बृहस्पतिवार को भी ओपीडी में लाइनें लगी रहीं। इस बीच डॉक्टरों के ओपीडी से नदारद रहने के कारण मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
फरवरी मध्य से ही तापमान बढ़ने के साथ वायरल का प्रकोप भी बढ़ने लगा था। इतना ही नहीं इस बीच बेमौसम मलेरिया के मामले भी निकलने लगे। इन दिनों जिला अस्पताल की ओपीडी में औसतन आठ से नौ सौ मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। इनमें 80 फीसदी से ज्यादा मरीज खांसी, सर्दी-जुकाम, बुखार के होते हैं। जिला अस्पताल से नाक-कान-गला, नेत्र और त्वचा रोग विभाग पहले ही तीन सौ बेड अस्पताल में शिफ्ट किए जा चुके हैं। यहां फिजीशियन, सर्जन और आर्थोपेडिक सर्जन ही बैठते हैं। बृहस्पतिवार को फिजीशियन डॉ. राजीव कुमार गुप्ता और डॉ. एएम अग्रवाल के कक्षों के बाहर लाइन लगी रहीं। पांच फिजीशियन में दो फिजीशियन ही ओपीडी में दिखे। ऐसे में मरीजों को दिक्कतें हुईं। हालांकि, कुछ डॉक्टर बाद में ओपीडी पहुंच गए।
ओपीडी में दिक्कतों के साथ मरीजों को खांसी के सिरप, पेट गैस और एलर्जी में काम आने वाली दवाएं अस्पताल में नहीं मिल पा रही हैं। गौर करने की बात यह है कि यह दवाएं जिला अस्पताल स्थित जेनरिक दवाओं के जनऔषधि केंद्र पर भी खत्म हो गई हैं। मरीजों को बाजार से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। चेस्ट फिजीशियन डॉ. एएम अग्रवाल ने बताया कि इन दिनों छाती संबंधी मरीजों के अलावा वायरल के मरीज ज्यादा आ रहे हैं।
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पर्चा खिड़की से लेकर औषधि केंद्र तक लाइनें
जिला अस्पताल में पर्चा खिड़की से लेकर औषधि केंद्र तक मरीजों की लाइन लग रही हैं। पैथोलॉजी लैब में इन दिनों रोजाना ढाई सौ से ज्यादा जांचें भी हो रही हैं। सांस, फेफड़ा और सर्दी-खांसी का शिकार 30 से 40 मरीजों के एक्स-रे का भी डॉक्टर सुझाव दे रहे हैं। ऐसे में यहां भी लाइन लग रही हैं। सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या ज्यादा होने के बीच जिला अस्पताल में इन्हेलर की खपत पड़ गई है।
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तीन सौ बेड के अस्पताल में भी यही हाल, दवाओं की किल्लत
जिला अस्पताल ही नहीं तीन सौ बेड अस्पताल में भी इन दिनों बुरा हाल है। यहां दवाओं की भी किल्लत बनी हुई है। कुत्ता और बंदर के काटने पर दी जाने वाली एंटी रैबीज वैक्सीन को लेकर भी मारामारी हो रही है। दरअसल, जिला अस्पताल से एंटी रैबीज वैक्सीन विभाग भी तीन सौ बेड अस्पताल में शिफ्ट किया जा चुका है। यहां एंटी रैबीज वैक्सीन के लिए शहर के साथ गांवों के लोग भी पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के साथ दवाओं की किल्लत के बीच यहां भी आने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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वर्जन
बृहस्पतिवार को एक जनरल फिजीशियन की ईएमओ ड्यूटी थी। अन्य डॉक्टर ओपीडी में बैठे थे। दवाओं की कमी को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली है। इसे दिखवाया जाएगा। डॉक्टर समय से ओपीडी में बैठें इसको लेकर भी सख्ती की जाएगी।
- डॉ. अलका शर्मा, सीएमएस
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फरवरी मध्य से ही तापमान बढ़ने के साथ वायरल का प्रकोप भी बढ़ने लगा था। इतना ही नहीं इस बीच बेमौसम मलेरिया के मामले भी निकलने लगे। इन दिनों जिला अस्पताल की ओपीडी में औसतन आठ से नौ सौ मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। इनमें 80 फीसदी से ज्यादा मरीज खांसी, सर्दी-जुकाम, बुखार के होते हैं। जिला अस्पताल से नाक-कान-गला, नेत्र और त्वचा रोग विभाग पहले ही तीन सौ बेड अस्पताल में शिफ्ट किए जा चुके हैं। यहां फिजीशियन, सर्जन और आर्थोपेडिक सर्जन ही बैठते हैं। बृहस्पतिवार को फिजीशियन डॉ. राजीव कुमार गुप्ता और डॉ. एएम अग्रवाल के कक्षों के बाहर लाइन लगी रहीं। पांच फिजीशियन में दो फिजीशियन ही ओपीडी में दिखे। ऐसे में मरीजों को दिक्कतें हुईं। हालांकि, कुछ डॉक्टर बाद में ओपीडी पहुंच गए।
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ओपीडी में दिक्कतों के साथ मरीजों को खांसी के सिरप, पेट गैस और एलर्जी में काम आने वाली दवाएं अस्पताल में नहीं मिल पा रही हैं। गौर करने की बात यह है कि यह दवाएं जिला अस्पताल स्थित जेनरिक दवाओं के जनऔषधि केंद्र पर भी खत्म हो गई हैं। मरीजों को बाजार से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। चेस्ट फिजीशियन डॉ. एएम अग्रवाल ने बताया कि इन दिनों छाती संबंधी मरीजों के अलावा वायरल के मरीज ज्यादा आ रहे हैं।
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पर्चा खिड़की से लेकर औषधि केंद्र तक लाइनें
जिला अस्पताल में पर्चा खिड़की से लेकर औषधि केंद्र तक मरीजों की लाइन लग रही हैं। पैथोलॉजी लैब में इन दिनों रोजाना ढाई सौ से ज्यादा जांचें भी हो रही हैं। सांस, फेफड़ा और सर्दी-खांसी का शिकार 30 से 40 मरीजों के एक्स-रे का भी डॉक्टर सुझाव दे रहे हैं। ऐसे में यहां भी लाइन लग रही हैं। सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या ज्यादा होने के बीच जिला अस्पताल में इन्हेलर की खपत पड़ गई है।
तीन सौ बेड के अस्पताल में भी यही हाल, दवाओं की किल्लत
जिला अस्पताल ही नहीं तीन सौ बेड अस्पताल में भी इन दिनों बुरा हाल है। यहां दवाओं की भी किल्लत बनी हुई है। कुत्ता और बंदर के काटने पर दी जाने वाली एंटी रैबीज वैक्सीन को लेकर भी मारामारी हो रही है। दरअसल, जिला अस्पताल से एंटी रैबीज वैक्सीन विभाग भी तीन सौ बेड अस्पताल में शिफ्ट किया जा चुका है। यहां एंटी रैबीज वैक्सीन के लिए शहर के साथ गांवों के लोग भी पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के साथ दवाओं की किल्लत के बीच यहां भी आने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
वर्जन
बृहस्पतिवार को एक जनरल फिजीशियन की ईएमओ ड्यूटी थी। अन्य डॉक्टर ओपीडी में बैठे थे। दवाओं की कमी को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली है। इसे दिखवाया जाएगा। डॉक्टर समय से ओपीडी में बैठें इसको लेकर भी सख्ती की जाएगी।
- डॉ. अलका शर्मा, सीएमएस